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हृदय और सांस के मरीजों पर सर्दी का सितम
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- सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी
-- सुबह चार से दस बजे तक का समय खतरे वाला
-- नियमित दवा और सावधानी से ही होगा बचाव
सहारनपुर। सर्दी बढ़ने के साथ ही सरकारी अस्पताल और निजी चिकित्सकों के यहां हृदय, रक्तचाप और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ऐसे मरीजों के लिए सुबह चार से दस बजे का समय अत्यधिक खतरे वाला है। ऐसे में नियमित दवाई का सेवन और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
रविवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ज्यादातर मरीज सांस, बीपी और दिल के रोगी इलाज कराने पहुंचे। सीएमओ बीएस सोढ़ी, फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी और डॉ. पीडी गर्ग का कहना है कि बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से बढ़ी ठंड एवं कोहरे में हार्ट, सांस, बीपी, ब्रेन हैमरेज के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में इन मरीजों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। रोजाना दवाई लेने के साथ ही कुछ नियमों का भी पालन करना होगा। ताकि सर्दी का सितम जीवन पर भारी न पड़े।
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कोहरे में सिकुड़ जाती है सांस की नली
सहारनपुर। डॉ. संजीव मिगलानी के मुताबिक कोहरे की वजह से सांस की नली में सिकुड़न आ जाती है, जिससे सांस लेने में काफी परेशानी होती है। ऐसे मरीजों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जैसे सांस लेते समय गले में लगातार आवाज आती है। खांसी, घर में काम करते और सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलता है। हाथ-पैर, अंगुलियों और जीभ नीली हो जाती है और हाथ-पैर पर सूजन आ जाती है। छाती में सीटी की आवाज आती है। बचाव के लिए सुबह और शाम के समय सांस के मरीजों को सर्दी से बचना चाहिए। आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर मास्क लगाकर निकलें। इनहेलर और सांस के कैप्सूल का नियमित सेवन करें और दिन में तीन से चार बार भाप लें।
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हार्ट के मरीज ऐसे करें बचाव
सहारनपुर। डॉ. मिगलानी के मुताबिक भीषण सर्दी में केटीकोलामीन का रिसाव बढ़ जाता है, जिससे बीपी बढ़ता और ब्रेन हैमरेज व हार्ट अटैक आने की संभावना रहती है। इन मरीजों को नियमित बीपी की दवा लेनी चाहिए। सामान्य लोगों बीपी 120 और 80 रहता और उच्च रक्त चाप से पीड़ित व्यक्ति 140 और 90 से ऊपर होता है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान, अधिक नमक, शराब का सेवन न करें। इसके अलावा डिप्रेशन, डायबिटीज के मरीजों, मोटे लोगों और व्यायाम न करने वाले लोगों को भी हार्ट अटैक व ब्रेन हैमरेज का खतरा ज्यादा रहता है।
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उच्च रक्तचाप के लक्षण
सहारनपुर। 50 प्रतिशत मरीजों में लक्षण नहीं पाए आते हैं, लेकिन रूटीन चेकअप कराने पर उनका बीपी बढ़ा मिलता है। सिर में दर्द होना, चक्कर आाना, दिल का घबराना और उल्टी आना उच्च रक्तचाप के लक्षण हैं। उच्च रक्तचाप की वजह से दिल, दिमाग, गुर्दों, आंखों, टांगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
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हार्ट अटैक के लक्षण
-- छाती में दर्द बायीं ओर की तरफ से दायी ओर जाना।
-- छाती से गले की तरफ दर्द होना।
--पसीना और उल्टी आना व सांस फूलना।
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पैरलाइसिस होने के संकेत
-- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना।
-- चलने में लड़खड़ाना और बोलने में तुतलाना।
-- आंखों में धुंधलापन आना और कोई भी वस्तु दो-दो दिखना।
-- हाथों व पैरों का सुन होना। चेहरे का टेढ़ा होना।
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इन मरीजों का आहार
पैरलाइसिस वाले मरीजों को हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए। सप्ताह में दो बार मछली खानी चाहिए। साबुत अनाज और दाल लेनी चाहिए। दो से तीन बार ताजे फल का जूस लें।
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पैरालाइसिस से ऐसे करें बचाव
-- उच्च रक्तचाप और डायबिटीज को नियंत्रित रखें।
-- मोटापा कम करें।
-- आधा घंटा टहलना चाहिए।
-- शराब और धूम्रपान का सेवन न करें।
--हाई कोलस्ट्रोल वाली चीजें, जैसे बरगर, मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा व मीट का सेवन न करें।
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दिल के मरीज इन बातों रखें ख्याल
-- ज्यादा भारी काम न करें।
-- खाना खाने के बाद थोड़ी देर आराम करें।
-- ज्यादा सर्दी से बचें और गुस्सा न करें।
-- चिकनाई वाले पदार्थ न खाएं।
-- दवा लेते रहें और चिकित्सक से चेकअप कराएं।
