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अस्पताल ने खड़े किए हाथ, तीमारदार कर रहे ऑक्सीजन की व्यवस्था
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सहारनपुर। कोविड के लिए नामित नगर के निजी अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं, यदि बेड मिल भी रहे हैं तो वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की किल्लत इलाज में आड़े आ रही है। अस्पताल इस शर्त पर मरीज को भर्ती कर रहे हैं कि ऑक्सीजन की व्यवस्था तीमारदारों को खुद करनी होगी। ऐसा ही एक मामला बृहस्पतिवार की रात सामने आया।
दिल्ली रोड निवासी संतोष को दो दिन पहले बुखार आया। अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन डॉक्टर के पास ले गए, जहां ऑक्सीजन का स्तर 57 आया। डॉक्टर ने तुरंत कोविड अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजनों ने नगर के कोविड अस्पतालों में पता किया तो बेड नहीं मिला।
इसके बाद परिजन संतोष को लेकर यमुनानगर गए। वहां दर्जन भर अस्पतालों में भटकने के बाद बेड नहीं मिला तो परिजन संतोष को फिर वापस ले आए। दिल्ली रोड स्थित एक कोविड अस्पताल में ले गए, जहां ऑक्सीजन नहीं थी। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन की व्यवस्था खुद करने की शर्त पर बेड दे दिया। इसके बाद जन सहयोग से एक छोटा सिलिंडर मिला, मगर वह भी कुछ ही देर में खाली हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से सिलिंडर की गुहार लगाई, मगर नहीं मिला।
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इसके बाद परिजनों ने किसी तरह गांव कुम्हारहेड़ा से सिलिंडर की व्यवस्था की, जिसके बाद ऑक्सीजन को चालू रखा जा सका। रात दो बजे फिर से सिलिंडर खाली हो गया। अस्पताल ने फिर से ऑक्सीजन नहीं होने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए। परिजनों ने सिलिंडर के लिए एसीएमओ डॉ. वीएस पुंडीर से भी गुहार लगाई, मगर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। परिजन रात में फिर किसी तरह कुम्हारहेड़ा से सिलिंडर का इंतजाम करके लाए। संतोष की ही तरह अन्य मरीजों और तीमारदारों को भी ऐसे ही समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। मुझे नहीं लगता कि किसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है। अस्पतालों के लिए स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि ऑक्सीजन है तो मरीज केेे तुरंत उपलब्ध कराएं। यदि ऑक्सीजन होने के बावजूद कोई अस्पताल मरीज को ऑक्सीजन देने में मना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. बीएस सोढी, सीएमओ।
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दिल्ली रोड निवासी संतोष को दो दिन पहले बुखार आया। अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन डॉक्टर के पास ले गए, जहां ऑक्सीजन का स्तर 57 आया। डॉक्टर ने तुरंत कोविड अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजनों ने नगर के कोविड अस्पतालों में पता किया तो बेड नहीं मिला।
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इसके बाद परिजन संतोष को लेकर यमुनानगर गए। वहां दर्जन भर अस्पतालों में भटकने के बाद बेड नहीं मिला तो परिजन संतोष को फिर वापस ले आए। दिल्ली रोड स्थित एक कोविड अस्पताल में ले गए, जहां ऑक्सीजन नहीं थी। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन की व्यवस्था खुद करने की शर्त पर बेड दे दिया। इसके बाद जन सहयोग से एक छोटा सिलिंडर मिला, मगर वह भी कुछ ही देर में खाली हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से सिलिंडर की गुहार लगाई, मगर नहीं मिला।
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इसके बाद परिजनों ने किसी तरह गांव कुम्हारहेड़ा से सिलिंडर की व्यवस्था की, जिसके बाद ऑक्सीजन को चालू रखा जा सका। रात दो बजे फिर से सिलिंडर खाली हो गया। अस्पताल ने फिर से ऑक्सीजन नहीं होने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए। परिजनों ने सिलिंडर के लिए एसीएमओ डॉ. वीएस पुंडीर से भी गुहार लगाई, मगर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। परिजन रात में फिर किसी तरह कुम्हारहेड़ा से सिलिंडर का इंतजाम करके लाए। संतोष की ही तरह अन्य मरीजों और तीमारदारों को भी ऐसे ही समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। मुझे नहीं लगता कि किसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है। अस्पतालों के लिए स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि ऑक्सीजन है तो मरीज केेे तुरंत उपलब्ध कराएं। यदि ऑक्सीजन होने के बावजूद कोई अस्पताल मरीज को ऑक्सीजन देने में मना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. बीएस सोढी, सीएमओ।