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बारिश के साथ ओले, कही राहत तो कहीं आफत
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:56 AM IST
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सहारनपुर में बारिश के साथ आए ओले।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में बिजली की गर्जना के बीच बरसे बादल कहीं राहत को कहीं आफत लेकर आए। एक ओर जहां भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए मौसम खुशगवार हो गया, वहीं किसानों की गेहूं की फसल के गिर जाने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है।
ऐसे में किसान फसल कटने तक बारिश नहीं होने की दुआ कर रहे हैं। बुधवार की सुबह काली घटाएं और हल्की बारिश लेकर आई। बादलों की गर्जना के बीच रुक-रुककर बारिश होती रही।
घंटाभर हुई बूंदाबांदी के बाद एक बार मौसम खुल गया, जिसके बाद हल्की धूप निकल आई। मगर उत्तर क्षेत्र से उठी काली घटा के कारण फिर से आसमान काले बादलों से ढक गया।
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शाम चार बजे फिर से दस मिनट के लिए बादल जमकर बरसे। बारिश होने से कई दिन से गर्मी से जूझ रहे लोगों ने राहत की सांस ली। उधर, बारिश के साथ ही तेज हवाएं चलने से कई जगहों पर गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
किसानों का कहना है इससे पछेती यानी लेट बोए गए गेहूं को नुकसान हुआ है। क्योंकि लेट बोए गए गेहूं में अभी दाना पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। फसल गिरने से दाने की ग्रोथ रुक जाती है, जिसकी वजह से उत्पादन कम रहता है।
गेहूं की कटाई भी 15 दिन बाद शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसान गेहूं की कटाई होने तक बारिश न होने की दुआ मांग रहे हैं। जिले में 15 मार्च के बाद से सूरज की तपिश थी।
आलम रहा कि 27 मार्च से एक अप्रैल तक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक बना रहा। इसकी वजह से लोग भीषण गर्मी से जूझते रहे। मगर दो दिन से हल्की बारिश की वजह से तापमान में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है।
बुधवार को हुई बारिश और हवाएं चलने से तापमान काफी नीचे चला गया। बुधवार को न्यूनतम तापमान 17 और अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसने लोगों को ठंडक का अहसास कराया
हल्की बारिश के बावजूद शहर की अनेक कॉलोनियों में जलभराव की समस्या बन गई। इतना ही नहीं, शहर की अनेक टूटी सड़कों पर कचरा और मिट्टी फैले होने की वजह से किचकिच हो गई। इसकी वजह से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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ऐसे में किसान फसल कटने तक बारिश नहीं होने की दुआ कर रहे हैं। बुधवार की सुबह काली घटाएं और हल्की बारिश लेकर आई। बादलों की गर्जना के बीच रुक-रुककर बारिश होती रही।
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घंटाभर हुई बूंदाबांदी के बाद एक बार मौसम खुल गया, जिसके बाद हल्की धूप निकल आई। मगर उत्तर क्षेत्र से उठी काली घटा के कारण फिर से आसमान काले बादलों से ढक गया।
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शाम चार बजे फिर से दस मिनट के लिए बादल जमकर बरसे। बारिश होने से कई दिन से गर्मी से जूझ रहे लोगों ने राहत की सांस ली। उधर, बारिश के साथ ही तेज हवाएं चलने से कई जगहों पर गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
किसानों का कहना है इससे पछेती यानी लेट बोए गए गेहूं को नुकसान हुआ है। क्योंकि लेट बोए गए गेहूं में अभी दाना पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। फसल गिरने से दाने की ग्रोथ रुक जाती है, जिसकी वजह से उत्पादन कम रहता है।
गेहूं की कटाई भी 15 दिन बाद शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसान गेहूं की कटाई होने तक बारिश न होने की दुआ मांग रहे हैं। जिले में 15 मार्च के बाद से सूरज की तपिश थी।
आलम रहा कि 27 मार्च से एक अप्रैल तक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक बना रहा। इसकी वजह से लोग भीषण गर्मी से जूझते रहे। मगर दो दिन से हल्की बारिश की वजह से तापमान में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है।
बुधवार को हुई बारिश और हवाएं चलने से तापमान काफी नीचे चला गया। बुधवार को न्यूनतम तापमान 17 और अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसने लोगों को ठंडक का अहसास कराया
हल्की बारिश के बावजूद शहर की अनेक कॉलोनियों में जलभराव की समस्या बन गई। इतना ही नहीं, शहर की अनेक टूटी सड़कों पर कचरा और मिट्टी फैले होने की वजह से किचकिच हो गई। इसकी वजह से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।