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कानून व्यवस्था की नई चुनौतियों को भांप रहे हैं अफसर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 02 Oct 2015 12:37 AM IST
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कानून व्यवस्था को लेकर अनगिनत किरकिरी करा चुके अफसर अब नई चुनौतियों को भांपने में जुट गए हैं। यही कारण है कि प्रशासनिक लापरवाही को परखने और अफसरों के पेंच कसने को प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी खुद मैदान में उतर रहे हैं। सांप्रदायिक संवेदनशीलता को भी देखते हुए शासन के अधिकारी पेंच कसने में जुटे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव और त्योहारों को लेकर प्रशासनिक संजीदगी सकारात्मक माहौल बना सकती है।
दो साल पहले हुए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से ही वेस्ट यूपी में सांप्रदायिकता की चिंगारी भड़की और धीरे-धीरे कई जिले की चपेट में आए। करीब एक साल पहले वेस्ट यूपी का सबसे शांत जिला माने जाने वाले सहारनपुर में भी दंगा हो गया। इसके बाद प्रशासन से लेकर शासन तक के सामने सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने की चुनौती है। इसके अलावा सभी वर्गों में विश्वास पैदा करना भी अफसरों के सामने बड़ा पहाड़ बनकर खड़ा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक हुए ज्यादातर बवाल में प्रशासन और पुलिस की चूक सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन बवाल ने न केवल अफसरों की बल्कि पूरे सरकार की ही छवि को खराब किया।
इसके बाद से ही लगातार समीक्षा के साथ ही स्थानीय अधिकारियों के पेंच कसने में शासन स्तर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। आपको बता दें कि चार महीने पहले ही प्रमुख सचिव गृह और तत्कालीन डीजीपी ने सहारनपुर का दौरा किया था। अफसरों का फीडबैक जानने के लिए जनता से भी सीधा संवाद कायम किया था। इससे साफ है कि वेस्ट यूपी में खड़ी कानून व्यवस्था की नई चुनौतियों को अफसर भांपने लगे हैं। एक बात तय है कि आला अफसरों की बैठक और फटकार का असर भी काफी हद तक स्थानीय अफसरों पर दबाव बनाता है। ऐसे में अफसर भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ज्यादा संजीदा रहेंगे।
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कारणों को भी समझ गए हैं अफसर
वेस्ट यूपी में ज्यादातर सांप्रदायिक बवाल के पीछे कहानी एक सी ही सामने आती है। छेड़छाड़ के अलावा अवैध पशु कटान और शराब भी बवाल के पीछे का बड़ा कारण है। यही कारण है कि करीब दो घंटे की बैठक में डीजीपी का पूरा फोकस शराब और पशु तस्करी रोकने को लेकर रहा। इनता ही नहीं, अफसरों को फटकार लगाने में भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
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दो साल पहले हुए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से ही वेस्ट यूपी में सांप्रदायिकता की चिंगारी भड़की और धीरे-धीरे कई जिले की चपेट में आए। करीब एक साल पहले वेस्ट यूपी का सबसे शांत जिला माने जाने वाले सहारनपुर में भी दंगा हो गया। इसके बाद प्रशासन से लेकर शासन तक के सामने सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने की चुनौती है। इसके अलावा सभी वर्गों में विश्वास पैदा करना भी अफसरों के सामने बड़ा पहाड़ बनकर खड़ा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक हुए ज्यादातर बवाल में प्रशासन और पुलिस की चूक सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन बवाल ने न केवल अफसरों की बल्कि पूरे सरकार की ही छवि को खराब किया।
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इसके बाद से ही लगातार समीक्षा के साथ ही स्थानीय अधिकारियों के पेंच कसने में शासन स्तर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। आपको बता दें कि चार महीने पहले ही प्रमुख सचिव गृह और तत्कालीन डीजीपी ने सहारनपुर का दौरा किया था। अफसरों का फीडबैक जानने के लिए जनता से भी सीधा संवाद कायम किया था। इससे साफ है कि वेस्ट यूपी में खड़ी कानून व्यवस्था की नई चुनौतियों को अफसर भांपने लगे हैं। एक बात तय है कि आला अफसरों की बैठक और फटकार का असर भी काफी हद तक स्थानीय अफसरों पर दबाव बनाता है। ऐसे में अफसर भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ज्यादा संजीदा रहेंगे।
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कारणों को भी समझ गए हैं अफसर
वेस्ट यूपी में ज्यादातर सांप्रदायिक बवाल के पीछे कहानी एक सी ही सामने आती है। छेड़छाड़ के अलावा अवैध पशु कटान और शराब भी बवाल के पीछे का बड़ा कारण है। यही कारण है कि करीब दो घंटे की बैठक में डीजीपी का पूरा फोकस शराब और पशु तस्करी रोकने को लेकर रहा। इनता ही नहीं, अफसरों को फटकार लगाने में भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।