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किसी के हाथ कांपे, किसी का कारतूस अटका
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:03 AM IST
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आत्मरक्षा के नाम पर स्टेटस के लिए राइफल से लेकर अन्य कई हथियार तो रख लिए और उनके लाइसेंस भी ले लिए गए लेकिन कई लाइसेंस धारक ऐसे हैं जिन्हें सही ढंग से हथियार चलाना तो दूर कारतूस लोड करना तक नहीं आता। वर्षों पहले से लाइसेंस ले चुके कई बुजुर्गों के तो अब हथियार चलाते हुए हाथ कांपने लगे हैं।
शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए रविवार को कुम्हारहेड़ा फायरिंग रेंज में कराए गए फायरिंग टेस्ट में लाइसेंसधारकों की यह पोल खुल गई। किसी के हाथ कांपे, किसी का निशाना चूका तो कुछ कारतूस तक लोड नहीं कर सके। तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई नवीनीकरण प्रक्रिया के लिए एक ही दिन में पूरे जिले से 1800 से अधिक लाइसेंसधारकों को फायरिंग टेस्ट के लिए बुला तो लिया गया। मगर उनके लिए जरूरी इंतजाम तक नहीं कराए गए। आलम यह रहा कि सैकड़ों लाइसेंसधारकों का दम तो कतारों में लगे हुए ही निकल गया।
पांच से सात घंटे में आया नंबर
जिले के नकुड़, गंगोह, सरसावा, छुटमलपुर, नागल, तीतरों समेत अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से आए लाइसेंसधारकों ने बताया कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद पांच से सात घंटे तक में नंबर आया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही दिन उन्हें बुलाना ठीक नहीं था।
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काउंटर पर हंगामा, वसूली का आरोप
फायरिंग टेस्ट के लिए पहुंचे अलताफ, दिलशाद, जुबैर, संजय आदि ने बताया कि यहां फायरिंग रेंज में फायरिंग टेस्ट से पहले रसीद के लिए एक ही काउंटर लगाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका कारण लाइसेंसधारकों से वसूली करने की नीयत रहा। उन्होंने बताया कि कतार में ही खड़े खड़े थकने के कारण साथ में आए लोगों को बीच बीच में खड़ा करना पड़ा। उन्होंने कहा कि तहसीलवार व्यवस्था भी की जा सकती थी।
बैंक वालों की राइफल भी धोखा दे गई
फायरिंग टेस्ट में शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण से पहले किए गए परीक्षण में एक बैंक शाखा की राइफल भी धोखा दे गई। उसे परीक्षण के दौरान चलाया नहीं जा सका। सवाल उठता है कि यदि बैंक वालों के पास ही सही हथियार नहीं होंगे तो फिर सुरक्षा तंत्र कैसे मजबूत होगा।
अब तो चुनाव के बाद ही मिलेगा दूसरा मौका
फायरिंग टेस्ट की प्रक्रिया में शामिल रहे प्रतिसार निरीक्षक ताहिर हुसैन ने बताया कि इस परीक्षण में मुख्य रूप से हथियारों का टेस्ट किया जाना था। शाम तक टेस्ट रखने के बावजूद 700 के आसपास ही परीक्षण हो पाए। जो लाइसेंसीधारक टेस्ट से वंचित रह जाएंगे, उनके लिए तो अब देवबंद उपचुनाव के बाद ही फायरिंग टेस्ट का आयोजन हो सकता है।
खुद सहारा देकर चलवाने पड़े हथियार
फायरिंग रेंज में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों का सहारा लेकर बुजुर्गों से हथियार चलवाने पड़े। कुछ युवा लाइसेंसधारक भी कारतूस लोड करने से लेकर फायरिंग के निशाने में चूके। फायरिंग के दौरान एक शख्स की राइफल जाम हो गई तो बोला- काफी दिन से धूप और तेल नहीं मिला है न, इसलिए ऐसा हो रहा है।
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शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए रविवार को कुम्हारहेड़ा फायरिंग रेंज में कराए गए फायरिंग टेस्ट में लाइसेंसधारकों की यह पोल खुल गई। किसी के हाथ कांपे, किसी का निशाना चूका तो कुछ कारतूस तक लोड नहीं कर सके। तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई नवीनीकरण प्रक्रिया के लिए एक ही दिन में पूरे जिले से 1800 से अधिक लाइसेंसधारकों को फायरिंग टेस्ट के लिए बुला तो लिया गया। मगर उनके लिए जरूरी इंतजाम तक नहीं कराए गए। आलम यह रहा कि सैकड़ों लाइसेंसधारकों का दम तो कतारों में लगे हुए ही निकल गया।
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पांच से सात घंटे में आया नंबर
जिले के नकुड़, गंगोह, सरसावा, छुटमलपुर, नागल, तीतरों समेत अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से आए लाइसेंसधारकों ने बताया कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद पांच से सात घंटे तक में नंबर आया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही दिन उन्हें बुलाना ठीक नहीं था।
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काउंटर पर हंगामा, वसूली का आरोप
फायरिंग टेस्ट के लिए पहुंचे अलताफ, दिलशाद, जुबैर, संजय आदि ने बताया कि यहां फायरिंग रेंज में फायरिंग टेस्ट से पहले रसीद के लिए एक ही काउंटर लगाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका कारण लाइसेंसधारकों से वसूली करने की नीयत रहा। उन्होंने बताया कि कतार में ही खड़े खड़े थकने के कारण साथ में आए लोगों को बीच बीच में खड़ा करना पड़ा। उन्होंने कहा कि तहसीलवार व्यवस्था भी की जा सकती थी।
बैंक वालों की राइफल भी धोखा दे गई
फायरिंग टेस्ट में शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण से पहले किए गए परीक्षण में एक बैंक शाखा की राइफल भी धोखा दे गई। उसे परीक्षण के दौरान चलाया नहीं जा सका। सवाल उठता है कि यदि बैंक वालों के पास ही सही हथियार नहीं होंगे तो फिर सुरक्षा तंत्र कैसे मजबूत होगा।
अब तो चुनाव के बाद ही मिलेगा दूसरा मौका
फायरिंग टेस्ट की प्रक्रिया में शामिल रहे प्रतिसार निरीक्षक ताहिर हुसैन ने बताया कि इस परीक्षण में मुख्य रूप से हथियारों का टेस्ट किया जाना था। शाम तक टेस्ट रखने के बावजूद 700 के आसपास ही परीक्षण हो पाए। जो लाइसेंसीधारक टेस्ट से वंचित रह जाएंगे, उनके लिए तो अब देवबंद उपचुनाव के बाद ही फायरिंग टेस्ट का आयोजन हो सकता है।
खुद सहारा देकर चलवाने पड़े हथियार
फायरिंग रेंज में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों का सहारा लेकर बुजुर्गों से हथियार चलवाने पड़े। कुछ युवा लाइसेंसधारक भी कारतूस लोड करने से लेकर फायरिंग के निशाने में चूके। फायरिंग के दौरान एक शख्स की राइफल जाम हो गई तो बोला- काफी दिन से धूप और तेल नहीं मिला है न, इसलिए ऐसा हो रहा है।