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रुसी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद साथियों सहित छोड़ा फ्लैट
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आस मोहम्मद
- फोटो : SAHARANPUR
छुटमलपुर (सहारनपुर)। हरिजन कॉलोनी निवासी डॉ. कामिल के कीव में फंसे बेटे आस मोहम्मद ने सोमवार की शाम सात बजे अपने पिता से बात की। उसने बताया कि वह रूसी राष्ट्रपति की विदेशी नागरिकों को कीव छोड़ने की चेतावनी के बाद अपने दस भारतीय साथियों के साथ फ्लैट से निकल पड़ा है। फिलहाल वह कीव के रेलवे स्टेशन पर है। यहां से वह हंगरी बार्डर जाएगा। जहां से वह भारत की फ्लाइट पकड़ने का प्रयास करेगा।
ठंड से तबीयत बिगड़ने पर हास्टल लौटा हर्ष
छुटमलपुर के संत नगर निवासी डॉ. कंवलजीत सिंह सैनी ने बताया कि उनके बेटे हर्ष की रोमानिया बॉर्डर पर ठंड के कारण तबीयत बिगड़ गई थी। ऐसे में वह फिलहाल अपने हास्टल लौट गया है। रोमानिया बार्डर पर फिलहाल भीड़ ज्यादा है। जैसे ही भीड़ छंटेगी वह फिर वहां जा कर स्वदेश लौटने का प्रयास करेगा।
युक्रेन में फंसे छात्रों से संबंधित खबरें
बाहर हो रही गोलाबारी, वह छिपा है बंकर में
बेहट। यूक्रेन के निप्रो शहर में फंसे बेहट के गांव ताजपुरा के छात्र काशिफ हसन ने फोन पर बताया कि वह अभी यूनिवर्सिटी के बंकर से बाहर निकला है और किसी तरह रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। ट्रेन ही यहां से निकलने का एकमात्र सुरक्षित माध्यम बचा है।
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ओजार्ड है सुरक्षित, हंगरी के रास्ते आया स्वदेश
बेहट। यूक्रेन के ओजार्ड शहर से वतन वापस लौटे बेहट के गांव गंदेवड़ निवासी एमबीबीएस के छात्र अनिरुद्ध कुमार सिंह ने बताया, कि अभी ओजार्ड शहर पूरी तरह से सुरक्षित है। रूस की सेना अभी ओजार्ड शहर तक नहीं पहुंची। हालांकि दो दिन पहले ही शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। उन्हें बस में हंगरी बॉर्डर तक लाया गया। बॉर्डर से दूसरी बस में उन्हें हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। 27 फरवरी को वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।
चिलकाना का शोएब कुरैशी पहुंचा स्वदेश
चिलकाना। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा चिलकाना के मोहल्ला मजहर हसन निवासी एजाज कुरैशी का पुत्र शोएब कुरैशी सोमवार की सुबह फ्लाइट से दिल्ली पहुंच गया। दिल्ली पहुंचकर शोएब ने अपने पिता को भारत आने की जानकारी दी। एजाज कुरैशी ने बताया कि उनका पुत्र फिलहाल दिल्ली में है तथा अपने मित्रों के साथ सुरक्षित है। सोमवार देर शाम तक वह घर पहुंच जाएगा। चिलकाना का दूसरा छात्र अजीम अंसारी अभी लवीव यूनिवर्सिटी में अपने साथियों के साथ है। अजीम शनिवार को पोलैंड की सीमा पर पहुंच गया था, लेकिन वहां से उन्हें वापस कर दिया गया था।
रोमानिया बॉर्डर पहुंचा पीयूष, स्वदेश वापसी का पता नहीं
बड़गांव। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र जैसे-तैसे रोमानिया और पड़ोसी देशों के बॉर्डर तक पहुंच चुके हैं, लेकिन वतन वापसी की राह में अभी भी समस्याएं हैं। बड़गांव का पीयूष राणा रविवार की रात 12 बजे रोमानिया बार्डर पहुंच गया था, लेकिन उसका परिजनों से संपर्क नहीं हो सका है। दिनभर मोबाइल पर संपर्क साधने का बार बार प्रयास किया, लेकिन काल कनेक्ट नहीं हो सकी। इसे लेकर परिजन चिंता में हैं।
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ठंड से तबीयत बिगड़ने पर हास्टल लौटा हर्ष
छुटमलपुर के संत नगर निवासी डॉ. कंवलजीत सिंह सैनी ने बताया कि उनके बेटे हर्ष की रोमानिया बॉर्डर पर ठंड के कारण तबीयत बिगड़ गई थी। ऐसे में वह फिलहाल अपने हास्टल लौट गया है। रोमानिया बार्डर पर फिलहाल भीड़ ज्यादा है। जैसे ही भीड़ छंटेगी वह फिर वहां जा कर स्वदेश लौटने का प्रयास करेगा।
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बाहर हो रही गोलाबारी, वह छिपा है बंकर में
बेहट। यूक्रेन के निप्रो शहर में फंसे बेहट के गांव ताजपुरा के छात्र काशिफ हसन ने फोन पर बताया कि वह अभी यूनिवर्सिटी के बंकर से बाहर निकला है और किसी तरह रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। ट्रेन ही यहां से निकलने का एकमात्र सुरक्षित माध्यम बचा है।
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ओजार्ड है सुरक्षित, हंगरी के रास्ते आया स्वदेश
बेहट। यूक्रेन के ओजार्ड शहर से वतन वापस लौटे बेहट के गांव गंदेवड़ निवासी एमबीबीएस के छात्र अनिरुद्ध कुमार सिंह ने बताया, कि अभी ओजार्ड शहर पूरी तरह से सुरक्षित है। रूस की सेना अभी ओजार्ड शहर तक नहीं पहुंची। हालांकि दो दिन पहले ही शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। उन्हें बस में हंगरी बॉर्डर तक लाया गया। बॉर्डर से दूसरी बस में उन्हें हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। 27 फरवरी को वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।
चिलकाना का शोएब कुरैशी पहुंचा स्वदेश
चिलकाना। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा चिलकाना के मोहल्ला मजहर हसन निवासी एजाज कुरैशी का पुत्र शोएब कुरैशी सोमवार की सुबह फ्लाइट से दिल्ली पहुंच गया। दिल्ली पहुंचकर शोएब ने अपने पिता को भारत आने की जानकारी दी। एजाज कुरैशी ने बताया कि उनका पुत्र फिलहाल दिल्ली में है तथा अपने मित्रों के साथ सुरक्षित है। सोमवार देर शाम तक वह घर पहुंच जाएगा। चिलकाना का दूसरा छात्र अजीम अंसारी अभी लवीव यूनिवर्सिटी में अपने साथियों के साथ है। अजीम शनिवार को पोलैंड की सीमा पर पहुंच गया था, लेकिन वहां से उन्हें वापस कर दिया गया था।
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बड़गांव। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र जैसे-तैसे रोमानिया और पड़ोसी देशों के बॉर्डर तक पहुंच चुके हैं, लेकिन वतन वापसी की राह में अभी भी समस्याएं हैं। बड़गांव का पीयूष राणा रविवार की रात 12 बजे रोमानिया बार्डर पहुंच गया था, लेकिन उसका परिजनों से संपर्क नहीं हो सका है। दिनभर मोबाइल पर संपर्क साधने का बार बार प्रयास किया, लेकिन काल कनेक्ट नहीं हो सकी। इसे लेकर परिजन चिंता में हैं।