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दो महीने में कैसे लगेंगी 10 लाख वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट
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सहारनपुर। दुपहिया से लेकर चार पहिया वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की अनिवार्यता तो कर दी है, लेकिन प्रक्रिया बेहद धीमी है। दिसंबर माह के अंत तक जिले में पंजीकृत करीब 10 लाख वाहनों में यह प्लेट लगाई जानी है। बावजूद अभी तक न तो वाहन स्वामी ही इसके लिए आगे आ रहे हैं और न वाहन एजेंसी मालिक इसको लेकर गंभीर हैं। इनके पास नंबर प्लेट का पर्याप्त स्टॉक तक नहीं है। उनका कहना है कि आवेदन के हिसाब से ही प्लेट उपलब्ध कराई जाएंगी।
संभागीय परिवहन विभाग ने 19 अक्तूबर से ऐसे वाहनों के जरूरी दस्तावेज बनवाने बंद कर दिए हैं, जिन्होंने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं लगवाई है। दुपहिया से लेकर चार पहिया वाहन इस प्लेट के बिना दौड़ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहनों के लिए भी किसी परिवहन व्यवसायी की ओर से प्लेट लगवाने के प्रयास नहीं किए गए हैं।
प्रक्रिया आसान हो, डीलरों के यहां न भटकना पड़े
- उत्तर प्रदेश मोटर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रित चावला कहते हैं कि इस प्लेट को लगवाने की प्रक्रिया आसान की जाए। वाहन स्वामियों को डीलरों के यहां न भटकना पड़े। संभागीय परिवहन विभाग में ही आटोमोबाइल कंपनी के प्रतिनिधियों को एक साथ उपलब्ध कराया जाए। जो वाहन स्वामी जहां हो, उसे वहीं प्लेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई जाए।
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जिले में पंजीकृत प्रमुख वाहनों की स्थिति
- नॉन ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 600,000
- ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 38,000
- हैवी ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 7000
- जिले में संचालित ई-रिक्शा - 3000
- जिले में संचालित टेंपो - 4500
एआरटीओ (प्रवर्तन) आरपी मिश्रा का कहना है कि इस प्रक्रिया के बारे में कोई भी निर्णय शासन स्तर पर होना है। वहीं से इस बारे में कोई रियायत मिल सकती है।
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संभागीय परिवहन विभाग ने 19 अक्तूबर से ऐसे वाहनों के जरूरी दस्तावेज बनवाने बंद कर दिए हैं, जिन्होंने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं लगवाई है। दुपहिया से लेकर चार पहिया वाहन इस प्लेट के बिना दौड़ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहनों के लिए भी किसी परिवहन व्यवसायी की ओर से प्लेट लगवाने के प्रयास नहीं किए गए हैं।
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प्रक्रिया आसान हो, डीलरों के यहां न भटकना पड़े
- उत्तर प्रदेश मोटर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रित चावला कहते हैं कि इस प्लेट को लगवाने की प्रक्रिया आसान की जाए। वाहन स्वामियों को डीलरों के यहां न भटकना पड़े। संभागीय परिवहन विभाग में ही आटोमोबाइल कंपनी के प्रतिनिधियों को एक साथ उपलब्ध कराया जाए। जो वाहन स्वामी जहां हो, उसे वहीं प्लेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई जाए।
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जिले में पंजीकृत प्रमुख वाहनों की स्थिति
- नॉन ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 600,000
- ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 38,000
- हैवी ट्रांसपोर्ट श्रेणी के वाहन - 7000
- जिले में संचालित ई-रिक्शा - 3000
- जिले में संचालित टेंपो - 4500
एआरटीओ (प्रवर्तन) आरपी मिश्रा का कहना है कि इस प्रक्रिया के बारे में कोई भी निर्णय शासन स्तर पर होना है। वहीं से इस बारे में कोई रियायत मिल सकती है।