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सरसावा में अब बुजुर्ग को स्वचालित कुर्सी पहुंचाएंगी गुरुद्वारे

Mon, 11 Nov 2019 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2019 11:51 PM IST
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Gurudwaras will now provide automatic chairs to the elderly in Sarsawa
गुरुपर्व के मौके पर रंगीन रोशनी से नहाया सरसावा गुरुद्वारा साहिब - फोटो : SAHARANPUR
सरसावा (सहारनपुर)। अब सहारनपुर के गुरुद्वारा भी समय से साथ हाईटेक होते जा रहे हैं। सहारनपुर के सरसावा स्थित गुरुद्वारा में आधुनिक तकनीक से लैस एक्सकेलेटर चेयर (स्वचालित कुर्सी) लगवाई। इससे सीढ़ी चढ़ने में लाचार श्रद्धालुओं को गुरु दरबार तक पहुंचाकर दर्शन लाभ कराया जा सके। सरसावा का गुरुद्वारा जिले का एकमात्र गुरुद्वारा है। इसमें बुजुर्गों के लिए इस प्रकार की सहूलियत दी।
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सरसावा स्थित गुरुद्वारा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। इस गुरुद्वारा को प्रबंधकों द्वारा आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। गुरुद्वारा में हर रोज आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को आधुनिक तकनीक की सुविधा दी जा रही है। इसके तहत गुरुद्वारा में बुजुर्गों एवं बीमार लोगों को गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शनों के लिए प्रथम तल तक ले जाने के लिए आधुनिक तकनीक से बनी एस्केलेटर चेयर लगवाई।
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गुरुद्वारा सिंघ सभा के पूर्व जनरल सेक्रेटरी सरदार हरजीत सिंह ने बताया कि सन 1949 में स्थापित गुरुद्वारा साहिब के वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार की योजना साल 2017 में बनी और कार्य आरंभ हो गया। पूर्व में गुरू ग्रंथ साहिब जमीनी तल पर प्रकाशमान थे, लेकिन भवन के मानचित्र के अनुसार दरबार हॉल को बनाने की योजना प्रथम तल बनी जहां सीढ़ी चढ़कर ही पहुंचा जा सकता था, इसमें एक समस्या थी कि बुजुर्ग तथा चलने की समस्या से जूझ रहे श्रद्धालु प्रथम तल पर स्थापित दरबार हॉल में मत्था टेकने कैसे पहुंचेंगे।
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सरदार हरजीत सिंह ने बताया रिश्तेदारी में जाने के दौरान संयोगवश वह दिल्ली के प्रसिद्ध बंगला साहिब गुरुद्वारा में दर्शन करने गए तो उन्होंने सीढ़ी के एक किनारे पर स्वचालित कुर्सी को चलते देखा। इसमें बैठकर बुजुर्ग बेहद आसानी से गुरुद्वारे में जा रहे थे। इसके बाद इस तकनीक को उन्होंने सरसावा गुरुद्वारे में भी प्रयोग करने का निर्णय लिया। इसी साल की शुरूआत में स्वचालित कुर्सी गुरुद्वारे के प्रथम तल पर स्थित दरबार हॉल में प्रकाशमान गुरू ग्रंथ साहिब के दर्शनार्थियों के लिए लगवा दी। इससे कोई दर्शनों से महरूम ना रह सके।
स्वचालित कुर्सी की विशेषता
हरजीत सिंह ने बताया कि कुर्सी करीब डेढ़ क्विंटल का वजन के साथ ऊपर चढ़ने तथा उतरने में सक्षम है। इसके लिए दरबार हॉल में 20 फुट लंबा चैनर लगवाया। जो करीब डेढ़ क्विंटल तक के व्यक्ति का वजन उठाने में सक्षम है और धीमी एवं सुरक्षित रफ्तार में ऊपर तथा नीचे दोनों दिशा में चलती है। सबसे बड़ी विशेषता ये है कि कुर्सी के अंदर बैटरी लगी हुई है जो इनवर्टर से भी चार्ज हो जाती है। इस कारण बिजली न होने पर भी उसका उपयोग किया जा सकता है तथा एक बार चार्ज करने पर दर्जनों बार प्रयोग में लाई जा सकती है।

नव निर्मित गुरुद्वारा भवन की भूकंपरोधी
सरदार हरजीत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा भवन का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से किया, साथ ही खालसा पंथ की पहचान के चिन्ह 60 फुट ऊंचे निशान साहिब को फहराया। निशान साहिब के वस्त्र बदलने हस्तचलित लिफ्ट लगाई गई है।

गुरुद्वारे में प्रयोग हो रही स्वचालित कुर्सी

गुरुद्वारे में प्रयोग हो रही स्वचालित कुर्सी- फोटो : SAHARANPUR

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