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हिंदी प्रेम ने दिलाई गीतकार राजन को ख्याति

Tue, 01 Sep 2020 10:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 10:54 PM IST
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Hindi love brought fame to lyricist Rajan
सहारनपुर। चार दशक से भी ज्यादा समय से हिंदी कहानी, कविता और गीतों का रस मंचों से बरसाते रहे हैं राजेंद्र राजन। मातृभाषा के प्रति उनका प्रेम उनके गीतों में झलकता है। चुन चुनकर शब्दों से गीत बनाने वाले प्रख्यात गीतकार राजेंद्र राजन हिंदी की मौजूदा स्थिति देख आहत होते हैं। उनका मानना है कि आज जरूरत नई पीढ़ी को प्रारंभिक शिक्षा से ही हिंदी के प्रति गंभीर बनाने की है।
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गीतकार राजेंद्र राजन का जन्म शामली जिले के एलम कस्बे में 9 अगस्त 1952 को हुआ था। फिलहाल वह सहारनपुर में न्यू आवास विकास कालोनी में रहते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन के हिंदी हैं हम अभियान के तहत उनसे बातचीत की गई। पेश है बातचीत का अंश...
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हिंदी हैं हम अभियान वक्त की जरूरत
अखबार की भाषा जनमानस के करीब होती है। अखबार ही सबसे उपयुक्त साधन है हिंदी पढ़ने का। अमर उजाला का यह अभियान बेहद सराहनीय है, यह वक्त की जरूरत है। प्रयास शुरू हुआ है तो बदलाव भी जरूर होगा।
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हरिद्वार में गंगा घाट पर बैठकर लिखीं पहले गीत की पंक्तियां
गीतकार राजेंद्र राजन ने बताया कि उन्होंने 1965 से लेखन कार्य शुरू किया, तब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रहे थे। उस दौर में अधिकांश कहानियां और फिर कविताएं लिखीं। 24 जून 1969 को देर रात करीब 12 बजे हरिद्वार में गंगा घाट पर बैठकर पहले गीत की पंक्तियां लिखी थीं, जो इस प्रकार थीं। चांद छलता रहा मन मचलता रहा, मेरे आंगन विरह की निशा थम गई, कुछ चुभाती रही मन दुखाती रही, पीर मन में न जाने कहां रम गई।
प्रमुख रचनाएं
1983 में पतझर-पतझर, सावन सावन काव्य संकलन का प्रकाशन हुआ। फिर 2003 में गीत संग्रह केवल दो गीत लिखे मैंने और 2015 में खुशबू प्यार करती है प्रकाशित हुआ।

अनेक पुरस्कार मिले
गीतकार राजेंद्र राजन को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ द्वारा साहित्य भूषण पुरस्कार 2015 में दिया गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के खंडवा में तुलसी माखन सम्मान, हिंदी उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी उत्तर प्रदेश द्वारा साहित्य श्री पुरस्कार मिला। इनके अलावा कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर स्मृति पुरस्कार, महादेवी वर्मा पुरस्कार, विद्यापति पुरस्कार, विशम्भर सहाय प्रेमी पुरस्कार, सृजन सम्मान, कविवर बुद्धि प्रकाश पारीख पुरस्कार, महाकवि नीरज सम्मान आदि पुरस्कार मिल चुके हैं।
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