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Saharanpur News: मुश्किल दौर से गुजर रहा है आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग
Fri, 23 Aug 2024 02:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 23 Aug 2024 02:59 AM IST
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विंड चाइंम- आयरन हेंडीक्राफ्ट
सहारनपुर, बेहट। जनपद के छोटे से कस्बे बेहट को दुनिया में पहचान दिलाने वाला आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग जीएसटी और आईजीएसटी की विसंगतियों के चलते मुश्किल दौर से गुजर रहा है। सालाना 50 से 60 करोड़ का निर्यात कर विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले इस उद्योग पर बिजली की लगातार महंगी होती दरें और कच्चे माल के आसमान छूते दामों की मार भी पड़ रही है।
दरअसल, इस उद्योग को वर्ष 1972 में हाजी मोहम्मद रफीक एवं हाजी मोहम्मद इलियास ने कुटीर उद्योग के रूप में घंटी बनाने के साथ शुरू किया था। 90 के दशक में हाजी मोहम्मद रफीक ने निर्यात का लाइसेंस लिया था, जिसके बाद बेहट से अमेरिका को घंटी का निर्यात शुरू हुआ। इसके बाद कई कंपनियों ने निर्यात के लाइसेंस हासिल किए। बेहट के आयरन हैंडीक्राफ्ट कारखानों में लोहे से बनी विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बननी शुरू हो गईं। क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगों को यहां रोजगार मिलता है।
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इन देशों में होता है निर्यात
यहां की कलाकृतियों (उत्पाद) का निर्यात अमेरिका, जापान, कनाड़ा, ब्राजील, ग्रीस, अर्जेंटीना, स्पेन, स्वीटजरलैंड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, साउथ अफ्रीका, इटली, थाईलैंड, चिली, इंग्लैंड, जॉर्डन आदि देशों में किया जाता है।
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जीएसटी और आईजीएसटी लागू होने पर बढ़ी मुश्किलें
इंडियन विलेज हैंडीक्राफ्ट के एमडी अब्दुल माजिद ने बताया की आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर जीएसटी और आइजीएसटी की मार पड़ रही है। एक जुलाई 2017 से लागू हुए जीएसटी और आइजीएसटी के बाद से उनके द्वारा जो 12 प्रतिशत जीएसटी और आइजीएसटी दिया जा रहा है, उसके रिफंड में दिक्कतें आ रही हैं। पहले उन्हें लोहे पर नौ प्रतिशत की सब्सिडी सरकार की तरफ से मिलती थी, जो अब घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दी गई है।
उधर, प्रदेश सरकार बिजली की दरों में लगातार वृद्धि कर रही है। बिजली महंगी होने के साथ कच्चे माल के रेट भी बढ़ रहे हैं। इन सब परिस्थितियों से उनका आर्थिक ढांचा प्रभावित हो रहा है।
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पुरानी दरों पर ड्रा बैक दे सरकार
आईएसए हैंडीक्राफ्ट के स्वामी हाजी सिद्दीक का कहना है कि सरकार को पुरानी दरों पर ड्रा बैक देना चाहिए, क्योंकि महंगाई के दौर में आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग के अंतर्गत बनने वाले सामान में लागत ज्यादा आने की वजह कारोबारियों को काम करने में दिक्कतें हो रही हैं।
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लागत अधिक आने से प्रतियोगिता नहीं कर पा रहे हैं
आईवीएच एक्सपोर्ट के एमडी फजले इलाही का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाइना के उत्पाद सस्ते हैं, जबकि लागत के हिसाब से हमारे उत्पाद महंगे हैं, जिसकी वजह से हम बाजार में कंपटीशन नहीं कर पा रहे हैं। भारत सरकार को चाइना की तर्ज पर उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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नए नियम से भी बढ़ी परेशानी
