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Saharanpur News: फिटनेस जांच की अनिवार्यता खत्म, पांच हजार वाहन मालिकों को राहत
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- चालक को छोड़कर छह से नौ सीट वाले निजी वाहनों की फिटनेस जांच खत्म
- वाहन मालिकों को आठ वर्ष के बाद हर साल करानी पड़ रही थी फिटनेस जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। चालक को छोड़कर छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों की हर वर्ष फिटनेस जांच कराने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इससे जिले के करीब पांच हजार वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। अभी तक नए वाहन की खरीद के बाद आठ वर्ष तक हर साल फिटनेस जांच करानी पड़ती थी।
इस संबंध में परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से 15 सितंबर को आदेश जारी किया गया है। आदेश के मुताबिक, चालक को छोड़कर छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के लिए वार्षिक फिटनेस जांच की अनिवार्यता समाप्त की गई है। इससे व्यक्तिगत और पारिवारिक उपयोग में आने वाले ऐसे वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले प्रत्येक वर्ष फिटनेस प्रक्रिया पूरी करानी पड़ती थी।
पूर्व व्यवस्था के तहत चालक को छोड़कर छह से अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों को हर साल फिटनेस कराना अनिवार्य था। वाहन मालिकों को इसके लिए समय निकालने के साथ ही परिवहन कार्यालय से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था के बाद आदेश के दायरे में आने वाले निजी वाहन के मालिकों को हर साल फिटनेस की बाध्यता से राहत मिली है। नए वाहन की मियाद पूरी होने पर मालिक समय बढ़वाने के लिए रि-रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
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-- वर्जन
परिवहन आयुक्त कार्यालय से आदेश प्राप्त हो गया है। नए आदेश के मुताबिक, जिले में करीब पांच हजार वाहन मालिकों को लाभ मिलेगा। अब छह से अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों की फिटनेस जांच का झंझट खत्म कर दिया है। - रोहित कुमार सिंह, संभागीय निरीक्षक
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- वाहन मालिकों को आठ वर्ष के बाद हर साल करानी पड़ रही थी फिटनेस जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। चालक को छोड़कर छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों की हर वर्ष फिटनेस जांच कराने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इससे जिले के करीब पांच हजार वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। अभी तक नए वाहन की खरीद के बाद आठ वर्ष तक हर साल फिटनेस जांच करानी पड़ती थी।
इस संबंध में परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से 15 सितंबर को आदेश जारी किया गया है। आदेश के मुताबिक, चालक को छोड़कर छह से नौ सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के लिए वार्षिक फिटनेस जांच की अनिवार्यता समाप्त की गई है। इससे व्यक्तिगत और पारिवारिक उपयोग में आने वाले ऐसे वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले प्रत्येक वर्ष फिटनेस प्रक्रिया पूरी करानी पड़ती थी।
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पूर्व व्यवस्था के तहत चालक को छोड़कर छह से अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों को हर साल फिटनेस कराना अनिवार्य था। वाहन मालिकों को इसके लिए समय निकालने के साथ ही परिवहन कार्यालय से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था के बाद आदेश के दायरे में आने वाले निजी वाहन के मालिकों को हर साल फिटनेस की बाध्यता से राहत मिली है। नए वाहन की मियाद पूरी होने पर मालिक समय बढ़वाने के लिए रि-रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
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परिवहन आयुक्त कार्यालय से आदेश प्राप्त हो गया है। नए आदेश के मुताबिक, जिले में करीब पांच हजार वाहन मालिकों को लाभ मिलेगा। अब छह से अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों की फिटनेस जांच का झंझट खत्म कर दिया है। - रोहित कुमार सिंह, संभागीय निरीक्षक