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हत्या की आशंका में रोका अंतिम संस्कार

Sat, 26 Nov 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 26 Nov 2016 12:38 AM IST
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In fear of assassination prevented funeral
बसंत कुमार के शव को देखते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर के बेहट में सीआरपीएफ जवान बंसत कुमार का शव शुक्रवार की सुबह उसके पैतृक गांव जाटोवाला लाया गया। जहां परिजनों ने बसंत की हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए उसका अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। 
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मौके पर पहुंचे अफसरों ने डीएम से वार्ता करके ऐसा न होने पाने में असमर्थता जताई तो परिजन मौत की उच्च स्तरीय जांच और उसे शहीद का दर्जा देने की मांग पर अड़ गए। जनप्रतिनिधियों और अफसरों के आश्वासन पर परिजनों करीब नौ घंटे बाद शव के अंतिम संस्कार को राजी हुए।
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शाम पांच बजे अधिकारियों एवं सीआरपीएफ के जवानों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि 22 नवंबर की रात श्रीनगर में तैनात गांव जाटोवाला निवासी सीआरपीएफ के जवान बंसत कुमार की ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी।
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कमांडेंट आनंद सिंह ने बंसत कुमार द्वारा खुद को गोली मारकर आत्महत्या करना बताया था। शुक्रवार की सुबह करीब 8 बजे सीआरपीएफ के जवान अपने वाहन से शव लेकर उसके पैतृक गांव जाटोवाला पहुंचे।

परिजनों ने उसके अंतिम संस्कार की पूरी तैयार कर रखी थी, लेकिन शव को देखने के बाद परिजनों एवं ग्रामीणों ने बसंत की हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया।

इसकी सूचना मिलते ही बेहट एवं मिर्जापुर थानों से पुलिस मौके पर पहुंच गई। एसडीएम डॉ. सुरेश कुमार, तहसीलदार योगेंद्र यादव एवं सीओ विष्णुचंद गौतम भी मौके पर पहुंचे।

रिजनों ने अधिकारियों के समक्ष  शव का पोस्टमार्टम दोबारा कराने की मांग की, जिस पर एसडीएम ने फोन  पर डीएम को उनकी मांग से अवगत कराया। 

डीएम के इंकार करने पर परिजन और ग्रामीण बसंत की मौत की उच्च स्तरीय जांच कराकर उसे शहीद का दर्जा दिए जाने एवं राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कराए जाने की मांग करने लगे। 

विधायक महावीर सिंह राणा, एमएलसी महमूद अली एवं उमर अली खान ने भी मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार की बात सुनी। उन्होंने एसडीएम से उनकी मांग के संबंध में केंद्र, राज्य एवं सीआरपीएफ के डीजी को पत्र लिखने के लिए कहा।

इस पर एसडीएम ने परिजनों द्वारा बताए गए बिदुंओं पर लेटर तैयार किया। बंसत के पिता की तरफ से भी उन्हें ज्ञापन दिया गया, जिसकी प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, एससी/एसटी आयोग, मानवाधिकार आयोग को भेजी गई। 


इसके बाद परिजन और ग्रामीण शव का अंतिम संस्कार करने पर राजी हो गए, लेकिन कुछ देर बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की जिद पर अड़ गए। भीम आर्मी संगठन के लोगों ने तिरंगे से उसे ढका।

अधिकारियों के समझाने पर ग्रामीण शव को श्मशान ले गए, जहां सीआरपीएफ के जवानों ने सैल्यूट किया और इसके बाद शव को मुखाग्नि दी गई।  
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