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पुराने बाग के जीर्णोंद्घार पर मिलेगा अनुदान
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पुराने बाग के जीर्णोद्धार पर मिलेगा अनुदान
सहारनपुर। उद्यान विभाग बागवानों को आम के पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। फल पट्टी विकास योजना के तहत उद्यान विभाग जीर्णोद्धार कराने वाले बागवानों को प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये का अनुदान देगा। जनपद को 10 हेक्टेयर बागों का जीर्णोद्धार कराने का लक्ष्य दिया गया है।
आम का बाग पुराना होने पर न सिर्फ उसकी उत्पादकता घट जाती है बल्कि बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए बागों का जीर्णोद्धार किया जाता है। इसमें कटे कटे हुए भाग पर गाय का गोबर या कॉपर का लेप एवं तना भेदक कीटनाशी का प्रयोग किया जाता है। इसमें 40 से 50 वर्ष पुराने बाग की बेकार शाखाओं को काट छांटकर पेड़ से अलग कर दिया जाता है। जिससे बाग में धूप, हवा का पर्याप्त संचार हो जाता है। जीर्णोद्धार के दो से तीन वर्ष बाद ही पेड़ का फलो उत्पादन पहले की तरह हो जाता है। इसके अलावा फलों के साइज में भी इजाफा हो जाता है। साथ ही आम के बाग की आयु भी बढ़ जाती है। पुराने बाग का जीर्णोद्धार करने के लिए बागवान का औसत खर्च 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर माना जाता है। उद्यान विभाग खर्च का 50 प्रतिशत (20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर) अनुदान देगा।
लाभकारी है पुराने बागों का जीर्णोद्धार
पुराने आम के बागों में पेड़ बडे़ होने से आपस में मिल जाते हैं। जिससे बाग में हवा और धूप का पर्याप्त संचार नहीं हो पाता है। जिससे पुराने बाग में फल का उत्पादन घट जाता है। साथ ही हवा, धूप का पर्याप्त संचार नहीं होने से बाग में विभिन्न प्रकार के कीट एवं बीमारियां लग जाती हैं। पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराने से इस प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है। जनपद को 10 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला हैं। इसके लिए बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। - अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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सहारनपुर। उद्यान विभाग बागवानों को आम के पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। फल पट्टी विकास योजना के तहत उद्यान विभाग जीर्णोद्धार कराने वाले बागवानों को प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये का अनुदान देगा। जनपद को 10 हेक्टेयर बागों का जीर्णोद्धार कराने का लक्ष्य दिया गया है।
आम का बाग पुराना होने पर न सिर्फ उसकी उत्पादकता घट जाती है बल्कि बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए बागों का जीर्णोद्धार किया जाता है। इसमें कटे कटे हुए भाग पर गाय का गोबर या कॉपर का लेप एवं तना भेदक कीटनाशी का प्रयोग किया जाता है। इसमें 40 से 50 वर्ष पुराने बाग की बेकार शाखाओं को काट छांटकर पेड़ से अलग कर दिया जाता है। जिससे बाग में धूप, हवा का पर्याप्त संचार हो जाता है। जीर्णोद्धार के दो से तीन वर्ष बाद ही पेड़ का फलो उत्पादन पहले की तरह हो जाता है। इसके अलावा फलों के साइज में भी इजाफा हो जाता है। साथ ही आम के बाग की आयु भी बढ़ जाती है। पुराने बाग का जीर्णोद्धार करने के लिए बागवान का औसत खर्च 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर माना जाता है। उद्यान विभाग खर्च का 50 प्रतिशत (20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर) अनुदान देगा।
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लाभकारी है पुराने बागों का जीर्णोद्धार
पुराने आम के बागों में पेड़ बडे़ होने से आपस में मिल जाते हैं। जिससे बाग में हवा और धूप का पर्याप्त संचार नहीं हो पाता है। जिससे पुराने बाग में फल का उत्पादन घट जाता है। साथ ही हवा, धूप का पर्याप्त संचार नहीं होने से बाग में विभिन्न प्रकार के कीट एवं बीमारियां लग जाती हैं। पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराने से इस प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है। जनपद को 10 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला हैं। इसके लिए बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। - अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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