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Gyanvapi: एक छत के नीचे करें पूजा और नमाज, दुनिया को दें मोहब्बत का पैगाम... अदालत के फैसले पर ये बोले मुफ्ती
Thu, 01 Feb 2024 11:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 01 Feb 2024 11:28 AM IST
सार
मुस्लिम स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने ज्ञानवापी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एक छत के नीचे करें पूजा और नमाज, दुनिया को मोहब्बत का पैगाम दें।
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मौलाना मुफ्ती असद कासमी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रसिद्ध मुस्लिम स्कॉलर व पूर्व में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े रहे मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद पर कोर्ट का जो आदेश आया है, उस पर दोनों भाई (हिंदू-मुस्लिम पक्ष) मिलकर दुनिया को यह पैगाम दें कि हम एक ही छत के नीचे पूजा भी करेंगे और नमाज भी अदा करेंगे। यही इस मुल्क की खूबसूरती है।
बुधवार को दारुल उलूम वक्फ स्थित शेखुल हिंद कॉलोनी पहुंचे मुफ्ती वजाहत कासमी ने बातचीत में कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर बैठकर बातचीत से इसका हल निकालना चाहिए। इसका समर्थन हम बहुत पहले से कर रहे हैं, लेकिन अभी यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
इसलिए कोर्ट इस पर जो भी फैसला दे रहा है उसी को दोनों पक्षों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में जितने भी विवादित धार्मिक स्थल हैं उन सभी पर मिल बैठकर मसले का हल निकालना चाहिए। किसी एक पक्ष को सौंप देनी चाहिए यह बात एक तरफा हो जाती है।
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मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा कि हमारा मुल्क बहुत ही शानदार है। यहां की मिट्टी में अल्लाह ताआला ने बहुत ही अजीबो गरीब मोहब्बत और अपनापन रखा है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का जो आदेश आया है उस पर दोनों भाई (हिंदू-मुस्लिम पक्ष) मिलकर मोहब्बत और अच्छे तरीके से मुल्क और दुनिया को यह पैगाम दें की हम वहां पूजा भी कर रहे हैं और नमाज भी पढ़ रहे हैं।
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बुधवार को दारुल उलूम वक्फ स्थित शेखुल हिंद कॉलोनी पहुंचे मुफ्ती वजाहत कासमी ने बातचीत में कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर बैठकर बातचीत से इसका हल निकालना चाहिए। इसका समर्थन हम बहुत पहले से कर रहे हैं, लेकिन अभी यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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इसलिए कोर्ट इस पर जो भी फैसला दे रहा है उसी को दोनों पक्षों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में जितने भी विवादित धार्मिक स्थल हैं उन सभी पर मिल बैठकर मसले का हल निकालना चाहिए। किसी एक पक्ष को सौंप देनी चाहिए यह बात एक तरफा हो जाती है।
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मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा कि हमारा मुल्क बहुत ही शानदार है। यहां की मिट्टी में अल्लाह ताआला ने बहुत ही अजीबो गरीब मोहब्बत और अपनापन रखा है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का जो आदेश आया है उस पर दोनों भाई (हिंदू-मुस्लिम पक्ष) मिलकर मोहब्बत और अच्छे तरीके से मुल्क और दुनिया को यह पैगाम दें की हम वहां पूजा भी कर रहे हैं और नमाज भी पढ़ रहे हैं।
हम सब मिलकर इसी तरह रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूजा और नमाज एक साथ होगी तो पूरी दुनिया में यह संदेश भी जाएगा कि झगड़ा कोर्ट में है, लेकिन बाहर हम सब एक हैं। हमने हिंदुस्तान में हजारों ऐसी छतें देखी हैं जहां दोनों मजहबों को मानने वालों की पूजा और नमाज एक साथ होती हैं।