फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   It is a big crime to keep Rosa in the condition of illness: ulma

बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना बड़ा गुनाह, रोजेदार कर रहे अपनी शंकाओं का समाधान 

Sun, 19 May 2019 11:30 PM IST
Prag Gupta ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर Published by: Prag Gupta Updated Sun, 19 May 2019 11:30 PM IST
विज्ञापन
It is a big crime to keep Rosa in the condition of illness: ulma
रमजान मुबारक
हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए गए। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने कहा कि बीमारी की हालत में जबरन रोजा रखना और रखवाना बड़ा गुनाह है। अगर जिंदगी को खतरा हो तो रोजा कजा कर देना चाहिए। ऐसा न करना शरीयत में आत्महत्या जैसा करना माना गया है, जो बहुत बड़ा गुनाह है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि पवित्र रमजान का पहला अशराह पूरा हो कर दूसरा अशराह शुरू हो चुका है। रमजान माह बहुत तेजी से निकल रहा है। मुसलमानों को चाहिए इस पवित्र महीने का पूरा फायदा उठाएं और खुदा से अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और खास लोगों सहित पूरे हिंदुस्तानियों के लिए दुआ करें। रमजान में मिलने वाले हर लाभ को जाया न होने दें, जितना हो सके अल्लाह से खूब मांगे। 
विज्ञापन


सवाल :- हरियाणा के गांव मोई निवासी फरहा दिलशाद ने पूछा कि उनके परिवार के लोग और वह खुद भी काफी समय से कोयला चबा कर दांतों को साफ करते हैं। उनको इसी से साफ करना अच्छा लगता है। अब वह रोजे में भी ऐसा ही करते आ रहे है। उनके मामा ने बताया कि रोजे की हालत में कोयला चबा कर दांत साफ करने से रोजा टूट जाता है। शरीयत में इसके लिए क्या हुक्म है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

जवाब :- कोयला चबाकर दांत साफ नहीं करने चाहिए। शरीयत के अनुसार अगर कोयले का अंश हलक के अंदर चला गया तो रोजा खत्म हो जाएगा। 

सवाल:- बेहट निवासी सादिक सिद्दीकी ने पूछा कि वह रोज अपने घर से पांच किलोमीटर दूर रोजे की हालत में काम से जाते हैं। रास्ते में धूल और मिट्टी उनके मुंह और नाक जरिए हलक में जाती है। क्या इससे उनका रोजा तो नहीं टूटता है। 
जवाब:- शरीयत के अनुसार हलक में बिना इख्तियार गर्द, गुब्बार, धूल और मिट्टी जाने से रोजा नहीं टूटता है, लेकिन यदि किसी ने जान बूझकर रोजे की हालत में गर्द, ग़ुब्बार, धूल, मिट्टी को अपने हलक में लिया तो ऐसा करने से  रोजा टूट जाएगा। 

सवाल :- मुुजफ्फरनगर निवासी सरवर ने मालूम किया कि उनके चाचा माली हालत से बहुत परेशान हैं। क्या शरीयत के अनुसार वह अपने चाचा को जकात का पैसा दे सकते हैं? 
जवाब:- जी हां! शरीयत के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति के चाचा या ताया जकात लेने के मुस्ताहिक हैं तो उनको जकात दी जा सकती है। इसीलिए आप भी अपने चाचा और ताया को जकात का पैसा दे सकते हैं। शरीयत में इसकी बिल्कुल इजाजत है।


सवाल:- माहीपुरा निवासी शालू ने पूछा कि वह रोजे की हालत में थी कि अचानक उनकी आंख में कुछ कचरा आकर गिर गया, जिस वजह से उनकी आंखों से बहुत पानी निकल रहा है। वह पूछना चाहती हैं कि क्या अब उनका रोजा खत्म हो गया है।
जवाब:- रोजे की हालत में आंख में कुछ गिर जाने की वजह से पानी बहने पर रोजा नहीं टूटता है। आपका रोजा सलामत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed