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सीएचसी बंद होने से उपचार को भटक रहे बीमार

Tue, 03 Nov 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Nov 2020 11:39 PM IST
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Illness deviating from treatment due to closure of CHC
छुटमलपुर। फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोविड-19 अस्पताल बनने के बाद पिछले सात माह से बीमार और हादसों में घायलों को उपचार नहीं मिल रहा है। ओपीडी और इमरजेंसी सहित सभी सुविधाएं बंद हैं। बीमारों को उपचार के लिए सहारनपुर और देहरादून की तरफ दौड़ लगानी पड़ रही है। जनता की समस्या को स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से नहीं ले रहा है।
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तीस मार्च को फतेहपुर सीएचसी में कोविड-19 अस्पताल बनाया गया। तब से कोरोना संक्रमितों को अलावा किसी अन्य बीमारी का इलाज नहीं हो रहा है। सीएचसी रिकार्ड के अनुसार यहां बाह्य रोगी विभाग में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज उपचार पाते थे। प्रत्येक माह 150 से 200 प्रसव और छह से दस इमरजेंसी प्रतिदिन आती थी। अब इससे भी अधिक बीमार अस्पताल की सुविधा न मिलने के कारण भटक रहे हैं। सहारनपुर और देहरादून की 70 किमी की दूरी के बीच फतेहपुर सीएचसी पर ही हादसों के घायलों को प्राथमिक उपचार की सुविधा थी। जो अभी तक बंद पड़ी है। सीएचसी में मिलने वाली विभिन्न जांचों के लिए लैब, एक्सरे, डॉट्स सेंटर, नेत्र परीक्षण आदि की सुविधा भी बंद है। इसके लिए रोगियों को दस किमी दूर मुजफ्फराबाद और हरोड़ा जाना पड़ता है।
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ये बोले दुर्घटनाओं में घायल लोग
- संत नगर निवासी रमा शर्मा दो दिन पूर्व कार से टकरा कर घायल हो गई थी। उन्होंने बताया कि सीएचसी बंद होने के कारण उन्हे प्राइवेट अस्पताल में एक्सरे और प्राथमिक उपचार कराना पड़ा। 29 अक्तूबर को दो बाइकों की भिड़ंत में रसूलपुर निवासी प्रदीप सहित तीन युवक छुटमलपुर में घायल हो गए थे। इन्हें उपचार के लिए 25 किमी दूर सहारनपुर ले जाना पड़ा। तीस अक्तूबर को पटाखा फैक्टरी में आग लगने पर घायलों को सीधे सहारनपुर ले जाना पड़ा था। शिव कालोनी के तुषार ने बताया कि उसे दस दिन पूर्व कुत्ते ने काट लिया था। रेबीज इन्जेक्शन लगवाने के लिए उसे सहारनपुर अस्पताल जाना पड़ा। इसके अतिरिक्त शेरपुर के अमित कांबोज, गेल्हेवाला के नाथीराम, निवादा की प्रेमो देवी, गंदेवडा के अब्दुल सगीर, मांडुवाला के सतपाल आदि ने बताया कि उन्हें बुखार, खांसी, जुकाम व अन्य बीमारियां होने पर निजी चिकित्सकों से उपचार कराना पड़ रहा है। जो जेब पर भी भारी पड़ रहा है।
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इनका यह है कहना ----
ऐसा नहीं की स्वास्थ्य विभाग के पास इमारत न हो। सीएचसी कैंपस में ही स्थित विभाग की इमारत में रेशम विभाग का कार्यालय चल रहा है। यदि दूसरे विभाग के कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाए तो इसमें ओपीडी और इमरजेंसी सेवा शुरू हो सकती है। प्रतिदिन बीस से तीस रोगी अब भी ओपीडी के गेट से वापिस लौटाने पड़ते हैं।
डॉ. नवदीप गुप्ता, सीएचसी इंचार्ज।
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