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Saharanpur News: बदहाल हुईं हिंडन वाटिकाएं, झूले टूटे, हरियाली भी सूखी
Wed, 11 Mar 2026 01:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 11 Mar 2026 01:02 AM IST
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गागलहेड़ी। पर्यावरण को साफ सुथरा रखने और सुबह शाम सैर व बच्चों के खेलकूद के लिए हिंडन नदी के किनारे लाखों रुपये की लागत बनाई दोनों हिंडन वाटिकाएं देखरेख के अभाव में बदहाल हो गई है। हिंडन वाटिका में लगे लाखों रुपये कीमत के झूले और अन्य सामान चोरी होने के साथ ही यहां लगाए गए पेड़ पौधे भी सूख गए हैं।
15 अगस्त 2018 को सहारनपुर के तत्कालीन मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने हिंडन नदी के दोनों किनारों उग्राहू और रसूलपुर पापड़ेकी ग्राम पंचायतों के रकबे में हिंडन वाटिकाओं का निर्माण करवाया था। उन्होंने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर इनका लोकार्पण किया था।
इस वाटिका के निर्माण कराने का उद्देश्य बुजुर्ग के लिए सैर और बच्चों के लिए खेलकूद का सुरम्य स्थान उपलब्ध कराना था। दोनों वाटिकाओं में बैठने के लिए सीमेंट के बेंच, लोहे के झूले, पानी का नल, बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत सारे खेलकूद के लोहे के आइटम लगाए गए थे।
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वाटिका के रख रखाव के लिए संबंधित ग्राम पंचायत और वन विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन समय के साथ साथ दोनों ही विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाना भूल गए। वर्तमान में इन वाटिकाओं में सब कुछ खत्म हो चुका है। मंडलायुक्त द्वारा लगाया गया पौधा कभी का सूख चुका है। अब यहां केवल उसका चबुतरा शेष है। वाटिका का कुछ सामान तो चोरी हो गया है और बाकी का चोरों से बचाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने यहां से उठवाकर कैलाशपुर रेंज कार्यालय में लाकर रख दिया है।
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15 अगस्त 2018 को सहारनपुर के तत्कालीन मंडलायुक्त चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने हिंडन नदी के दोनों किनारों उग्राहू और रसूलपुर पापड़ेकी ग्राम पंचायतों के रकबे में हिंडन वाटिकाओं का निर्माण करवाया था। उन्होंने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर इनका लोकार्पण किया था।
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इस वाटिका के निर्माण कराने का उद्देश्य बुजुर्ग के लिए सैर और बच्चों के लिए खेलकूद का सुरम्य स्थान उपलब्ध कराना था। दोनों वाटिकाओं में बैठने के लिए सीमेंट के बेंच, लोहे के झूले, पानी का नल, बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत सारे खेलकूद के लोहे के आइटम लगाए गए थे।
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वाटिका के रख रखाव के लिए संबंधित ग्राम पंचायत और वन विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन समय के साथ साथ दोनों ही विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाना भूल गए। वर्तमान में इन वाटिकाओं में सब कुछ खत्म हो चुका है। मंडलायुक्त द्वारा लगाया गया पौधा कभी का सूख चुका है। अब यहां केवल उसका चबुतरा शेष है। वाटिका का कुछ सामान तो चोरी हो गया है और बाकी का चोरों से बचाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने यहां से उठवाकर कैलाशपुर रेंज कार्यालय में लाकर रख दिया है।