एशियन गेम्स 2023: गांव की पगडंडियों पर दौड़ना सीखा, आज देश में छाया कार्तिक
सहारनपुर में एशियन गेम्स में देश के लिए रजत पदक जीतने वाले कार्तिक कुमार की राह बेहद कठिन रही। खेतों की पगडंडियों पर दौड़ना सीखने वाले कार्तिक आज देश भर में नाम कर रहे हैं।
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गांव शिमलाना के किसान धीर सिंह के बेटे कार्तिक कुमार ने एशियन गेम्स की दस हजार मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल कर देश, प्रदेश और जनपद का नाम रोशन किया है। कार्तिक की उपलब्धि से खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। कार्तिक इससे पहले भी अनेक प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं।
सहारनपुर में एशियन गेम्स में देश के लिए रजत पदक जीतने वाले कार्तिक कुमार की राह बेहद कठिन रही। जिसने गांव की पगडंडियों पर दौड़ लगाना सीखा। मेहनत की बदौलत आज देश में छा गया। सेना की तैयारी में जुटे बड़े भाई सोनू शुरू में कार्तिक को अपने साथ लेकर दौड़ते थे। गांव में दौड़ते-दौड़ते कार्तिक को इतना भरोसा हो चला था कि उसने पहली ही नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक जीत लिया था।
कार्तिक के बड़े भाई सोनू गांव में ही सप्लीमेंट की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि वह युवावस्था में सेना में भर्ती की तैयारी करते थे। इसके लिए गांव में ही दौड़ लगाते थे। कार्तिक उस समय छोटा था, जिसे वह अपने साथ लेकर दौड़ने जाते थे। कार्तिक में अलग ही स्फूर्ति थी। वह गांव में ही दौड़ते हुए पहले राज्य स्तर पर पदक जीता। इसके बाद उसका चयन नेशनल के लिए हुआ।
केरल में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसने दौड़ में रजत पदक जीता था। इसके बाद वर्ष 2016 में वह अच्छे प्रशिक्षण के लिए सहारनपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम आ गया। यहां संदीप पुंडीर की देखरेख में उसने दौड़ शुरू की।
इसी दौरान कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हुए वर्ष 2018 में उसका चयन सेना में हुआ। सेना में उसके कोच सूबेदार यूनिस खान हुए। उनकी देखरेख में वह लगातार खेलता गया। अभी तक वह करीब सात राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुका है। कार्तिक का सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
कोच ने दी पदक जीतने की सूचना
सोनू ने बताया कि एशियन गेम्स के लिए चीन गए कार्तिक से उनकी बात कभी कभी होती है। क्योंकि वह वहां कड़ी मेहनत के साथ प्रतिभाग कर रहा है। उन्होंने बताया कि दस हजार मीटर दौड़ में रजत पदक जीत की सूचना उन्हें कोच यूनिस खान ने फोन कर दी। सूचना मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। उन्होंने बड़गांव से लड्डू मंगवाकर गांव में बंटवाए। ग्रामीण बधाई देने के लिए देर शाम तक घर पहुंचते रहे। इसके अलावा एथलेटिक्स से जुड़े लोग भी फोन पर बधाई दे रहे हैं।
छोटा भाई भी कम नहीं
कार्तिक का छोटा भाई अनुज कुमार भी कम नहीं है। वह फिलहाल पांच हजार मीटर दौड़ की तैयारी कर रहा है। अभी तक तीन बार प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुका है। वह कार्तिक को अपना आदर्श मानता है। बेटे की इस उपलब्धि पर मां सुदेश भी गदगद है। सुदेश का कहना है कि उसे पता था कि बेटा एक दिन नाम रोशन करेगा।
कार्तिक अंबेहटा चांद स्थित जनता इंटर कॉलेज का छात्र रहा है। वर्तमान में कार्तिक नेवी में सब इंस्पेक्टर हैं। डॉ. गुप्ता ने प्रतियोगिता से लौटने पर कार्तिक का भव्य स्वागत और सम्मान करने की बात कही है।