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Saharanpur News: जनपद में औद्योगिक विकास ने पकडी गति
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वुड कार्विंग आइटम
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना काल के बाद इस वर्ष जनपद के औद्योगिक विकास ने गति पकड़ी। इस वर्ष जहां वुड कार्विंग कलस्टर के लिए जमीन की खरीदारी की प्रक्रिया पूरी हुई, वहीं उसके पास बनने वाले कॉमन फेसिलिटी सेंटर का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया। इसके लिए मशीनरी भी 70 प्रतिशत आ गई हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत भी जनपद में अब तक करीब एक हजार करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव भी आए हैं। हालांकि होजरी को ओडीओपी में शामिल करने, वन विभाग का लकड़ी विक्रय डिपो खोलने सहित उद्यमियों की कई मांगें अधूरी रहीं।
कोरोना काल में दो साल तक जनपद में औद्योगिक विकास की गति काफी धीमी रही। इससे न सिर्फ वुड कार्विंग उद्योग प्रभावित हुआ बल्कि होजरी आदि के कारोबार पर भी विपरीत असर पड़ा था। जनपद को विश्व में वुड कार्विंग उत्पादों के लिए जाना जाता है। यहां से प्रतिवर्ष 1000 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात विश्व के कई देशों को होता है। इस उद्योग से करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
इस बार जिले में औद्योगिक विकास ने गति पकड़ी है। एक जनपद एक उत्पाद में चयनित वुड कार्विंग उद्योग का पिलखनी में बनने वाले कलस्टर के लिए इस वर्ष जमीन खरीदी गई है। इस कलस्टर में बुनियादी सुविधाओं के लिए इस वर्ष डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करा दी गई हैं। इसमें सड़कों, नालियों, लाइटों, जल निकासी सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की गई है।
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उद्यमियों की कई मांगें रहीं अधूरी
विभिन्न औद्योगिक संगठनों द्वारा जनपद के औद्योगिक विकास के लिए की जा रही कई मांगें इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। इनमें वुड कॉर्विंग उद्योग के लिए जरूरी वन विभाग के सेल डिपो को जनपद में स्थापित करने, आरा मशीनों के नए लाइसेंस बनाने, सरसावा हवाई पट्टी टर्मिनल शुरू करने आदि मांगें शामिल हैं। इसके अलावा होजरी को ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) में शामिल करने की मांग भी इस वर्ष पूरी नहीं हो सकी।
जनपद में औद्योगिक विकास ने इस वर्ष काफी गति पकड़ी है। पिलखनी में बनने वाले सीएफसी के भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसमें लगने वाली 70 प्रतिशत मशीनरी भी आ गई है। इसके जल्द ही संचालित होने की उम्मीद है। नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक जनपद में करीब एक हजार करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव आ चुके हैं।
- सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग।
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कोरोना काल में दो साल तक जनपद में औद्योगिक विकास की गति काफी धीमी रही। इससे न सिर्फ वुड कार्विंग उद्योग प्रभावित हुआ बल्कि होजरी आदि के कारोबार पर भी विपरीत असर पड़ा था। जनपद को विश्व में वुड कार्विंग उत्पादों के लिए जाना जाता है। यहां से प्रतिवर्ष 1000 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात विश्व के कई देशों को होता है। इस उद्योग से करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
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इस बार जिले में औद्योगिक विकास ने गति पकड़ी है। एक जनपद एक उत्पाद में चयनित वुड कार्विंग उद्योग का पिलखनी में बनने वाले कलस्टर के लिए इस वर्ष जमीन खरीदी गई है। इस कलस्टर में बुनियादी सुविधाओं के लिए इस वर्ष डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करा दी गई हैं। इसमें सड़कों, नालियों, लाइटों, जल निकासी सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की गई है।
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उद्यमियों की कई मांगें रहीं अधूरी
विभिन्न औद्योगिक संगठनों द्वारा जनपद के औद्योगिक विकास के लिए की जा रही कई मांगें इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। इनमें वुड कॉर्विंग उद्योग के लिए जरूरी वन विभाग के सेल डिपो को जनपद में स्थापित करने, आरा मशीनों के नए लाइसेंस बनाने, सरसावा हवाई पट्टी टर्मिनल शुरू करने आदि मांगें शामिल हैं। इसके अलावा होजरी को ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) में शामिल करने की मांग भी इस वर्ष पूरी नहीं हो सकी।
जनपद में औद्योगिक विकास ने इस वर्ष काफी गति पकड़ी है। पिलखनी में बनने वाले सीएफसी के भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसमें लगने वाली 70 प्रतिशत मशीनरी भी आ गई है। इसके जल्द ही संचालित होने की उम्मीद है। नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक जनपद में करीब एक हजार करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव आ चुके हैं।
- सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग।