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नालों पर कब्जे होते रहे, निगम के अधिकारी सोते रहे
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नालों पर कब्जे होते रहे, निगम के अधिकारी सोते रहे
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी में नालों के ऊपर और नालों की पटरियों पर बड़ी संख्या में कब्जे हैं। नगर निगम की ओर से नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। नतीजा यह है कि वर्तमान में भी नालों पर लिंटर डालकर दुकानें खड़ी करने का सिलसिला जारी है।
नगर निगम चकराता रोड पर नाले का पुनर्निर्माण करा रहा है। पेट्रोल पंप की बगल में नाले के ऊपर दुकानें बनाई गई हैं। नगर निगम ने दुकानों को नाले के ऊपर से हटाने की बजाय दुकान के भीतर से स्लैब तोड़कर अंदर ही अंदर नाले को बनवा शुरू किया है। इस नाले पर आगे तक बड़ी संख्या में कब्जे हैं। यह तो केवल एक उदाहरण है। शहर के नालों पर कब्जों की अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को भ्रमण कर पड़ताल की तो चिलकाना रोड से मातागढ़ को होकर पांवधोई नदी में गिरने वाले नाले पर मुन्नालाल कॉलेज से आगे बड़ी संख्या में कब्जे मिले। मातागढ़ के पास भी मदरसे की बगल में लोगों ने नाले पर लिंटर डालकर दुकानें बना ली हैं। कई जगहों पर पार्किंग स्थल तक बना लिए है। कमेला क्षेत्र से आने वाले क्रेजी नाले पर बड़ी संख्या में कब्जे हैं। लुहानी सराय के पास नाले की पटरी पर मार्केट बना दी गई हैं। दूसरी साइड में बड़ी संख्या में परिवार नाले की दीवार पर मकान खड़े कर चुके हैं। इनके अलावा तमाम बाजारों से होकर गुजरने वाले नालों को दुकानदारों ने अपने कब्जे में लिया हुआ है। ज्यादातर नालों पर दुकानें बनाई गई हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये में है। नगर निगम की ओर से अभी तक नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। शायद यही वजह है कि कब्जे होने का सिलसिला जारी है।
चार बड़े और 124 छोटे नाले
नगर क्षेत्र में नालों की कुल संख्या 132 है। इनमें चार नाले बड़े हैं, जिनमें मातागढ़ क्षेत्र से आने वाला नाला, कमेला क्षेत्र से आने वाला नाला, जेबीएस इंटर कॉलेज के सामने से गुजरने वाला नाला, खलासी लाइन से आने वाला नाला शामिल हैं। इनके अलावा 124 छोटे नाले और नालियां हैं।
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प्रवर्तन दल पर है जिम्मेदारी
नगर निगम में प्रवर्तन दल करीब डेढ़ साल से है, जिसके प्रभारी कर्नल बीएस नेगी हैं। उनके पास अपनी पूरी टीम है। प्रवर्तन दल के कार्यों में एक कार्य निगम की संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराना और अतिक्रमण हटाना भी है। बीते दिनों प्रवर्तन दल ने जगह-जगह जागर निगम की जमीनों को कब्जा मुक्त कराते हुए वहां निगम के बोर्ड लगवाए हैं, मगर नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रवर्तन दल की ओर से भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
जहां-जहां नाले बन रहे हैं और उन पर छोटे मोटे कब्जे हैं तो हम उनको हटवा रहे हैं, मगर जहां नाले पर बड़े निर्माण हुए हैं उन पर निगम का संपत्ति विभाग एक्शन लेगा। इसके अलावा नगरायुक्त के जैसे भी निर्देश होंगे प्रवर्तन दल उनका अनुपालन करेगा।
कर्नल बीएस नेगी, प्रवर्तन दल प्रभारी।
