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मुसलमानों को आतंकवादी कहना नफरत फैलाने वालों की सोच : मदनी
Tue, 18 Aug 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 18 Aug 2026 12:55 AM IST
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देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि मुसलमानों को आतंकवादी कहकर नफरत फैलाने वाले ही समाज में आतंक का माहौल पैदा कर रहे हैं।
मौलाना अरशद मदनी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि देश की आजादी और लोकतंत्र महान विरासत हैं। आज कुछ सांप्रदायिक ताकतें देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने के साथ संविधान से सेक्युलर शब्द हटाने की कोशिश कर रही हैं। मदनी ने कहा कि भारत की आजादी का इतिहास दारुल उलूम, उलमा, मदरसों और मुसलमानों की कुर्बानियों के उल्लेख के बिना अधूरा है। वर्ष 1857 के बाद वर्ष 1866 में दारुल उलूम की स्थापना ही ऐसे लोगों को तैयार करने के उद्देश्य से हुई थी, जो अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष करें।
मौलाना मदनी ने कहा कि शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी, शेखुल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी और उनके साथियों को माल्टा में इसलिए कैद किया गया था कि वह भारत को अंग्रेजी गुलामी से आजाद देखना चाहते थे। पहले भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिशें हुईं और मुस्लिम विरोधी दंगे हुए, लेकिन आज के हालात में अंतर यह है कि अब मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है।
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मौलाना अरशद मदनी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि देश की आजादी और लोकतंत्र महान विरासत हैं। आज कुछ सांप्रदायिक ताकतें देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने के साथ संविधान से सेक्युलर शब्द हटाने की कोशिश कर रही हैं। मदनी ने कहा कि भारत की आजादी का इतिहास दारुल उलूम, उलमा, मदरसों और मुसलमानों की कुर्बानियों के उल्लेख के बिना अधूरा है। वर्ष 1857 के बाद वर्ष 1866 में दारुल उलूम की स्थापना ही ऐसे लोगों को तैयार करने के उद्देश्य से हुई थी, जो अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष करें।
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मौलाना मदनी ने कहा कि शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी, शेखुल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी और उनके साथियों को माल्टा में इसलिए कैद किया गया था कि वह भारत को अंग्रेजी गुलामी से आजाद देखना चाहते थे। पहले भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिशें हुईं और मुस्लिम विरोधी दंगे हुए, लेकिन आज के हालात में अंतर यह है कि अब मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है।
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