UP: प्राचीन सिद्धपीठ में बने कुएं से निकलीं 150 साल पुरानी मूर्तियां, हैरत में हर कोई, 35 साल से बंद था मंदिर
Saharanpur News : सिद्धपीठ बागशिवाला श्री गोटेश्वर महादेव मंदिर में कुएं की खुदाई के दौरान 150 साल पुरानी मूर्तियां निकलीं। मूर्तियों को देखकर हर कोई सकते में आ गया। बताया गया कि यह मंदिर 35 साल से बंद था।
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सहारनपुर में मंडी समिति रोड स्थित सिद्धपीठ बागशिवाला श्री गोटेश्वर महादेव मंदिर में कुएं की खुदाई के दौरान शिवलिंग, मां पार्वती, श्री गणेश, श्री कार्तिकेय, श्री हनुमान भगवान की मूर्ति और शंख निकला है। इनमें शिवलिंग और शंख को छोड़कर सभी मूर्तियां खंडित हैं। मूर्ति 150 वर्ष पुरानी प्रतीत हो रही हैं।
सिद्धपीठ बागशिवाला श्री गोटेश्वर महादेव मंदिर 35 वर्ष से बंद पड़ा था। हिंदू संगठनों की मांग पर 11 दिसंबर 2020 को प्रशासन ने मंदिर खुलवाया था। हिंदू संगठनों ने मंदिर की साफ-सफाई कराने के साथ नई मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। इसके साथ ही तभी से मंदिर के सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। इसके साथ ही रोजाना पूजा-अर्चना हो रही है।
रविवार को समिति के पदाधिकारी ने मंदिर परिसर में बने प्राचीन कुएं की खुदाई कराई। इस दौरान कुएं से देवी-देवताओं की मूर्ति निकली हैं। समिति के अध्यक्ष अनिल त्यागी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित धींगड़ा ने बताया कि पूर्व सरकारों ने मंदिर बंद करा रखा था। इसके साथ ही मिट्टी डालकर मंदिर मूर्तियां होने के सबूत मिटा रखे थे। अब प्रशासन ने मंदिर खुलवाया, जो मूर्तियां निकली हैं, वे 150 साल पुरानी हैं और संगमरमर की हैं। इससे साफ है कि मंदिर प्राचीन है। इसकी जानकारी प्रशासन को भी दी गई है।
मराठा कालीन कार्यकाल का हो सकता है मंदिर
अध्यक्ष अनिल त्यागी का कहना है कि मंदिर मराठा कालीन हो सकता है। ऐसे कुछ प्रमाण मिले हैं। इसको लेकर भी केंद्र और प्रदेश सरकार से मांगकर इतिहासकारों से सर्वे कराया जाएगा।
पुरातत्व विभाग से कराएंगे सर्वे
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पुरातत्व विभाग से मूर्तियों का सर्वे कराया जाएगा। इससे साफ हो जाएगा कि मंदिर और मूर्तियां कितनी पुरानी हैं। मंदिर सिद्धपीठ और यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
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मूर्तियां 150 वर्ष पुरानी प्रतीत हो रहीं हैं। पुरातत्व विभाग के सर्वे में स्थिति स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन देखने पर पता चलता है कि मंदिर अति प्राचीन है। - राजीव उपाध्याय यायावर, इतिहासकार
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