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Saharanpur News: 2024 का सबक, 2027 की बिसात, भाजपा का राजपूत पर दांव
Sat, 28 Feb 2026 01:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 28 Feb 2026 01:03 AM IST
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सहारनपुर। 2024 में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा ने अजीत सिंह राणा पर दांव खेलकर 2027 की बिसात बिछा दी है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति राजपूतों में नाराजगी दिखाई दी थी। यहां तक कि राजपूतों ने महापंचायत का आयोजन कर भाजपा के प्रति विरोध भी जाहिर किया था। ऐसे में भाजपा ने सबक लेते हुए अजीत सिंह राणा को जिलाध्यक्ष बनाकर राजपूतों को साधने का काम किया है।
दरअसल, सहारनपुर लोकसभा सीट को मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। यहां पर मुस्लिमों की संख्या करीब सात लाख से ज्यादा है। इसके अलावा दलित, राजपूत, गुर्जर और सैनी समाज समेत अन्य बिरादरी के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने राघव लखनपाल शर्मा को सहारनपुर लोकसभा सीट और पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी को कैराना लोकसभा सीट से मैदान में उतारा में था। ऐसे में राजपूत समाज में नाराजगी थी कि उनके समाज के व्यक्ति की टिकट को लेकर अनदेखी की गई। राजपूत समाज ने नानौता में महापंचायत कर भाजपा के प्रति विरोध भी जताया था। भाजपा आलाकमान को भी इस नाराजगी की भनक थी। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य दिग्गज यहां पर प्रचार क लिए आए थे, लेकिन चुनाव के दिन राजपूत बाहुल्य गांवों में दोपहर बाद से ही बूथ खाली नजर आने लगे थे। राजपूतों की नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। भाजपा को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। 2027 का चुनाव नजदीक है।
ऐसे में भाजपा ने राजपूत समाज को साधने के लिए खुड़ाना गांव निवासी अजीत सिंह राणा को जिलाध्यक्ष बनाकर दांव खेला है। अब देखना होगा कि भाजपा का यह दांव 2027 में कितना कारगर साबित होता है। अजीत सिंह राणा 2003 में मंडल महामंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा नानौता ब्लॉक के दो बार मंडल अध्यक्ष, दो बार जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और अब पिछले करीब छह साल से जिला उपाध्यक्ष के पद पर थे। बता दें, कि कांग्रेस के इमरान को 547967 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राघव लखनपाल को 483425 वोट मिले हैं। इमरान मसूद ने राघव लखनपाल को 64542 वोटों के अंतर से हराया है।
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इससे पहले सैनी और कश्यप समाज से थे जिलाध्यक्ष
इससे पहले की बात करें तो निवर्तमान जिलाध्यक्ष सैनी समाज से डॉ. महेंद्र सिंह सैनी थे, जो करीब साढ़े छह साल तक जिलाध्यक्ष रहे। उनसे पहले विजेंद्र कश्यप और उससे पहले राजपूत समाज से मानवीर सिंह पुंडीर जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। यूं कहे कि कश्यप और सैनी के बाद भाजपा ने एक बार फिर से राजपूत को जिलाध्यक्ष बनाकर अपनी बिसात बिछाई है।
खाटूश्याम मंदिर में लाइन में लगे थे, तभी आया फोन, आप जिलाध्यक्ष बन गए
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अजीत सिंह राणा ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उन्होंने नामांकन किया था, लेकिन नंबर आएगा या नहीं, इस बारे में कुछ नहीं पता था। बृहस्पतिवार को वह अपने परिवार के साथ राजस्थान में खाटूश्याम दर्शन के लिए गए थे। वहां पर परिवार के साथ कतार में लगे थे। इसी दौरान चिलकाना मंडल के एक पदाधिकारी का फोन आया। उन्होंने बताया कि आलाकमान ने सूची जारी कर दी है और आप जिलाध्यक्ष बन गए हैं। इसके बाद तो मानों खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अजीत सिंह राणा का कहना है कि उनकी प्राथमिकता सभी को साथ लेकर चलने की है, जो भी नाराजगी है उसे दूर किया जाएगा।
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दरअसल, सहारनपुर लोकसभा सीट को मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। यहां पर मुस्लिमों की संख्या करीब सात लाख से ज्यादा है। इसके अलावा दलित, राजपूत, गुर्जर और सैनी समाज समेत अन्य बिरादरी के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने राघव लखनपाल शर्मा को सहारनपुर लोकसभा सीट और पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी को कैराना लोकसभा सीट से मैदान में उतारा में था। ऐसे में राजपूत समाज में नाराजगी थी कि उनके समाज के व्यक्ति की टिकट को लेकर अनदेखी की गई। राजपूत समाज ने नानौता में महापंचायत कर भाजपा के प्रति विरोध भी जताया था। भाजपा आलाकमान को भी इस नाराजगी की भनक थी। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य दिग्गज यहां पर प्रचार क लिए आए थे, लेकिन चुनाव के दिन राजपूत बाहुल्य गांवों में दोपहर बाद से ही बूथ खाली नजर आने लगे थे। राजपूतों की नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। भाजपा को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। 2027 का चुनाव नजदीक है।
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ऐसे में भाजपा ने राजपूत समाज को साधने के लिए खुड़ाना गांव निवासी अजीत सिंह राणा को जिलाध्यक्ष बनाकर दांव खेला है। अब देखना होगा कि भाजपा का यह दांव 2027 में कितना कारगर साबित होता है। अजीत सिंह राणा 2003 में मंडल महामंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा नानौता ब्लॉक के दो बार मंडल अध्यक्ष, दो बार जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और अब पिछले करीब छह साल से जिला उपाध्यक्ष के पद पर थे। बता दें, कि कांग्रेस के इमरान को 547967 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राघव लखनपाल को 483425 वोट मिले हैं। इमरान मसूद ने राघव लखनपाल को 64542 वोटों के अंतर से हराया है।
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इससे पहले सैनी और कश्यप समाज से थे जिलाध्यक्ष
इससे पहले की बात करें तो निवर्तमान जिलाध्यक्ष सैनी समाज से डॉ. महेंद्र सिंह सैनी थे, जो करीब साढ़े छह साल तक जिलाध्यक्ष रहे। उनसे पहले विजेंद्र कश्यप और उससे पहले राजपूत समाज से मानवीर सिंह पुंडीर जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। यूं कहे कि कश्यप और सैनी के बाद भाजपा ने एक बार फिर से राजपूत को जिलाध्यक्ष बनाकर अपनी बिसात बिछाई है।
खाटूश्याम मंदिर में लाइन में लगे थे, तभी आया फोन, आप जिलाध्यक्ष बन गए
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अजीत सिंह राणा ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उन्होंने नामांकन किया था, लेकिन नंबर आएगा या नहीं, इस बारे में कुछ नहीं पता था। बृहस्पतिवार को वह अपने परिवार के साथ राजस्थान में खाटूश्याम दर्शन के लिए गए थे। वहां पर परिवार के साथ कतार में लगे थे। इसी दौरान चिलकाना मंडल के एक पदाधिकारी का फोन आया। उन्होंने बताया कि आलाकमान ने सूची जारी कर दी है और आप जिलाध्यक्ष बन गए हैं। इसके बाद तो मानों खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अजीत सिंह राणा का कहना है कि उनकी प्राथमिकता सभी को साथ लेकर चलने की है, जो भी नाराजगी है उसे दूर किया जाएगा।