-- सुबह की सब्जी में इस्तेमाल हुआ तेल, घी व रिफाइंड दोबारा न इस्तेमाल करें।
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-- सुबह चार से दस बजे तक का समय खतरे वाला
-- नियमित दवा और सावधानी से ही होगा बचाव
सहारनपुर। सर्दी बढ़ने के साथ ही सरकारी अस्पताल और निजी चिकित्सकों के यहां हृदय, रक्तचाप और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ऐसे मरीजों के लिए सुबह चार से दस बजे का समय अत्यधिक खतरे वाला है। ऐसे में नियमित दवाई का सेवन और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
रविवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ज्यादातर मरीज सांस, बीपी और दिल के रोगी इलाज कराने पहुंचे। सीएमओ बीएस सोढ़ी, फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी और डॉ. पीडी गर्ग का कहना है कि बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से बढ़ी ठंड एवं कोहरे में हार्ट, सांस, बीपी, ब्रेन हैमरेज के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में इन मरीजों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। रोजाना दवाई लेने के साथ ही कुछ नियमों का भी पालन करना होगा। ताकि सर्दी का सितम जीवन पर भारी न पड़े।
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कोहरे में सिकुड़ जाती है सांस की नली
सहारनपुर। डॉ. संजीव मिगलानी के मुताबिक कोहरे की वजह से सांस की नली में सिकुड़न आ जाती है, जिससे सांस लेने में काफी परेशानी होती है। ऐसे मरीजों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जैसे सांस लेते समय गले में लगातार आवाज आती है। खांसी, घर में काम करते और सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलता है। हाथ-पैर, अंगुलियों और जीभ नीली हो जाती है और हाथ-पैर पर सूजन आ जाती है। छाती में सीटी की आवाज आती है। बचाव के लिए सुबह और शाम के समय सांस के मरीजों को सर्दी से बचना चाहिए। आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर मास्क लगाकर निकलें। इनहेलर और सांस के कैप्सूल का नियमित सेवन करें और दिन में तीन से चार बार भाप लें।
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हार्ट के मरीज ऐसे करें बचाव
सहारनपुर। डॉ. मिगलानी के मुताबिक भीषण सर्दी में केटीकोलामीन का रिसाव बढ़ जाता है, जिससे बीपी बढ़ता और ब्रेन हैमरेज व हार्ट अटैक आने की संभावना रहती है। इन मरीजों को नियमित बीपी की दवा लेनी चाहिए। सामान्य लोगों बीपी 120 और 80 रहता और उच्च रक्त चाप से पीड़ित व्यक्ति 140 और 90 से ऊपर होता है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान, अधिक नमक, शराब का सेवन न करें। इसके अलावा डिप्रेशन, डायबिटीज के मरीजों, मोटे लोगों और व्यायाम न करने वाले लोगों को भी हार्ट अटैक व ब्रेन हैमरेज का खतरा ज्यादा रहता है।
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उच्च रक्तचाप के लक्षण
सहारनपुर। 50 प्रतिशत मरीजों में लक्षण नहीं पाए आते हैं, लेकिन रूटीन चेकअप कराने पर उनका बीपी बढ़ा मिलता है। सिर में दर्द होना, चक्कर आाना, दिल का घबराना और उल्टी आना उच्च रक्तचाप के लक्षण हैं। उच्च रक्तचाप की वजह से दिल, दिमाग, गुर्दों, आंखों, टांगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
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हार्ट अटैक के लक्षण
-- छाती में दर्द बायीं ओर की तरफ से दायी ओर जाना।
-- छाती से गले की तरफ दर्द होना।
--पसीना और उल्टी आना व सांस फूलना।
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पैरलाइसिस होने के संकेत
-- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना।
-- चलने में लड़खड़ाना और बोलने में तुतलाना।
-- आंखों में धुंधलापन आना और कोई भी वस्तु दो-दो दिखना।
-- हाथों व पैरों का सुन होना। चेहरे का टेढ़ा होना।
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इन मरीजों का आहार
पैरलाइसिस वाले मरीजों को हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए। सप्ताह में दो बार मछली खानी चाहिए। साबुत अनाज और दाल लेनी चाहिए। दो से तीन बार ताजे फल का जूस लें।
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पैरालाइसिस से ऐसे करें बचाव
-- उच्च रक्तचाप और डायबिटीज को नियंत्रित रखें।
-- मोटापा कम करें।
-- आधा घंटा टहलना चाहिए।
-- शराब और धूम्रपान का सेवन न करें।
--हाई कोलस्ट्रोल वाली चीजें, जैसे बरगर, मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा व मीट का सेवन न करें।
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दिल के मरीज इन बातों रखें ख्याल
-- ज्यादा भारी काम न करें।
-- खाना खाने के बाद थोड़ी देर आराम करें।
-- ज्यादा सर्दी से बचें और गुस्सा न करें।
-- चिकनाई वाले पदार्थ न खाएं।
-- दवा लेते रहें और चिकित्सक से चेकअप कराएं।
-- सुबह की सब्जी में इस्तेमाल हुआ तेल, घी व रिफाइंड दोबारा न इस्तेमाल करें।