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जमीन में ऐसे ही दबा दी गई पेयजल की पाइपलाइन
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शकलापुरी में डाली गयी पाइप लाइन से बहता पानी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। पेयजल के लिए शकलापुरी मार्ग पर करीब चार साल पहले डाली गई पाइपलाइन में अब बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल, पाइपलाइन डालने में नियमों का पालन नहीं किया गया था, जिसकी वजह से पाइपलाइन जगह जगह मिट्टी से बाहर निकली हुई है। ऐसे में पशुओं आदि के पैर रखे जाने से पाइपलाइन कई जगह से लीक हो गई है। जिससे काफी पानी बर्बाद हो रहा है।
बेहट रोड से शकलापुरी को जाने वाले मार्ग पर बीते दस साल में कई कॉलोनियां काटी गई हैं। इन कॉलोनियों में बसी आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम द्वारा चार साल पहले करीब तीन किलोमीटर की पाइपलाइन डाली गई थी। उस समय सफेद रंग का पाइप जमीन में बिछाया गया था, लेकिन हैरत की बात यह है कि कार्यदायी एजेंसी ने उक्त पाइप को नियमानुसार न डालकर सड़क किनारे खोदाई कराकर जमीन में ऐसे ही रखवा दिया था, जबकि नियम यह है कि पाइपलाइन को डालने से पहले जमीन को खोदकर उसमें कंकरीट तथा सीमेंट और रेत का मिश्रण डाला जाता है। कंकरीट, सीमेंट और रेत का बेस बनने के बाद उसके ऊपर लाइन बिछाई जाती है, जिससे लाइन धंसे नहीं, लेकिन उक्त लाइन डालने में ऐसा नहीं हुआ। चूंकि सड़क खेतों से ऊंची है। ऐसे में सड़क की साइड जगह जगह से कटने की वजह से कुछ जगहों पर पाइपलाइन बाहर निकल आई है। पाइपलाइन बाहर निकल आने की वजह से उसके साथ हादसे हो रहे हैं और वह जगह जगह से लीक हैं। इसकी वजह से कई दिन से पानी बर्बाद हो रहा है।
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अमृत योजना में ऐसे हुआ कार्य
अमृत योजना के तहत 2019-20 में करीब 20 हजार घरों में पेयजल कनेक्शन देने के लिए पाइपलाइनें डाली गई हैं। इसमें कार्यदायी संस्था ने काले रंग का पाइप बिछाया है, जिसकी उम्र मिट्टी के भीतर कम से कम 25 साल बताई गई है। उक्त लाइन को बिछाने में जमीन को खोदकर उसमें कंकरीट, सीमेंट और रेत का बेस बनाकर लाइन बिछाई गई है। पाइपलाइन के ऊपर भी ईंटें रखकर मिट्टी से दबवाया गया है, जिससे कोई खराबी होने पर यदि लाइन को खोदें तो ईंट पाइप के लिए सुरक्षा का कार्य करे।
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शकलापुरी मार्ग पर पाइपलाइन डालने का कार्य हमारे कार्यकाल से पहले का है। ऐसे में उक्त लाइन को देखे बिना कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है। लेकिन यदि अब पाइपलाइन मिट्टी से बाहर निकल रही है और लीक है तो इंजीनियर को साथ ले जाकर पाइपलाइन का सर्वे करेंगे। जहां भी कोई कमी है उसे दूर कराया जाएगा।
मनोज कुमार आर्य, महाप्रबंधक, जलकल।
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बेहट रोड से शकलापुरी को जाने वाले मार्ग पर बीते दस साल में कई कॉलोनियां काटी गई हैं। इन कॉलोनियों में बसी आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम द्वारा चार साल पहले करीब तीन किलोमीटर की पाइपलाइन डाली गई थी। उस समय सफेद रंग का पाइप जमीन में बिछाया गया था, लेकिन हैरत की बात यह है कि कार्यदायी एजेंसी ने उक्त पाइप को नियमानुसार न डालकर सड़क किनारे खोदाई कराकर जमीन में ऐसे ही रखवा दिया था, जबकि नियम यह है कि पाइपलाइन को डालने से पहले जमीन को खोदकर उसमें कंकरीट तथा सीमेंट और रेत का मिश्रण डाला जाता है। कंकरीट, सीमेंट और रेत का बेस बनने के बाद उसके ऊपर लाइन बिछाई जाती है, जिससे लाइन धंसे नहीं, लेकिन उक्त लाइन डालने में ऐसा नहीं हुआ। चूंकि सड़क खेतों से ऊंची है। ऐसे में सड़क की साइड जगह जगह से कटने की वजह से कुछ जगहों पर पाइपलाइन बाहर निकल आई है। पाइपलाइन बाहर निकल आने की वजह से उसके साथ हादसे हो रहे हैं और वह जगह जगह से लीक हैं। इसकी वजह से कई दिन से पानी बर्बाद हो रहा है।
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अमृत योजना में ऐसे हुआ कार्य
अमृत योजना के तहत 2019-20 में करीब 20 हजार घरों में पेयजल कनेक्शन देने के लिए पाइपलाइनें डाली गई हैं। इसमें कार्यदायी संस्था ने काले रंग का पाइप बिछाया है, जिसकी उम्र मिट्टी के भीतर कम से कम 25 साल बताई गई है। उक्त लाइन को बिछाने में जमीन को खोदकर उसमें कंकरीट, सीमेंट और रेत का बेस बनाकर लाइन बिछाई गई है। पाइपलाइन के ऊपर भी ईंटें रखकर मिट्टी से दबवाया गया है, जिससे कोई खराबी होने पर यदि लाइन को खोदें तो ईंट पाइप के लिए सुरक्षा का कार्य करे।
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शकलापुरी मार्ग पर पाइपलाइन डालने का कार्य हमारे कार्यकाल से पहले का है। ऐसे में उक्त लाइन को देखे बिना कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है। लेकिन यदि अब पाइपलाइन मिट्टी से बाहर निकल रही है और लीक है तो इंजीनियर को साथ ले जाकर पाइपलाइन का सर्वे करेंगे। जहां भी कोई कमी है उसे दूर कराया जाएगा।
मनोज कुमार आर्य, महाप्रबंधक, जलकल।