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Saharanpur News: बेटे की मौत से आहत होकर छोड़ा था घर, 35 साल बाद परिजन वापस लाए
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सहारनपुर, नकुड़। कस्बे के मोहल्ला बंजारान निवासी राव हनीफ खां 35 साल बाद घर लौटे हैं, जिन्हें परिजन वापस लेकर आए हैं। करीब 35 साल पहले बेटे की मौत से आहत होकर उन्होंने घर छोड़ दिया था, जिसके बाद उनकी पत्नी ने भी दूसरा निकाह कर लिया था।
मोहल्ला बंजारान निवासी अब्दुल वाहिद ने बताया कि उसके ताऊ राव हनीफ खां का निकाह हरपाल गांव में हुआ था। करीब 35 साल पहले राव हनीफ खां की पत्नी अपने मायके चली गई थी। वहां पर बेटे को जन्म दिया। जिसकी कुछ दिन बाद मौत हो गई थी। बेटे की मौत से राव हनीफ इतने आहत हुए कि उन्होंने शव को सुपुर्द-ए-खाक कराया और घर छोड़कर चले गए।
काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। पत्नी ने भी दूसरा निकाह कर लिया। अब्दुल वाहिद ने बताया कि अब ताऊ हनीफ की उम्र करीब 85 वर्ष है। बताया कि दो दिन पहले शेखाबासी मदरसा, जीरकपुर (पंजाब) से देवबंद के एक मौलवी का फोन आया। जो ताऊ समेत पूरे परिवार को जानते थे। मौलवी ने बताया कि राव हनीफ खां पंजाब में जिला फतेहगढ़ साहिब के पास गांव गदेरा में हैं। इसके बाद बुधवार को बुंदू हसन, अब्दुल वाहिद व अन्य कई लोग गांव गदेरा पहुंच गए और वापस लेकर आए। ग्रामीणों ने बताया कि इतने समय तक हनीफ गांव स्थित कब्रिस्तान की जमीन में एक मकान में रहकर पशुपालन करके अपनी जीविका चलाता रहा।
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- 35 वर्ष पूर्व उधार लिए रुपये लौटाए
हनीफ ने अपने भतीजे अब्दुल वाहिद व अन्य परिजनों को पंजाब में व्यतीत किए जीवन के बारे में बताया। हनीफ ने कस्बा निवासी जमील पुत्र चंदा के करीब पांच हजार रुपये लौटाए। बताया कि 35 वर्ष पहले वह राज मिस्त्री का काम करने वाले जमील के पास मजदूरी किया करते थे। उस समय उन्होंने जमील से पांच हजार रुपये उधार लिए थे।
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मोहल्ला बंजारान निवासी अब्दुल वाहिद ने बताया कि उसके ताऊ राव हनीफ खां का निकाह हरपाल गांव में हुआ था। करीब 35 साल पहले राव हनीफ खां की पत्नी अपने मायके चली गई थी। वहां पर बेटे को जन्म दिया। जिसकी कुछ दिन बाद मौत हो गई थी। बेटे की मौत से राव हनीफ इतने आहत हुए कि उन्होंने शव को सुपुर्द-ए-खाक कराया और घर छोड़कर चले गए।
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काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। पत्नी ने भी दूसरा निकाह कर लिया। अब्दुल वाहिद ने बताया कि अब ताऊ हनीफ की उम्र करीब 85 वर्ष है। बताया कि दो दिन पहले शेखाबासी मदरसा, जीरकपुर (पंजाब) से देवबंद के एक मौलवी का फोन आया। जो ताऊ समेत पूरे परिवार को जानते थे। मौलवी ने बताया कि राव हनीफ खां पंजाब में जिला फतेहगढ़ साहिब के पास गांव गदेरा में हैं। इसके बाद बुधवार को बुंदू हसन, अब्दुल वाहिद व अन्य कई लोग गांव गदेरा पहुंच गए और वापस लेकर आए। ग्रामीणों ने बताया कि इतने समय तक हनीफ गांव स्थित कब्रिस्तान की जमीन में एक मकान में रहकर पशुपालन करके अपनी जीविका चलाता रहा।
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- 35 वर्ष पूर्व उधार लिए रुपये लौटाए
हनीफ ने अपने भतीजे अब्दुल वाहिद व अन्य परिजनों को पंजाब में व्यतीत किए जीवन के बारे में बताया। हनीफ ने कस्बा निवासी जमील पुत्र चंदा के करीब पांच हजार रुपये लौटाए। बताया कि 35 वर्ष पहले वह राज मिस्त्री का काम करने वाले जमील के पास मजदूरी किया करते थे। उस समय उन्होंने जमील से पांच हजार रुपये उधार लिए थे।