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सूचना मांगना हर व्यक्ति का अधिकार : उस्मान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Mar 2018 01:03 AM IST
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कालेज का उद्घाटन करते राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि सूचना मांगना हर व्यक्ति का अधिकार है। जनसूचना अधिकारियों को सूचना देने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 500 शब्दों से अधिक की सूचना मांगने के आवेदन पत्रों की सुनवाई कर निरस्त कर दें। सूचना मांगने के आवेदन पत्र के साथ शुल्क रूप में 10 रुपये का नोट भी मान्य होगा। सूचना को 30 दिन के भीतर देना विभागों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग में जिले के प्रकरणों की सुनवाई 5 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।
शनिवार को राज्य सूचना आयुक्त ने विकास भवन सभागार में जनसूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना अधिकार अधिनियम का प्रसार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सूचना मांगना हर व्यक्ति का अधिकार है और निर्धारित समय अवधि में सूचना देना उस कार्यालय का दायित्व ।
उन्होंने कहा कि जनसूचना अधिकारी तृतीय पक्ष की सूचनाओं को मांगने पर प्रथम दृष्टया आवेदन पत्र को निरस्त कर सूचना नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि तृतीय पक्ष से संबंधित सूचनाओं को तृतीय पक्ष की सहमति अथवा असहमति के बाद ही निर्णय लें। ऐसे प्रकरणों को निस्तारण के लिए आयोग ने 45 दिन के भीतर सूचना दिए जाने की व्यवस्था की है।
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उन्होंने कहा कि सूचनाओं को दिए जाने में अधिकारियों को अपना नजरिया बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मंडल स्तर के कुछ कार्यालय सूचना नहीं उपलब्ध कराते हैं। इसको आयोग ने गंभीरता से लिया है।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि कोई भी सूचना मांगी जाए तो उसे 5 दिन के भीतर पंजिका में दर्ज करें तथा दूसरे विभागों की सूचना 6 दिनों के भीतर दर्ज की जाए। जिन अधिकारियों पर दंड लगा है वो सुसंगत कारणों सहित 30 दिनों के भीतर आयोग में अपील कर सकते हैं। इसमें जिलाधिकारी पीके पांडेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, मुख्य विकास अधिकारी संजीव रंजन, अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) एसके दूबे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीएस सोढ़ी, संभागीय वन अधिकारी विजय सिंह सहित सभी विभागों के जनसूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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शनिवार को राज्य सूचना आयुक्त ने विकास भवन सभागार में जनसूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना अधिकार अधिनियम का प्रसार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सूचना मांगना हर व्यक्ति का अधिकार है और निर्धारित समय अवधि में सूचना देना उस कार्यालय का दायित्व ।
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उन्होंने कहा कि जनसूचना अधिकारी तृतीय पक्ष की सूचनाओं को मांगने पर प्रथम दृष्टया आवेदन पत्र को निरस्त कर सूचना नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि तृतीय पक्ष से संबंधित सूचनाओं को तृतीय पक्ष की सहमति अथवा असहमति के बाद ही निर्णय लें। ऐसे प्रकरणों को निस्तारण के लिए आयोग ने 45 दिन के भीतर सूचना दिए जाने की व्यवस्था की है।
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उन्होंने कहा कि सूचनाओं को दिए जाने में अधिकारियों को अपना नजरिया बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मंडल स्तर के कुछ कार्यालय सूचना नहीं उपलब्ध कराते हैं। इसको आयोग ने गंभीरता से लिया है।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि कोई भी सूचना मांगी जाए तो उसे 5 दिन के भीतर पंजिका में दर्ज करें तथा दूसरे विभागों की सूचना 6 दिनों के भीतर दर्ज की जाए। जिन अधिकारियों पर दंड लगा है वो सुसंगत कारणों सहित 30 दिनों के भीतर आयोग में अपील कर सकते हैं। इसमें जिलाधिकारी पीके पांडेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, मुख्य विकास अधिकारी संजीव रंजन, अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) एसके दूबे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीएस सोढ़ी, संभागीय वन अधिकारी विजय सिंह सहित सभी विभागों के जनसूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।