{"_id":"5dc9ac478ebc3e5ae9177e57","slug":"health-workers-are-absent-from-duty-even-after-orders-saharanpur-news-mrt4531119164","type":"story","status":"publish","title_hn":"आदेश के बाद भी ड्यूटी से नदारत है स्वास्थ्य कर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आदेश के बाद भी ड्यूटी से नदारत है स्वास्थ्य कर्मी
विज्ञापन
साढौली कदीम के स्वास्थ्य केंद्र पर लटका ताला
- फोटो : SAHARANPUR
साढौली कदीम (सहारनपुर)। शासन के आदेश के बाद भी स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी से नदारद चल रहे हैं। रविवार को अस्पताल पर दिन भर ताला लटका रहा। सोमवार को मात्र एक वार्ड ब्वाय अस्पताल का ताला खोलने पहुंचा। जबकि बुखार ने क्षेत्र में त्राही त्राही मचा रखी है।
विकास खंड साढौली कदीम के गांव कम्बोहमजरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं मात्र नाममात्र को क्षेत्रीय लोगों को मिल पा रही है। मात्र एक फार्मेसिस्ट के भरोसे अस्पताल संचालित किया जा रहा है। फार्मेसिस्ट को जब किसी कार्य से बाहर या अवकाश पर जाना पड़ता है तो अस्पताल में ताला लटक जाता है। इसके चलते बीमारी से पीड़ित लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों की शरण लेने को बाध्य होना पड़ता है। जहां एक ओर क्षेत्र में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर चिकित्सा देने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र में पिछले छह माह से चिकित्सक की तैनाती की, लेकिन वह मात्र कागजों में ही चल रही है। सूत्रों के अनुसार छह माह में यह चिकित्सक छह बार भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीण रजनीश कुमार, योगेंद्र सिंह, नितिन कुमार, सर्वेश कुमार, मुकेश कुमार, कार्तिक काम्बोज, राजेश कुमार, चौ. माजिद, खालिद, हाजी मासूम आदि ने कहा कि उन्होंने चिकित्सक को आज तक स्वास्थ्य केंद्र पर कभी नहीं देखा।
विज्ञापन
शासन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अस्पताल को 24 घंटे खोले जाने के आदेश दिए, इसके बाद भी ये स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। उधर, सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन कंदवाल ने बताया कि यदि कर्मचारी केंद्र में नहीं पहुंचे तो जांच कर कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विकास खंड साढौली कदीम के गांव कम्बोहमजरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं मात्र नाममात्र को क्षेत्रीय लोगों को मिल पा रही है। मात्र एक फार्मेसिस्ट के भरोसे अस्पताल संचालित किया जा रहा है। फार्मेसिस्ट को जब किसी कार्य से बाहर या अवकाश पर जाना पड़ता है तो अस्पताल में ताला लटक जाता है। इसके चलते बीमारी से पीड़ित लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों की शरण लेने को बाध्य होना पड़ता है। जहां एक ओर क्षेत्र में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर चिकित्सा देने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र में पिछले छह माह से चिकित्सक की तैनाती की, लेकिन वह मात्र कागजों में ही चल रही है। सूत्रों के अनुसार छह माह में यह चिकित्सक छह बार भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीण रजनीश कुमार, योगेंद्र सिंह, नितिन कुमार, सर्वेश कुमार, मुकेश कुमार, कार्तिक काम्बोज, राजेश कुमार, चौ. माजिद, खालिद, हाजी मासूम आदि ने कहा कि उन्होंने चिकित्सक को आज तक स्वास्थ्य केंद्र पर कभी नहीं देखा।
विज्ञापन
शासन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अस्पताल को 24 घंटे खोले जाने के आदेश दिए, इसके बाद भी ये स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। उधर, सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन कंदवाल ने बताया कि यदि कर्मचारी केंद्र में नहीं पहुंचे तो जांच कर कार्रवाई होगी।