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ऐसे कैसे होगा गांवों का विकास?
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 06 May 2016 01:15 AM IST
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सहारनपुर जिले में विकास कार्यों की गति पहले से ही काफी धीमी है, उस पर अधिकारियों की उदासीनता एवं ग्राम प्रधानों की लापरवाही ने गांवों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। अभी तक अधिकांश ग्राम प्रधानों और सचिव, ग्राम प्रधान एवं एएनएम के संयुक्त खाते तक नहीं खुल पाए हैं।
ग्राम प्रधानों को शपथ लिए कई माह बीत चुके हैं। गांवों के मुखिया बनने के बाद रौब तो पूरा है, लेकिन गांवों के विकास के प्रति अभी तक गंभीरता नजर नहीं आ रही। अभी तक सभी ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों के खाते ही नहीं खुल सके हैं।
गांवों में बीमारियां बढ़ रहीं हैं, लेकिन गांवों में स्वास्थ्य संबंधी कोई कार्रवाई नहीं चल रही है। इसका कारण ग्राम प्रधान एवं एएनएम का अभी तक संयुक्त खाता न खोला जाना है। पूरे जिले में अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानों का संयुक्त खाता नहीं खुलवाया है।
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बुधवार को राजस्व विभाग के सचिव दिनेश सिंह ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। गांवों में न तो सफाई अभियान चल पा रहा है और न ही गांवों में दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
जबकि एएनएम के संयुक्त खाते खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बजट आता और उससे गांवों में कैंप और दवा छिड़काव का कार्य कराया जाता। अब न तो ग्राम प्रधान ही गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही स्वास्थ्य एवं ग्राम पंचायत विभाग के अधिकारी।
जब तक खाते नहीं खुलेंगे, तब तक बजट नहीं आएगा और बिना बजट के विकास कार्य संभव नहीं हैं। मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा का कहना है कि कुछ गांवों की ऐसी शिकायतें हैं जहां अभी खाते नहीं खुल सके हैं।
इसके लिए उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी से सूचना मांगी है। एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते भी कुछ स्थानों पर नहीं खुले हैं। स्वास्थ्य विभाग को ही इन्हें खुलवाना था। जिससे गांवों में स्वास्थ्य संबंधी कार्य कराए जा सकें।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी इस बारे में सूचना मांगी है। जिन गांवों में अभी तक खाते नहीं खुलें हैं, उनमें शीघ्र ही खाते खुलवा दिए जाएंगे, जिससे गांवों में विकास कार्य हो सके।
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ग्राम प्रधानों को शपथ लिए कई माह बीत चुके हैं। गांवों के मुखिया बनने के बाद रौब तो पूरा है, लेकिन गांवों के विकास के प्रति अभी तक गंभीरता नजर नहीं आ रही। अभी तक सभी ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों के खाते ही नहीं खुल सके हैं।
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गांवों में बीमारियां बढ़ रहीं हैं, लेकिन गांवों में स्वास्थ्य संबंधी कोई कार्रवाई नहीं चल रही है। इसका कारण ग्राम प्रधान एवं एएनएम का अभी तक संयुक्त खाता न खोला जाना है। पूरे जिले में अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानों का संयुक्त खाता नहीं खुलवाया है।
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बुधवार को राजस्व विभाग के सचिव दिनेश सिंह ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। गांवों में न तो सफाई अभियान चल पा रहा है और न ही गांवों में दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
जबकि एएनएम के संयुक्त खाते खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बजट आता और उससे गांवों में कैंप और दवा छिड़काव का कार्य कराया जाता। अब न तो ग्राम प्रधान ही गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही स्वास्थ्य एवं ग्राम पंचायत विभाग के अधिकारी।
जब तक खाते नहीं खुलेंगे, तब तक बजट नहीं आएगा और बिना बजट के विकास कार्य संभव नहीं हैं। मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा का कहना है कि कुछ गांवों की ऐसी शिकायतें हैं जहां अभी खाते नहीं खुल सके हैं।
इसके लिए उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी से सूचना मांगी है। एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते भी कुछ स्थानों पर नहीं खुले हैं। स्वास्थ्य विभाग को ही इन्हें खुलवाना था। जिससे गांवों में स्वास्थ्य संबंधी कार्य कराए जा सकें।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी इस बारे में सूचना मांगी है। जिन गांवों में अभी तक खाते नहीं खुलें हैं, उनमें शीघ्र ही खाते खुलवा दिए जाएंगे, जिससे गांवों में विकास कार्य हो सके।