क्रिएटिव इंटरनेशनल के स्वामी मोहम्मद अम्मार ने बताया कि सरकार के नए नियम से भी परेशानी बढ़ी है। इस नियम के तहत अब उन्हें सप्लायर से माल खरीदने पर 45 दिन में उसका भुगतान करना पड़ता है। देरी होने पर वह उनकी इनकम में जुडे़गा और उन्हें उस पर भी टैक्स देना होगा, जबकि पूर्व में ऐसा नहीं था।
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दरअसल, इस उद्योग को वर्ष 1972 में हाजी मोहम्मद रफीक एवं हाजी मोहम्मद इलियास ने कुटीर उद्योग के रूप में घंटी बनाने के साथ शुरू किया था। 90 के दशक में हाजी मोहम्मद रफीक ने निर्यात का लाइसेंस लिया था, जिसके बाद बेहट से अमेरिका को घंटी का निर्यात शुरू हुआ। इसके बाद कई कंपनियों ने निर्यात के लाइसेंस हासिल किए। बेहट के आयरन हैंडीक्राफ्ट कारखानों में लोहे से बनी विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बननी शुरू हो गईं। क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगों को यहां रोजगार मिलता है।
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इन देशों में होता है निर्यात
यहां की कलाकृतियों (उत्पाद) का निर्यात अमेरिका, जापान, कनाड़ा, ब्राजील, ग्रीस, अर्जेंटीना, स्पेन, स्वीटजरलैंड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, साउथ अफ्रीका, इटली, थाईलैंड, चिली, इंग्लैंड, जॉर्डन आदि देशों में किया जाता है।
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जीएसटी और आईजीएसटी लागू होने पर बढ़ी मुश्किलें
इंडियन विलेज हैंडीक्राफ्ट के एमडी अब्दुल माजिद ने बताया की आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर जीएसटी और आइजीएसटी की मार पड़ रही है। एक जुलाई 2017 से लागू हुए जीएसटी और आइजीएसटी के बाद से उनके द्वारा जो 12 प्रतिशत जीएसटी और आइजीएसटी दिया जा रहा है, उसके रिफंड में दिक्कतें आ रही हैं। पहले उन्हें लोहे पर नौ प्रतिशत की सब्सिडी सरकार की तरफ से मिलती थी, जो अब घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दी गई है।
उधर, प्रदेश सरकार बिजली की दरों में लगातार वृद्धि कर रही है। बिजली महंगी होने के साथ कच्चे माल के रेट भी बढ़ रहे हैं। इन सब परिस्थितियों से उनका आर्थिक ढांचा प्रभावित हो रहा है।
पुरानी दरों पर ड्रा बैक दे सरकार
आईएसए हैंडीक्राफ्ट के स्वामी हाजी सिद्दीक का कहना है कि सरकार को पुरानी दरों पर ड्रा बैक देना चाहिए, क्योंकि महंगाई के दौर में आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग के अंतर्गत बनने वाले सामान में लागत ज्यादा आने की वजह कारोबारियों को काम करने में दिक्कतें हो रही हैं।
लागत अधिक आने से प्रतियोगिता नहीं कर पा रहे हैं
आईवीएच एक्सपोर्ट के एमडी फजले इलाही का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाइना के उत्पाद सस्ते हैं, जबकि लागत के हिसाब से हमारे उत्पाद महंगे हैं, जिसकी वजह से हम बाजार में कंपटीशन नहीं कर पा रहे हैं। भारत सरकार को चाइना की तर्ज पर उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
नए नियम से भी बढ़ी परेशानी
क्रिएटिव इंटरनेशनल के स्वामी मोहम्मद अम्मार ने बताया कि सरकार के नए नियम से भी परेशानी बढ़ी है। इस नियम के तहत अब उन्हें सप्लायर से माल खरीदने पर 45 दिन में उसका भुगतान करना पड़ता है। देरी होने पर वह उनकी इनकम में जुडे़गा और उन्हें उस पर भी टैक्स देना होगा, जबकि पूर्व में ऐसा नहीं था।