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बढ़े सुविधाएं तो कारगर साबित हो सकता है राजकीय
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सहारनपुर। पुल जोगियान स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में बना राजकीय जिला पुस्तकालय पढ़ने वालों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की 15 हजार से अधिक किताबें उपलब्ध हैं, इनमें साहित्यिक सामग्री भी शामिल है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण युवा इसका उतना फायदा नहीं उठा पा रहे हैं, जितना उठा सकते हैं।
राजकीय जिला पुस्तकालय की स्थापना 1991 में हुई । वर्तमान में पुस्तकालय के पास एक ही परिसर में दो भवन बने हैं। वर्तमान में यहां 15 से 20 विद्यार्थी प्रतिदिन पढ़ने आते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। भवनों में पाठकों के बैठने के लिए कुर्सी और मेज उपलब्ध हैं, मगर कई जन सुविधाओं का अभाव है। जनरेटर न होने से बिजली गुल होने पर गर्मी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। पुस्तकालय के बड़े भवन में ताला लटका है। यदि उसमें भी बैठने की व्यवस्था और देखरेख हो तो पाठकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। खास बात यह है कि पुस्तकालय भीड़ भाड़ और बाजार से अलग है, वहां वाहनों का शोर और अन्य तरह का व्यवधान ना के बराबर है। यानी एकदम शांत माहौल।
सुधार के लिए यह भी जरूरी
पुस्तकालय में सुधार के लिए सबसे पहले उसकी रंगाई-पुताई, नई किताबें, प्रतियोगी परीक्षा की किताबें, प्रतिदिन के हिंदी और अंग्रेजी के समाचारपत्र, फर्नीचर आदि रखा जाए तो पुस्तकालय और बेहतर बन सकता है।
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युवाओं की बात
गांव घोघरेकी से आने वाले मोनू कुमार ने बीएससी और बीएड की पढ़ाई की है। फिलहाल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए पुस्तकालय में आते हैं। उन्होंने बताया कि गांव में पढ़ाई का माहौल नहीं है। ऐसे में वह पुस्तकालय में आते हैं।
शहर से 15 किमी दूर स्थित गांव बांदू खेड़ी से अवनीश कुमार पुस्तकालय में पढ़ने आते हैं। उन्होंने बताया पुस्तकालय में प्रतिदिन 15 से अधिक विद्यार्थी आते हैं, जिनके साथ अच्छा माहौल बनता है। पढ़ाई के साथ ही ग्रुप डिस्कशन भी होता है, जिसका काफी लाभ होता है।
वर्जन
पुस्तकालय के लिए अलग से बजट नहीं है, मगर यह हमारी प्राथमिकता में है। हम पैसा जुटा रहे हैं। जल्द ही पुस्तकालय में नया फर्नीचर मंगाया जाएगा। अन्य जो भी जरूरतें हैं उनको भी पूरा करने का प्रयास है। - रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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राजकीय जिला पुस्तकालय की स्थापना 1991 में हुई । वर्तमान में पुस्तकालय के पास एक ही परिसर में दो भवन बने हैं। वर्तमान में यहां 15 से 20 विद्यार्थी प्रतिदिन पढ़ने आते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। भवनों में पाठकों के बैठने के लिए कुर्सी और मेज उपलब्ध हैं, मगर कई जन सुविधाओं का अभाव है। जनरेटर न होने से बिजली गुल होने पर गर्मी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। पुस्तकालय के बड़े भवन में ताला लटका है। यदि उसमें भी बैठने की व्यवस्था और देखरेख हो तो पाठकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। खास बात यह है कि पुस्तकालय भीड़ भाड़ और बाजार से अलग है, वहां वाहनों का शोर और अन्य तरह का व्यवधान ना के बराबर है। यानी एकदम शांत माहौल।
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सुधार के लिए यह भी जरूरी
पुस्तकालय में सुधार के लिए सबसे पहले उसकी रंगाई-पुताई, नई किताबें, प्रतियोगी परीक्षा की किताबें, प्रतिदिन के हिंदी और अंग्रेजी के समाचारपत्र, फर्नीचर आदि रखा जाए तो पुस्तकालय और बेहतर बन सकता है।
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युवाओं की बात
गांव घोघरेकी से आने वाले मोनू कुमार ने बीएससी और बीएड की पढ़ाई की है। फिलहाल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए पुस्तकालय में आते हैं। उन्होंने बताया कि गांव में पढ़ाई का माहौल नहीं है। ऐसे में वह पुस्तकालय में आते हैं।
शहर से 15 किमी दूर स्थित गांव बांदू खेड़ी से अवनीश कुमार पुस्तकालय में पढ़ने आते हैं। उन्होंने बताया पुस्तकालय में प्रतिदिन 15 से अधिक विद्यार्थी आते हैं, जिनके साथ अच्छा माहौल बनता है। पढ़ाई के साथ ही ग्रुप डिस्कशन भी होता है, जिसका काफी लाभ होता है।
वर्जन
पुस्तकालय के लिए अलग से बजट नहीं है, मगर यह हमारी प्राथमिकता में है। हम पैसा जुटा रहे हैं। जल्द ही पुस्तकालय में नया फर्नीचर मंगाया जाएगा। अन्य जो भी जरूरतें हैं उनको भी पूरा करने का प्रयास है। - रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।