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खूब हुए प्रयास, नहीं खत्म हो सका कुपोषण दंश
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सहारनपुर। नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं में हर माह पुष्टाहार बंटने के बावजूद बच्चों में कुपोषण दूर नहीं हो सका। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनपद में अब भी पीली श्रेणी में कुपोषित बच्चों की संख्या 33825 और लाल श्रेणी में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 6900 हैं। हालांकि, तीन वर्षों में कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में कमी आई है, लेकिन पूरी तरह खात्मा नहीं हो सका।
बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं। इन दिनों सुपोषण माह चल रहा है, जिसके तहत गांव-गांव और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कुपोषण से बचाने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। इसके साथ ही पौष्टिक आहार देने की सलाह बच्चों के परिजनों को दी जा रही है। इसके साथ बाल विकास विभाग नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ बच्चों और उनके परिवार को दिलवाया जा रहा है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के परिजनों के राशन कार्ड बनवाए जा रहे हैं। ताकि उनको गेहूं, चावल, नमक आदि सामान आसानी से उपलब्ध हो सके। बच्चों को पौष्टिक आहार किस प्रकार से देना है, इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बच्चों का वजन करने के साथ ही टीकाकरण अभियान चल रहा है।
मगर, बीते तीन वर्षों से गांव-गांव पुष्टाहार बंटने के बावजूद बच्चों में पूरी तरह कुपोषण खत्म नहीं हो पाया है। अधिकारियों का दावा है कुपोषित बच्चों की संख्या घटी है, लेकिन विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनपद में अब भी पीली श्रेणी में कुपोषित बच्चों की संख्या 33825 और लाल श्रेणी में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 6900 हैं।
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वर्ष----कुपोषित बच्चों की संख्या----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 -------------------------18105
2018------41869--------------------------12547
2019------33825--------------------------6910
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कुपोषण का पूरी तरह होगा खात्मा: आशा
सहारनपुर। जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी का कहना है कि जनपद में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या हर साल घटी है। इन दिनों सुपोषण माह चल रहा है। सुपोषण मेलों का आयोजन किया जा रहा है। कुपोषण दूर करने के लिए तमाम योजनाओं का लाभ बच्चों का दिलवाया जा रहा है। इसके साथ जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। बच्चों के परिजनों को पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पौष्टिक फल देने वाले सहजन के पौधे रोपित किए जा रहे हैं। जल्द ही जनपद से पूरी तरह कुपोषण का खात्मा हो जाएगा। इसके लिए विभाग पूरी तरह प्रयासरत है।
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बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं। इन दिनों सुपोषण माह चल रहा है, जिसके तहत गांव-गांव और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कुपोषण से बचाने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। इसके साथ ही पौष्टिक आहार देने की सलाह बच्चों के परिजनों को दी जा रही है। इसके साथ बाल विकास विभाग नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ बच्चों और उनके परिवार को दिलवाया जा रहा है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के परिजनों के राशन कार्ड बनवाए जा रहे हैं। ताकि उनको गेहूं, चावल, नमक आदि सामान आसानी से उपलब्ध हो सके। बच्चों को पौष्टिक आहार किस प्रकार से देना है, इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बच्चों का वजन करने के साथ ही टीकाकरण अभियान चल रहा है।
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मगर, बीते तीन वर्षों से गांव-गांव पुष्टाहार बंटने के बावजूद बच्चों में पूरी तरह कुपोषण खत्म नहीं हो पाया है। अधिकारियों का दावा है कुपोषित बच्चों की संख्या घटी है, लेकिन विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनपद में अब भी पीली श्रेणी में कुपोषित बच्चों की संख्या 33825 और लाल श्रेणी में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 6900 हैं।
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वर्ष----कुपोषित बच्चों की संख्या----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 -------------------------18105
2018------41869--------------------------12547
2019------33825--------------------------6910
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कुपोषण का पूरी तरह होगा खात्मा: आशा
सहारनपुर। जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी का कहना है कि जनपद में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या हर साल घटी है। इन दिनों सुपोषण माह चल रहा है। सुपोषण मेलों का आयोजन किया जा रहा है। कुपोषण दूर करने के लिए तमाम योजनाओं का लाभ बच्चों का दिलवाया जा रहा है। इसके साथ जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। बच्चों के परिजनों को पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पौष्टिक फल देने वाले सहजन के पौधे रोपित किए जा रहे हैं। जल्द ही जनपद से पूरी तरह कुपोषण का खात्मा हो जाएगा। इसके लिए विभाग पूरी तरह प्रयासरत है।