नाले और नालियों को कब्जामुक्त कराते हुए उनको दुरुस्त कराना नगर निगम की प्राथमिकता में है। 14 वें वित्त से मिलने वाले बजट का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च किया जाएगा। जिन लोगों ने भी कब्जा किया है वह खुद ही कब्जे हटा लें तो बेहतर है अन्यथा नगर निगम सख्ती के साथ काम करेगा।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी में नालों के ऊपर और नालों की पटरियों पर बड़ी संख्या में कब्जे हैं। नगर निगम की ओर से नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। नतीजा यह है कि वर्तमान में भी नालों पर लिंटर डालकर दुकानें खड़ी करने का सिलसिला जारी है।
नगर निगम चकराता रोड पर नाले का पुनर्निर्माण करा रहा है। पेट्रोल पंप की बगल में नाले के ऊपर दुकानें बनाई गई हैं। नगर निगम ने दुकानों को नाले के ऊपर से हटाने की बजाय दुकान के भीतर से स्लैब तोड़कर अंदर ही अंदर नाले को बनवा शुरू किया है। इस नाले पर आगे तक बड़ी संख्या में कब्जे हैं। यह तो केवल एक उदाहरण है। शहर के नालों पर कब्जों की अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को भ्रमण कर पड़ताल की तो चिलकाना रोड से मातागढ़ को होकर पांवधोई नदी में गिरने वाले नाले पर मुन्नालाल कॉलेज से आगे बड़ी संख्या में कब्जे मिले। मातागढ़ के पास भी मदरसे की बगल में लोगों ने नाले पर लिंटर डालकर दुकानें बना ली हैं। कई जगहों पर पार्किंग स्थल तक बना लिए है। कमेला क्षेत्र से आने वाले क्रेजी नाले पर बड़ी संख्या में कब्जे हैं। लुहानी सराय के पास नाले की पटरी पर मार्केट बना दी गई हैं। दूसरी साइड में बड़ी संख्या में परिवार नाले की दीवार पर मकान खड़े कर चुके हैं। इनके अलावा तमाम बाजारों से होकर गुजरने वाले नालों को दुकानदारों ने अपने कब्जे में लिया हुआ है। ज्यादातर नालों पर दुकानें बनाई गई हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये में है। नगर निगम की ओर से अभी तक नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। शायद यही वजह है कि कब्जे होने का सिलसिला जारी है।
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चार बड़े और 124 छोटे नाले
नगर क्षेत्र में नालों की कुल संख्या 132 है। इनमें चार नाले बड़े हैं, जिनमें मातागढ़ क्षेत्र से आने वाला नाला, कमेला क्षेत्र से आने वाला नाला, जेबीएस इंटर कॉलेज के सामने से गुजरने वाला नाला, खलासी लाइन से आने वाला नाला शामिल हैं। इनके अलावा 124 छोटे नाले और नालियां हैं।
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प्रवर्तन दल पर है जिम्मेदारी
नगर निगम में प्रवर्तन दल करीब डेढ़ साल से है, जिसके प्रभारी कर्नल बीएस नेगी हैं। उनके पास अपनी पूरी टीम है। प्रवर्तन दल के कार्यों में एक कार्य निगम की संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराना और अतिक्रमण हटाना भी है। बीते दिनों प्रवर्तन दल ने जगह-जगह जागर निगम की जमीनों को कब्जा मुक्त कराते हुए वहां निगम के बोर्ड लगवाए हैं, मगर नालों को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रवर्तन दल की ओर से भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
जहां-जहां नाले बन रहे हैं और उन पर छोटे मोटे कब्जे हैं तो हम उनको हटवा रहे हैं, मगर जहां नाले पर बड़े निर्माण हुए हैं उन पर निगम का संपत्ति विभाग एक्शन लेगा। इसके अलावा नगरायुक्त के जैसे भी निर्देश होंगे प्रवर्तन दल उनका अनुपालन करेगा।
कर्नल बीएस नेगी, प्रवर्तन दल प्रभारी।
नाले और नालियों को कब्जामुक्त कराते हुए उनको दुरुस्त कराना नगर निगम की प्राथमिकता में है। 14 वें वित्त से मिलने वाले बजट का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च किया जाएगा। जिन लोगों ने भी कब्जा किया है वह खुद ही कब्जे हटा लें तो बेहतर है अन्यथा नगर निगम सख्ती के साथ काम करेगा।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।