{"_id":"5d28cd7a8ebc3e6d0354228c","slug":"lightning-and-rain-can-not-bear-the-power-lines-the-preparations-are-useless-saharanpur-news-mrt4328795102","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंधी और बारिश नहीं झेल पातीं विद्युत लाइनें, तैयारियां रहीं बेकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंधी और बारिश नहीं झेल पातीं विद्युत लाइनें, तैयारियां रहीं बेकार
विज्ञापन
आंधी और बारिश नहीं झेल पातीं विद्युत लाइनें, तैयारियां रहीं बेकार
सहारनपुर। आंधी और बारिश मेें बिजली की लाइनों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए विद्युत निगम की मानसून से पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बारिश और आंधी आते ही पेड़ और टहनियां लाइनों पर गिर रहे हैं, तार और खंभे टूट रहे हैं। मानसून की पहली बारिश ने कई क्षेत्रों में 30 घंटे तक बिजली व्यवस्था को ठप कर दिया था, दूसरी बारिश ने 12 घंटे तक आपूर्ति को बाधित रखा। जिससे विद्युत निगम की तैयारियों की पोल खुल गई।
मानसून से पहले ही विद्युत निगम ने शहर से लेकर देहात तक बिजली की लाइनों एवं खंभों के पास स्थित सभी पेड़ों की टहनियां की छंटाई कराई थी। अधिकारियों ने इसके लिए आठ-आठ घंटे का शट-डाउन भी लिया था। दावा किया गया था कि बारिश में पेड़ों की टहनियों से अब फाल्ट नहीं होंगे, या फिर फाल्ट काफी कम होंगे। जब आंधी के साथ मानसून की पहली बारिश हुई तो बिजली की लाइनें तार-तार हो गईं। जगह-जगह पेड़ों की टहनियां गिर गईं, कई जगह पेड़ गिरने से खंभे टूट गए। पहली आंधी बारिश में जिले भर में 100 से अधिक खंभे क्षतिग्रस्त हुए, जबकि तीन सौ से अधिक स्थानों पर पेड़ों की टहनियां लाइनों से टकराने से फाल्ट हो गए। यही नहीं बिजलीघरों में भी पानी भरने से मशीनों में फाल्ट आ गया।
हकीमपुरा फीडर से जुड़े लगभग एक दर्जन गांवों एवं लगभग डेढ़ दर्जन मोहल्लों में 30 घंटे से भी अधिक समय तक आपूर्ति बाधित रही। सुबह पांच बजे की बंद हुई सप्लाई दूसरे दिन साढ़े तीन बजे सुचारु हो सकी थी, जबकि शहर के अन्य फीडरों पर छह से आठ घंटे तक आपूर्ति बंद रही थी।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार से हुई मानसून की दूसरी बारिश के बाद कमोवेश यही स्थिति बन गई। कैलाशपुर, हरोड़ा, हाकिमपुरा में पेड़ ही लाइनों एवं खंभों पर गिर पड़े। सबसे अधिक परेशानी नहर पटरी, रजबहा पटरी, वन क्षेत्र से होकर गुजर रही लाइनों से है। बारिश में नमी आते ही पेड़ों की टहनियां झुक कर लाइनों पर आ रहीं हैं। पेड़ भी गिर रहे हैं। बृहस्पतिवार को हकीमपुरा फीडर की ओर पटनी से आ रही लाइन पर तीन पेड़ गिरे, एक पेड़ को हटाने में तीन से चार घंटे का समय लगा। उन्हें ठीक किया गया तो शकलापुरी क्षेत्र में पांच खंभों की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। वह लाइन ठीक भी नहीं हो पाई थी बुढेड़ा मार्ग पर पेड़ टूटकर गिर पड़ा। उसके कुछ देर बाद ही ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर से खंभा क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे न पूरी रात बिजली मिल सकी और न ही पूरे दिन आपूर्ति हो सकी।
बृहस्पतिवार को तेज हवा के साथ आई बारिश के चलते मानकमऊ इलाके में बिजली की लाइनों पर पेड़ गिर जाने से कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। शारदानगर की केबिल में फाल्ट आ जाने से लगभग 12 घंटे बिजली आपूर्ति ठप रही। गंगोह रोड फीडर, गुुुरुदेव नगर फीडर, बड़ी नहर के पास पेड़ों के गिर जाने से बिजली आपूर्ति लगभग 11 घंटे बाधित रही। नवादा रोड पर केबिल में आए फाल्ट से लगभग दस घंटे बिजली की आपूर्ति बाधित रही।
पहली दो तीन बारिश में अधिक परेशानी होती है- एसई
विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि मानसून से पहले काफी तैयारी करा ली गई थी। पेड़ों की टहनियों की छंटाई कराई गई थी। जर्जर खंभे एवं तार बदलवाए गए थे। इतनी तैयारियों के बावजूद पहली बारिश में परेशानी हुई। मानसून की दो तीन बारिश में जितनी टहनी एवं पेड़ गिरने होते हैं गिर जाते हैं। उसके बाद अधिक फाल्ट नहीं होते।
विज्ञापन
सहारनपुर। आंधी और बारिश मेें बिजली की लाइनों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए विद्युत निगम की मानसून से पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बारिश और आंधी आते ही पेड़ और टहनियां लाइनों पर गिर रहे हैं, तार और खंभे टूट रहे हैं। मानसून की पहली बारिश ने कई क्षेत्रों में 30 घंटे तक बिजली व्यवस्था को ठप कर दिया था, दूसरी बारिश ने 12 घंटे तक आपूर्ति को बाधित रखा। जिससे विद्युत निगम की तैयारियों की पोल खुल गई।
मानसून से पहले ही विद्युत निगम ने शहर से लेकर देहात तक बिजली की लाइनों एवं खंभों के पास स्थित सभी पेड़ों की टहनियां की छंटाई कराई थी। अधिकारियों ने इसके लिए आठ-आठ घंटे का शट-डाउन भी लिया था। दावा किया गया था कि बारिश में पेड़ों की टहनियों से अब फाल्ट नहीं होंगे, या फिर फाल्ट काफी कम होंगे। जब आंधी के साथ मानसून की पहली बारिश हुई तो बिजली की लाइनें तार-तार हो गईं। जगह-जगह पेड़ों की टहनियां गिर गईं, कई जगह पेड़ गिरने से खंभे टूट गए। पहली आंधी बारिश में जिले भर में 100 से अधिक खंभे क्षतिग्रस्त हुए, जबकि तीन सौ से अधिक स्थानों पर पेड़ों की टहनियां लाइनों से टकराने से फाल्ट हो गए। यही नहीं बिजलीघरों में भी पानी भरने से मशीनों में फाल्ट आ गया।
विज्ञापन
हकीमपुरा फीडर से जुड़े लगभग एक दर्जन गांवों एवं लगभग डेढ़ दर्जन मोहल्लों में 30 घंटे से भी अधिक समय तक आपूर्ति बाधित रही। सुबह पांच बजे की बंद हुई सप्लाई दूसरे दिन साढ़े तीन बजे सुचारु हो सकी थी, जबकि शहर के अन्य फीडरों पर छह से आठ घंटे तक आपूर्ति बंद रही थी।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार से हुई मानसून की दूसरी बारिश के बाद कमोवेश यही स्थिति बन गई। कैलाशपुर, हरोड़ा, हाकिमपुरा में पेड़ ही लाइनों एवं खंभों पर गिर पड़े। सबसे अधिक परेशानी नहर पटरी, रजबहा पटरी, वन क्षेत्र से होकर गुजर रही लाइनों से है। बारिश में नमी आते ही पेड़ों की टहनियां झुक कर लाइनों पर आ रहीं हैं। पेड़ भी गिर रहे हैं। बृहस्पतिवार को हकीमपुरा फीडर की ओर पटनी से आ रही लाइन पर तीन पेड़ गिरे, एक पेड़ को हटाने में तीन से चार घंटे का समय लगा। उन्हें ठीक किया गया तो शकलापुरी क्षेत्र में पांच खंभों की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। वह लाइन ठीक भी नहीं हो पाई थी बुढेड़ा मार्ग पर पेड़ टूटकर गिर पड़ा। उसके कुछ देर बाद ही ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर से खंभा क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे न पूरी रात बिजली मिल सकी और न ही पूरे दिन आपूर्ति हो सकी।
बृहस्पतिवार को तेज हवा के साथ आई बारिश के चलते मानकमऊ इलाके में बिजली की लाइनों पर पेड़ गिर जाने से कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। शारदानगर की केबिल में फाल्ट आ जाने से लगभग 12 घंटे बिजली आपूर्ति ठप रही। गंगोह रोड फीडर, गुुुरुदेव नगर फीडर, बड़ी नहर के पास पेड़ों के गिर जाने से बिजली आपूर्ति लगभग 11 घंटे बाधित रही। नवादा रोड पर केबिल में आए फाल्ट से लगभग दस घंटे बिजली की आपूर्ति बाधित रही।
पहली दो तीन बारिश में अधिक परेशानी होती है- एसई
विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि मानसून से पहले काफी तैयारी करा ली गई थी। पेड़ों की टहनियों की छंटाई कराई गई थी। जर्जर खंभे एवं तार बदलवाए गए थे। इतनी तैयारियों के बावजूद पहली बारिश में परेशानी हुई। मानसून की दो तीन बारिश में जितनी टहनी एवं पेड़ गिरने होते हैं गिर जाते हैं। उसके बाद अधिक फाल्ट नहीं होते।