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कश्मीरियों को बेहतरी और हिंसा में फर्क समझना होगा - वैदिक
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भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष वेदप्रताप वैदिक
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। राजनीतिक विश्लेषक, वरिष्ठ पत्रकार एवं भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष डॉक्टर वेदप्रताप वैदिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त किया जाना सराहनीय है। अब जम्मू कश्मीर में बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए तथा वहां के लोगों को संदेश दिया जाए कि हिंसा से कुछ नहीं होगा।
डाक्टर वेदप्रताप वैदिक रविवार को सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान हकीकत नगर में योगेश गुप्ता के आवास पर पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में जिन लोगों की जुबान जहर उगलती है, उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि जुबान प्यारी है या जान। क्योंकि हिंसा के बदले हिंसा होती है, इसलिए जम्मू कश्मीर के आवाम के लिए वहां के नेताओं को अपनी जुबान पर काबू रखना चाहिए। साथ सरकार को जम्मू कश्मीर में बेहतर सुविधाएं देनी चाहिए, ताकि जम्मू कश्मीर तरक्की करे और वहां के लोग तरक्की पसंद बनें।
वहीं, उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर मौजूदा दौर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। अपने उस सत्याग्रह की कहानी भी सुनाई, जो हिंदी के लिए किया गया था। उन्होंने बताया कि जब वह 13 साल के थे, तब हिंदी भाषा के लिए इंदौर से सत्याग्रह किया और एक महीना तक पटियाला की जेब में रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को जीवित रखने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलना चाहिए।
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इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान दौरे के दौरान आतंकी हाफिज सईद से हुई मुलाकात के बारे में भी बहुत कुछ बताया। उन्होंने कहा कि जब वह 2014 में पाकिस्तानी मीडिया से मुलाकात कर रहे थे, तभी हाफिज सईद से मुलाकात का वक्त तय हुआ था। उन्होंने हाफिज सईद के घर पहुंचकर मुलाकात की और आतंकवाद को लेकर तर्क वितर्क हुए थे। यह भी बताया कि हाफिज सईद की मां रोपड़ की रहने वाली है, जो बाद में पाकिस्तान चली गई थी। वहीं, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब चारों तरफ से घिर चुका है और बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान को कहीं से भी सपोर्ट नहीं मिल रही है।
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डाक्टर वेदप्रताप वैदिक रविवार को सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान हकीकत नगर में योगेश गुप्ता के आवास पर पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में जिन लोगों की जुबान जहर उगलती है, उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि जुबान प्यारी है या जान। क्योंकि हिंसा के बदले हिंसा होती है, इसलिए जम्मू कश्मीर के आवाम के लिए वहां के नेताओं को अपनी जुबान पर काबू रखना चाहिए। साथ सरकार को जम्मू कश्मीर में बेहतर सुविधाएं देनी चाहिए, ताकि जम्मू कश्मीर तरक्की करे और वहां के लोग तरक्की पसंद बनें।
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वहीं, उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर मौजूदा दौर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। अपने उस सत्याग्रह की कहानी भी सुनाई, जो हिंदी के लिए किया गया था। उन्होंने बताया कि जब वह 13 साल के थे, तब हिंदी भाषा के लिए इंदौर से सत्याग्रह किया और एक महीना तक पटियाला की जेब में रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को जीवित रखने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलना चाहिए।
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इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान दौरे के दौरान आतंकी हाफिज सईद से हुई मुलाकात के बारे में भी बहुत कुछ बताया। उन्होंने कहा कि जब वह 2014 में पाकिस्तानी मीडिया से मुलाकात कर रहे थे, तभी हाफिज सईद से मुलाकात का वक्त तय हुआ था। उन्होंने हाफिज सईद के घर पहुंचकर मुलाकात की और आतंकवाद को लेकर तर्क वितर्क हुए थे। यह भी बताया कि हाफिज सईद की मां रोपड़ की रहने वाली है, जो बाद में पाकिस्तान चली गई थी। वहीं, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब चारों तरफ से घिर चुका है और बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान को कहीं से भी सपोर्ट नहीं मिल रही है।