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बाजार रहे सुनसान, घरों में रहकर अदा की नमाज
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देवबंद की जामा मस्जिद पर लटका ताला। इस मस्जिद में सन् 1982 में पहली बार ईद उल फितर की नमाज की शुरूआत ह?
- फोटो : DEVBAND
देवबंद/ रामपुर मनिहारान/ बड़गांव/ चिलकाना/सरसावा (सहारनपुर)। देवबंद हॉटस्पॉट घोषित होने के चलते त्योहार के दिन भी प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई। जिसके चलते जहां मस्जिदों के मुख्य द्वार बंद रहे। बाजार भी पूरी तरह सुनसान नजर आए। लोगों द्वारा अपने घरों में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते ईद की नमाज अदा की गई। कमोवेश यही स्थिति देहात क्षेत्र में भी देखने को मिली। लोगों ने अपने घरों में ईद की नमाज अदा कर एक दूसरे को त्योहार की मुबारकबाद दी।
रामपुर मनिहारान के ईदगाह गेट पर दिन भर ताला लटका रहा। नायब शहर काजी आदिल फारूकी की अगुवाई में उनके परिजनों ने अपने घर के भीतर ईद की नमाज अदा कर कोविड 19 वैश्विक महामारी से मुक्ति दिलाने को लेकर अल्लाह से दुआ की। बड़गांव में सिरसली कलां ईदगाह के इमाम इदेन मौलाना राशिद ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते ईदगाह की बजाए मस्जिद में सिर्फ चार लोगों की मौजूदगी में ईद की नमाज अदा की गई। नूनाबड़ी, कुतुबामाजरा,मोहन अंबेहटा, सहजी, ओलिया में ईद का त्योहार सादगी के साथ मनाया गया।
गंगोह में भी ईद का पर्व सादगी के साथ मनाया गया। क्षेत्र में ईदगाह और मस्जिदों पर पुलिस तैनात रही।
चिलकाना में सुबह से ही थानाध्यक्ष अमित शर्मा के नेतृत्व में सात पुलिस मोबाइल टीम पीएसी बल के साथ पूरे थाना क्षेत्र में गश्त करती रही। चिलकाना ईदगाह के पेश इमाम मौलाना मुआवज ने कहा कि सभी लोगों ने ईद की नमाज अपने घरों में अदा की तथा कोरोना जैसी भयंकर बीमारी से निजात दिलाने की दुआ की गई। अंबेहटा, छुटमलपुर, बिहारीगढ़, गागलहेड़ी, नागल, नानौता आदि कसबों में भी ईद की नमाज घरों पर ही पढ़ कर एक दूसरे को बधाई दी गई।
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सरसावा में बाजार तो शाम तक खुले लेकिन रौनक पूरी तरह गायब थी। मुस्लिम समुदाय ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की।
पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च, ड्रोन कैमरे से संदिग्धों पर रखी नजर
देवबंद। ईद उल फितर के पर्व पर नगर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों ने फ्लैग मार्च निकाला। पुलिस ने बेवजह घरों से बाहर घूम रहे लोगों को समझाकर वापस भेज दिया।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र स्वयं स्थिति पर नजर बनाए रहे। वहीं, सीओ चौब सिंह वर्मा और प्रभारी निरीक्षक यज्ञदत्त शर्मा अर्धसैनिक व पीएसी के जवानों के साथ फ्लैग मार्च करते रहे। ड्रोन कैमरे से भी स्थिति पर नजर रखी गई। कोतवाली क्षेत्र के बचीटी, खेड़ामुगल, खटौली, तल्हेडी बुजुर्ग, गंझेडी आदि संवेदनशील गांव में पुलिस बल तैनात रहा।
जामा मस्जिद में 38 साल में पहली बार नहीं अदा हुई जुमे की नमाज
देवबंद। जिस ईदगाह में 1982 से पहले ईद की नमाज अदा की जाती रही है आज वहां सन्नाटा पसरा था। कारण लॉकडाउन के चलते सभी इबादतघरों में ताले लटके थे।
दारुल उलूम के प्रेस प्रवक्ता अशरफ उस्मानी बताते हैं कि इतिहास में पहली ईद की नमाज ईदगाह व मस्जिदों में नहीं पढ़ी गई है। 1982 से पहले सिर्फ ईदगाह में ही ईद की नमाज अदा की जाती थी। जिसमें नगर ही नहीं देहात क्षेत्र से भी लाखों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचकर अल्लाह की बारगाह में नमाज अदा कर दुआ मांगते थे। 1982 में पहली बार देवबंद की जामा मस्जिद से ईद की नमाज की शुरूआत हुई। उस्मानी बताते हैं कि पवित्र रमजान माह के 30 रोजे संपन्न होने के बाद ईद उल फितर का पर्व खुशियां लेकर आता है। कोरोना महामारी ने इस बार ईद का त्योहार फीका बना दिया। लोगों ने घरों में रहकर त्योहार तो मनाया लेकिन खुशी वाली वह बात नहीं थी। लोगों ने अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों को फोन पर ही मुबारकबाद दी।
