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Saharanpur News: जिले के खेतों में हरित क्रांति, शाकभाजी का रकबा हुआ दोगुना

Sat, 25 Apr 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sat, 25 Apr 2026 12:55 AM IST
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Green Revolution in the District's Fields: Area Under Vegetable Cultivation Doubles
सहारनपुर। कभी गन्ने की फसल के लिए जाना जाने वाला जिला अब अन्य फसलों को भी तरजीह दे रहा है। सब्जियों की खेती जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। पिछले नौ वर्षों में जिले में शाकभाजी का रकबा और उत्पादन दोगुना हुआ है। खेतों में हरी क्रांति दिखाई दे रही है।
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जिले में वर्ष 2017 में शाकभाजी का रकबा 6910 हेक्टेयर था। नौ वर्षों में यह बढ़कर 11,780 हेक्टेयर हो गया है। उत्पादन भी दो लाख मीट्रिक टन से बढ़कर चार लाख मीट्रिक टन हुआ है। सब्जियों की फसल पर बेमौसम बारिश का भी कोई खास असर नहीं होता। आलू का रकबा वर्ष 2017 में 410 हेक्टेयर था। वर्ष 2026 में बढ़कर यह 700 हेक्टेयर हो गया। वर्ष 2017 में जिले में आलू का उत्पादन 10250 मीट्रिक टन था, जो 2026 में बढ़कर 21 हजार मीट्रिक टन हो गया। सबसे अधिक टमाटर का रकबा बढ़ा है। इसमें करीब सवा दो गुना की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 में टमाटर का रकबा 325 हेक्टेयर था। 2026 में यह बढ़कर 800 हेक्टेयर रहा। उत्पादकता में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई। इसी तरह बैंगन, मूली का रकबा भी बढ़ा है।
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- बोले किसान

- कलालहटी गांव के किसान रामकुमार गौतम ने बताया कि उन्होंने बैंगन की फसल लगाई है। सब्जी की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। अच्छे सीजन में खासा मुनाफा होता है।
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- रजापुर गांव के रोहित ने बताया कि उन्होंने खीरे, भिंडी की फसल लगाई है। सीजन शुरू हो गया है। भिंडी फिलहाल 35 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में जा रही है।

- बिड़वी के सुधीर राठौर ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ चना, मसूर, प्याज, लहसुन, मिर्च की खेती करते हैं। बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। गन्ने और गेहूं में लगने वाली लागत तो निकलती ही है। साथ ही तीन से चार महीने में आमदनी भी होती है।

- ढोलामाजरा के राजेंद्र ने बताया कि खेत में भिंडी की फसल लगाई है। वह ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करते हैं। इस बार सहफसली खेती की है। अच्छे मुनाफे की उम्मीद है।




जिले में तेजी से शाकभाजी का रकबा बढ़ा है। उद्यान विभाग भी किसानों को अच्छे बीज उपलब्ध करा रहा है। समय-समय पर किसानों को उद्यान विभाग प्रशिक्षण भी दिलाता है।

- गमपाल, जिला उद्यान अधिकारी।
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