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Saharanpur News: जिले में हुआ नवाचार, बच्चों का बढ़ा शारीरिक और मानसिक विकास
Sun, 17 Aug 2025 10:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 17 Aug 2025 10:53 PM IST
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जिले में किए गए नवाचार के परिणाम का चार्ट।
सहारनपुर। तीन से छह वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जिले ने नवाचार किया। सुनहरा कल पोषण नाम के अभियान को लांच किया गया। शुरुआत में अभियान में 864 आगंनबाड़ी केंद्रों के 20 हजार बच्चों को शामिल किया गया। अभियान के सुखद परिणाम सामने आए हैं। बच्चों के शारीरिक, मानसिक के साथ भावनाओं के विकास में चार से 54 फीसदी तक की वृद्धि हुई है।
तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चों के विकास के संबंध में जिले में कार्ययोजना बनाई। योजना में आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल किया। बच्चों के विकास के लिए योजना बनाई गई। इसके लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए। केंद्र सरकार ने तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 में लांच किया गया था।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर मास्टर ट्रेनर्स को नेशनल और प्रदेश करिकुलम को आसान कर ट्रेनिंग दी गई। पहले उन्हें पांच दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद ट्रेनर्स ने केंद्रों में बच्चों के बीच रहकर 20 दिन का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ट्रेनर्स से फीडबैक लिया गया। फीडबैक में जो भी परेशानियां आई, उन्हें दूर किया गया। हर चरण पर बच्चों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है।
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विकास के लिए अलग-अलग गतिविधियां
अभियान के तहत बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास, भावनात्मक विकास के लिए अलग-अलग गतिविधियां हुई। जैसे शारीरिक गतिविधि के लिए बच्चों को पहले रस्सी कूदना, चलते हुए कूदना, वस्तुओं से बचकर चलना आदि सिखाया गया। भावनात्मक विकास के लिए बच्चों को कहानी के माध्यम से उनके अंदर आ रहे भावनाओं को पहचाना सिखाया।
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सुखद रहे परिणाम
अभियान में जिले के 20 हजार बच्चों को शामिल किया गया। अक्टूबर से शुरू हुआ प्रशिक्षण मार्च तक चला। अभियान में शामिल बच्चें जो पहले भावनाओं को मात्र चार फीसदी तक ही पहचान पा रहे थे, यह बढ़कर 30 फीसदी तक जा पहुंचा। वस्तुओं के वर्गीकरण श्रेणी में भी बढोत्तरी हुई। यह 13 से बढ़कर 53 फीसदी हो गई। इसी तरह सुनने व समझने की क्षमता भी 15 से बढ़कर 26 फीसदी तक जा पहुंची। बच्चों की गिनती आदि का कौशल भी 3 से बढ़कर 22 फीसदी तक जा पहुंचा।
- वर्जन
अभियान के तहत केंद्रों में मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए। आईटीसी मिशन सुनहरा कल के साथ मिलकर जिले में नवाचार किया गया। जिसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। अभियान का दूसरा चरण दिसंबर में पूरा होगा। आंगनबाड़ी केंद्र प्ले स्कूल के रूप में विकसित हो रहे हैं। - दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चों के विकास के संबंध में जिले में कार्ययोजना बनाई। योजना में आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल किया। बच्चों के विकास के लिए योजना बनाई गई। इसके लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए। केंद्र सरकार ने तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 में लांच किया गया था।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर मास्टर ट्रेनर्स को नेशनल और प्रदेश करिकुलम को आसान कर ट्रेनिंग दी गई। पहले उन्हें पांच दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद ट्रेनर्स ने केंद्रों में बच्चों के बीच रहकर 20 दिन का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ट्रेनर्स से फीडबैक लिया गया। फीडबैक में जो भी परेशानियां आई, उन्हें दूर किया गया। हर चरण पर बच्चों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है।
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विकास के लिए अलग-अलग गतिविधियां
अभियान के तहत बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास, भावनात्मक विकास के लिए अलग-अलग गतिविधियां हुई। जैसे शारीरिक गतिविधि के लिए बच्चों को पहले रस्सी कूदना, चलते हुए कूदना, वस्तुओं से बचकर चलना आदि सिखाया गया। भावनात्मक विकास के लिए बच्चों को कहानी के माध्यम से उनके अंदर आ रहे भावनाओं को पहचाना सिखाया।
सुखद रहे परिणाम
अभियान में जिले के 20 हजार बच्चों को शामिल किया गया। अक्टूबर से शुरू हुआ प्रशिक्षण मार्च तक चला। अभियान में शामिल बच्चें जो पहले भावनाओं को मात्र चार फीसदी तक ही पहचान पा रहे थे, यह बढ़कर 30 फीसदी तक जा पहुंचा। वस्तुओं के वर्गीकरण श्रेणी में भी बढोत्तरी हुई। यह 13 से बढ़कर 53 फीसदी हो गई। इसी तरह सुनने व समझने की क्षमता भी 15 से बढ़कर 26 फीसदी तक जा पहुंची। बच्चों की गिनती आदि का कौशल भी 3 से बढ़कर 22 फीसदी तक जा पहुंचा।
- वर्जन
अभियान के तहत केंद्रों में मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए। आईटीसी मिशन सुनहरा कल के साथ मिलकर जिले में नवाचार किया गया। जिसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। अभियान का दूसरा चरण दिसंबर में पूरा होगा। आंगनबाड़ी केंद्र प्ले स्कूल के रूप में विकसित हो रहे हैं। - दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।