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रामपुर मनिहारान के ईदगाह गेट पर दिन भर ताला लटका रहा। नायब शहर काजी आदिल फारूकी की अगुवाई में उनके परिजनों ने अपने घर के भीतर ईद की नमाज अदा कर कोविड 19 वैश्विक महामारी से मुक्ति दिलाने को लेकर अल्लाह से दुआ की। बड़गांव में सिरसली कलां ईदगाह के इमाम इदेन मौलाना राशिद ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते ईदगाह की बजाए मस्जिद में सिर्फ चार लोगों की मौजूदगी में ईद की नमाज अदा की गई। नूनाबड़ी, कुतुबामाजरा,मोहन अंबेहटा, सहजी, ओलिया में ईद का त्योहार सादगी के साथ मनाया गया।
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गंगोह में भी ईद का पर्व सादगी के साथ मनाया गया। क्षेत्र में ईदगाह और मस्जिदों पर पुलिस तैनात रही।
चिलकाना में सुबह से ही थानाध्यक्ष अमित शर्मा के नेतृत्व में सात पुलिस मोबाइल टीम पीएसी बल के साथ पूरे थाना क्षेत्र में गश्त करती रही। चिलकाना ईदगाह के पेश इमाम मौलाना मुआवज ने कहा कि सभी लोगों ने ईद की नमाज अपने घरों में अदा की तथा कोरोना जैसी भयंकर बीमारी से निजात दिलाने की दुआ की गई। अंबेहटा, छुटमलपुर, बिहारीगढ़, गागलहेड़ी, नागल, नानौता आदि कसबों में भी ईद की नमाज घरों पर ही पढ़ कर एक दूसरे को बधाई दी गई।
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सरसावा में बाजार तो शाम तक खुले लेकिन रौनक पूरी तरह गायब थी। मुस्लिम समुदाय ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की।
पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च, ड्रोन कैमरे से संदिग्धों पर रखी नजर
देवबंद। ईद उल फितर के पर्व पर नगर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों ने फ्लैग मार्च निकाला। पुलिस ने बेवजह घरों से बाहर घूम रहे लोगों को समझाकर वापस भेज दिया।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र स्वयं स्थिति पर नजर बनाए रहे। वहीं, सीओ चौब सिंह वर्मा और प्रभारी निरीक्षक यज्ञदत्त शर्मा अर्धसैनिक व पीएसी के जवानों के साथ फ्लैग मार्च करते रहे। ड्रोन कैमरे से भी स्थिति पर नजर रखी गई। कोतवाली क्षेत्र के बचीटी, खेड़ामुगल, खटौली, तल्हेडी बुजुर्ग, गंझेडी आदि संवेदनशील गांव में पुलिस बल तैनात रहा।
जामा मस्जिद में 38 साल में पहली बार नहीं अदा हुई जुमे की नमाज
देवबंद। जिस ईदगाह में 1982 से पहले ईद की नमाज अदा की जाती रही है आज वहां सन्नाटा पसरा था। कारण लॉकडाउन के चलते सभी इबादतघरों में ताले लटके थे।
दारुल उलूम के प्रेस प्रवक्ता अशरफ उस्मानी बताते हैं कि इतिहास में पहली ईद की नमाज ईदगाह व मस्जिदों में नहीं पढ़ी गई है। 1982 से पहले सिर्फ ईदगाह में ही ईद की नमाज अदा की जाती थी। जिसमें नगर ही नहीं देहात क्षेत्र से भी लाखों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचकर अल्लाह की बारगाह में नमाज अदा कर दुआ मांगते थे। 1982 में पहली बार देवबंद की जामा मस्जिद से ईद की नमाज की शुरूआत हुई। उस्मानी बताते हैं कि पवित्र रमजान माह के 30 रोजे संपन्न होने के बाद ईद उल फितर का पर्व खुशियां लेकर आता है। कोरोना महामारी ने इस बार ईद का त्योहार फीका बना दिया। लोगों ने घरों में रहकर त्योहार तो मनाया लेकिन खुशी वाली वह बात नहीं थी। लोगों ने अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों को फोन पर ही मुबारकबाद दी।

ईद उल फितर के मद्देनजर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में फ्लैगमार्च करती पुलिस व आरएएफ के जवान- फोटो : DEVBAND

देवबंद में घर के अंदर ईद उल फितर की नमाज अदा करते अकीदतमंद- फोटो : DEVBAND