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Saharanpur News: कलस्टर बने तो सुधरे होजरी कारोबार की सूरत
Sat, 18 Nov 2023 12:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 18 Nov 2023 12:23 AM IST
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सहारनपुर। काष्ठ हस्तशिल्प के बाद जनपद के लोगों को सबसे अधिक रोजगार देने वाले होजरी उद्योग की सूरत को सुधारने के लिए एक सीएफसी और कलस्टर की दरकार है। उद्यमी लंबे समय से होजरी उद्योग को ओडीओपी में शामिल करने, सीएफसी(कॉमन फेसिलिटी सेंटर) और कलस्टर स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। जनपद में होजरी की छोटी बड़ी करीब 700 इकाइयां स्थापित हैं, जिनका वार्षिक कारोबार लगभग एक हजार करोड़ रुपये का है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 70 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है।
आजादी से पहले हाथ की मशीन से जुराबें बनाने का काम शुरू हो गया था। जनपद के होजरी उद्योग की अधिकांश इकाइयां पुराने शहर में हैं। जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके चलते होजरी कारोबारी लंबे समय से काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग की तर्ज पर होजरी उद्योग के लिए कलस्टर बनाने की मांग कर रहे हैं। जिससे होजरी की बिखरी हुई इकाइयां एक ही परिसर में आ जाएं। इसके अलावा इस कलस्टर में एक सीएफसी भी स्थापित होनी चाहिए। इससे उद्यमियों को एक ही स्थान पर आधुनिक और महंगी मशीनों के साथ ही डिजाइनिंग सेंटर सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इससे होजरी उद्योग को काफी लाभ होगा। उद्यमियों का कहना है कि होजरी उद्योग पूरी तरह से असंगठित है। सरकार को इसके विकास के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। यहां का होजरी उद्योग प्रदेश मेें कानपुर के बाद दूसरे नंबर पर है।
यह बनते हैं होजरी उत्पाद
जनपद में होजरी के विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। इनमें बनियान, जींस, इनरवियर, समीज, लोवर, टी शर्ट, कैपरी, बच्चों के सूट, जुराबें, सर्दी के इनरवियर आदि शामिल हैं। यहां से पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली और बिहार सहित उत्तर भारत के अन्य राज्यों में होजरी उत्पादों की सप्लाई होती है।
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यहां स्थापित हैं होजरी की इकाइयां
महानगर के पुराने हिस्से में ही अधिकांश होजरी इकाइयां स्थापित हैं। इनमें हिरनमारान, मिश्रान, आली, महाजनान, कहारान, पुरानी चुंगी, हुसैन बस्ती, छीपीयांन और जनता रोड आदि स्थान शामिल हैं।
सहारनपुर में होजरी उद्योग भी लगभग वुड कार्विंग उद्योग के साथ ही शुरू हुआ था, लेकिन असंगठित होने के कारण सरकार की नजरों में अपनी पहचान नहीं बना पाया है। इस उद्योग को जल्द ही ओडीओपी में शामिल कर यहां सीएफसी और कलस्टर बनाया जाए।
- मनजीत सिंह अरोड़ा, अध्यक्ष, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
कारोबार तरक्की करेगा तो बढ़ेगा राजस्व
कलक्टर बनने से होजरी उद्योग तेजी से तरक्की करेगा। इससे प्रदेश सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। होजरी उद्योग को दूसरे चरण की ओडीओपी में शामिल किया जाए।
- घनश्याम माहेश्वरी, महासचिव, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
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आजादी से पहले हाथ की मशीन से जुराबें बनाने का काम शुरू हो गया था। जनपद के होजरी उद्योग की अधिकांश इकाइयां पुराने शहर में हैं। जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके चलते होजरी कारोबारी लंबे समय से काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग की तर्ज पर होजरी उद्योग के लिए कलस्टर बनाने की मांग कर रहे हैं। जिससे होजरी की बिखरी हुई इकाइयां एक ही परिसर में आ जाएं। इसके अलावा इस कलस्टर में एक सीएफसी भी स्थापित होनी चाहिए। इससे उद्यमियों को एक ही स्थान पर आधुनिक और महंगी मशीनों के साथ ही डिजाइनिंग सेंटर सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इससे होजरी उद्योग को काफी लाभ होगा। उद्यमियों का कहना है कि होजरी उद्योग पूरी तरह से असंगठित है। सरकार को इसके विकास के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। यहां का होजरी उद्योग प्रदेश मेें कानपुर के बाद दूसरे नंबर पर है।
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यह बनते हैं होजरी उत्पाद
जनपद में होजरी के विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। इनमें बनियान, जींस, इनरवियर, समीज, लोवर, टी शर्ट, कैपरी, बच्चों के सूट, जुराबें, सर्दी के इनरवियर आदि शामिल हैं। यहां से पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली और बिहार सहित उत्तर भारत के अन्य राज्यों में होजरी उत्पादों की सप्लाई होती है।
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यहां स्थापित हैं होजरी की इकाइयां
महानगर के पुराने हिस्से में ही अधिकांश होजरी इकाइयां स्थापित हैं। इनमें हिरनमारान, मिश्रान, आली, महाजनान, कहारान, पुरानी चुंगी, हुसैन बस्ती, छीपीयांन और जनता रोड आदि स्थान शामिल हैं।
सहारनपुर में होजरी उद्योग भी लगभग वुड कार्विंग उद्योग के साथ ही शुरू हुआ था, लेकिन असंगठित होने के कारण सरकार की नजरों में अपनी पहचान नहीं बना पाया है। इस उद्योग को जल्द ही ओडीओपी में शामिल कर यहां सीएफसी और कलस्टर बनाया जाए।
- मनजीत सिंह अरोड़ा, अध्यक्ष, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
कारोबार तरक्की करेगा तो बढ़ेगा राजस्व
कलक्टर बनने से होजरी उद्योग तेजी से तरक्की करेगा। इससे प्रदेश सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। होजरी उद्योग को दूसरे चरण की ओडीओपी में शामिल किया जाए।
- घनश्याम माहेश्वरी, महासचिव, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन