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लाचार, बेबस निगाहों को मदद की आस
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लाचार, बेबस निगाहों को मदद की आस
बेहट। खुवाशपुर में बुधवार को हुए अग्निकांड के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। उनके पास तन के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है। लाचार व बेबस निगाहों को अब मदद की आस है।
देर रात आग पर काबू पाए जाने के बाद बेघर हुए पीड़ित परिवारों के लिए तहसील प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था कराई। इस अग्निकांड में कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन यहां के गरीब परिवारों के पास न तो सिर छिपाने के लिए छत बची और न ही खाने के लिए अनाज के दाने। सब कुछ राख हो गया। फूंस की छत जलने के बाद इस गांव में मिट्टी की कच्ची दीवारें खंडहर की तरह खड़ी दिखाई दे रही हैं। तपती धूप और लू के थपेड़ों को इंसानी जानें भी झेल रही हैं और उनके मवेशी भी। अपने बच्चों के साथ औरतें जले हुए घरों के बाहर बैठी यही सोच रही थीं कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। कुछ लोग राख के ढेर इसलिए कुरेद रहे थे कि शायद कुछ बच गया हो। प्रशासनिक टीम अग्निकांड प्रभावित लोगों का सर्वे कर रही थी। तहसीलदार आशुतोष ने बताया कि बुधवार रात सभी पीड़ितों को खाने के पैकेट वितरित कर दिए गए थे। सुबह होने पर सभी को राशन के पैकेट दिए गए। अन्य प्रशासनिक सहायता के लिए सर्वे करा लिया है। पीड़ितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में सीधी भेजी जाएगी।
कल शाम से नहीं हुई पेयजल आपूर्ति
खुवाशपुर में बुधवार शाम से ही पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी है। लोगों के पास पीने के लिए जो पानी घरों में रखा था, उन्होंने उसे आग बुझाने के लिए इस्तेमाल कर लिया था। गांव में पांच हैंडपंप हैं, जिनमें से एक खराब है। इन चार हैंडपंपों से पानी निकालना मुश्किल भरा काम है।
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जनप्रतिनिधि व नेताओं ने दिया मदद का आश्वासन
पूर्व विधायक महावीर सिंह राणा भी खुवाशपुर पहुंचकर अग्निकांड पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इससे पहले बुधवार देर शाम विधायक नरेश सैनी और सायान मसूद ने भी गांव पहुंचकर मदद का भरोसा दिलाया था।
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बेहट। खुवाशपुर में बुधवार को हुए अग्निकांड के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। उनके पास तन के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है। लाचार व बेबस निगाहों को अब मदद की आस है।
देर रात आग पर काबू पाए जाने के बाद बेघर हुए पीड़ित परिवारों के लिए तहसील प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था कराई। इस अग्निकांड में कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन यहां के गरीब परिवारों के पास न तो सिर छिपाने के लिए छत बची और न ही खाने के लिए अनाज के दाने। सब कुछ राख हो गया। फूंस की छत जलने के बाद इस गांव में मिट्टी की कच्ची दीवारें खंडहर की तरह खड़ी दिखाई दे रही हैं। तपती धूप और लू के थपेड़ों को इंसानी जानें भी झेल रही हैं और उनके मवेशी भी। अपने बच्चों के साथ औरतें जले हुए घरों के बाहर बैठी यही सोच रही थीं कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। कुछ लोग राख के ढेर इसलिए कुरेद रहे थे कि शायद कुछ बच गया हो। प्रशासनिक टीम अग्निकांड प्रभावित लोगों का सर्वे कर रही थी। तहसीलदार आशुतोष ने बताया कि बुधवार रात सभी पीड़ितों को खाने के पैकेट वितरित कर दिए गए थे। सुबह होने पर सभी को राशन के पैकेट दिए गए। अन्य प्रशासनिक सहायता के लिए सर्वे करा लिया है। पीड़ितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में सीधी भेजी जाएगी।
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कल शाम से नहीं हुई पेयजल आपूर्ति
खुवाशपुर में बुधवार शाम से ही पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी है। लोगों के पास पीने के लिए जो पानी घरों में रखा था, उन्होंने उसे आग बुझाने के लिए इस्तेमाल कर लिया था। गांव में पांच हैंडपंप हैं, जिनमें से एक खराब है। इन चार हैंडपंपों से पानी निकालना मुश्किल भरा काम है।
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जनप्रतिनिधि व नेताओं ने दिया मदद का आश्वासन
पूर्व विधायक महावीर सिंह राणा भी खुवाशपुर पहुंचकर अग्निकांड पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इससे पहले बुधवार देर शाम विधायक नरेश सैनी और सायान मसूद ने भी गांव पहुंचकर मदद का भरोसा दिलाया था।