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चिकित्सकों का अभाव, तैयारियां भी अधूरी

Wed, 02 Jun 2021 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 11:46 PM IST
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Lack of doctors, preparations also incomplete
सहारनपुर। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का ज्यादा खतरा जताया जा रहा है। जिस तरह से महाराष्ट्र में एक माह के दौरान आठ हजार से ज्यादा बच्चे संक्रमित मिले, उससे यह खतरा और बढ़ जाता है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देखें तो एसबीडी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में तो बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। चिंता यही है कि यदि तीसरी लहर आई तो चिकित्सकों के अभाव में बच्चों की सेहत का ख्याल कैसे रखा जाएगा।
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दरअसल, जिले में स्वास्थ्य विभाग के कुल चिकित्सकों के 218 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 98 ही चिकित्सक जिले में तैनात हैं। खास बात यह है कि बाल रोग विशेषज्ञ सिर्फ नौ हैं, जिनमें तीन एसबीडी जिला अस्पताल और छह पिलखनी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक देवबंद सीएचसी पर तैनात हैं।
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-- तैयारियां नहीं हो पा रही पूरी
संक्रमण की चपेट में आने पर बच्चों को समय पर उचित उपचार मिल सके, उसकी तैयारी करने के लिए खुद मुख्यमंत्री कह चुके हैं। उसी के तहत पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) भी बनाई जानी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में 100 बेड और जिला अस्पताल में 25 बेड की पीआईसीयू तैयार रहेगी। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञों के साथ ही प्राइवेट चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। चिकित्सकों का पैनल बनेगा, जो पीआईसीयू में तैनात किया जाएगा।
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-- 57 दिन में 673 बच्चों में मिला था संक्रमण
जिले में दूसरी लहर के दौरान एक से 12 वर्ष की आयु के 673 बच्चे संक्रमित हुए हैं। अप्रैल माह में 219, जबकि मई में 454 बच्चों में संक्रमण मिला था। औसतन रोजाना छह से ज्यादा बच्चे संक्रमित मिल रहे थे। अब गनीमत है कि संक्रमण की दर कम हुई है, लेकिन तीसरी लहर की आशंकाओं को देखते हुए अभी पहले से ज्यादा तैयारी रखनी होगी।

---- देहात में ज्यादा बुरा हाल
गंगोह सीएचसी के तहत पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें किसी पर भी बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। संक्रामक बीमारियां भी सबसे ज्यादा गंगोह क्षेत्र में फैलती हैं। इसी तरह सरसावा, रामपुर मनिहारान, चिलकाना, अंबेहटा, तीतरो, बेहट, सुन्हेटी खड़खड़ी, फतेहपुर, नानौता, साढौली कदीम और बिहारीगढ़ स्वास्थ्य केंद्र पर भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। देवबंद सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ है, लेकिन रणखंडी स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं है। जब ओपीडी चालू थी, तब प्रतिदिन आठ से दस बच्चे उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचते थे। अब कोरोना की वजह से ओपीडी बंद हैं।
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