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आम के बागों के जीर्णोद्धार पर मिलेगा अनुदान
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आम के बागों के जीर्णोद्धार पर मिलेगा अनुदान
सहारनपुर। अधिक आयु के आम के बागों को कटने से बचाने के लिए उद्यान विभाग पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराएगा। इसके तहत बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। जनपद सहारनपुर में 100 हेक्टेयर बागों के जीर्णोद्धार का लक्ष्य मिला है।
आम के पुराने बागों में फल उत्पादन कम हो जाने के कारण अधिकांश बाग बागवानों के लिए घाटे का सौदा बन जाते हैं। अच्छी आमदनी नहीं होने के कारण बागवानों का रुख पुराने बागों को कटवाने की ओर हो जाता है। आम के पेड़ों की आयु करीब सौ वर्ष की मानी जाती है। अधिक उम्र के पेड़ों पर फलों का उत्पादन कम होना शुरू हो जाता है। इसलिए पुराने पेड़ों का जीर्णोंद्धार कराने की आवश्यकता पड़ती है।
पुराने बागों में 35 से 50 वर्ष के बाद आम के पेड़ों की शाखाएं बढ़कर एक दूसरे को छूने लगती हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश बाग में पूरी तरह से नहीं जा पाता। ऐसे बागों में जहां कीट और रोगों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। वहीं, फल उत्पादन में भी कमी आ जाती है। इसके लिए आम के पेड़ों की कटाई छंटाई की जाती है जीर्णोंद्धार में पेड़ की सूखी, रोगग्रस्त और घनी शाखाओं को काटकर निकाल दिया जाता है। जिससे बाग में फलत में बढ़ोतरी हो जाती है।
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बेहट फल पट्टी योजना के तहत आम के पुराने बागों के जीर्णोद्धार कराने पर फोकस है। बाग की अधिक आयु के होने के कारण पेड़ों पर आम की फलत कम हो जाती है। जीर्णोंद्धार होने से दो से तीन वर्ष बाद ही पेड़ों पर पुन: नए बागों की तरह ही फल लगने लगते हैं। जनपद को 100 हेक्टेयर आम के बागों का जीर्णोंद्धार कराने का लक्ष्य मिला है। -- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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सहारनपुर। अधिक आयु के आम के बागों को कटने से बचाने के लिए उद्यान विभाग पुराने बागों का जीर्णोद्धार कराएगा। इसके तहत बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। जनपद सहारनपुर में 100 हेक्टेयर बागों के जीर्णोद्धार का लक्ष्य मिला है।
आम के पुराने बागों में फल उत्पादन कम हो जाने के कारण अधिकांश बाग बागवानों के लिए घाटे का सौदा बन जाते हैं। अच्छी आमदनी नहीं होने के कारण बागवानों का रुख पुराने बागों को कटवाने की ओर हो जाता है। आम के पेड़ों की आयु करीब सौ वर्ष की मानी जाती है। अधिक उम्र के पेड़ों पर फलों का उत्पादन कम होना शुरू हो जाता है। इसलिए पुराने पेड़ों का जीर्णोंद्धार कराने की आवश्यकता पड़ती है।
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पुराने बागों में 35 से 50 वर्ष के बाद आम के पेड़ों की शाखाएं बढ़कर एक दूसरे को छूने लगती हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश बाग में पूरी तरह से नहीं जा पाता। ऐसे बागों में जहां कीट और रोगों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। वहीं, फल उत्पादन में भी कमी आ जाती है। इसके लिए आम के पेड़ों की कटाई छंटाई की जाती है जीर्णोंद्धार में पेड़ की सूखी, रोगग्रस्त और घनी शाखाओं को काटकर निकाल दिया जाता है। जिससे बाग में फलत में बढ़ोतरी हो जाती है।
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बेहट फल पट्टी योजना के तहत आम के पुराने बागों के जीर्णोद्धार कराने पर फोकस है। बाग की अधिक आयु के होने के कारण पेड़ों पर आम की फलत कम हो जाती है। जीर्णोंद्धार होने से दो से तीन वर्ष बाद ही पेड़ों पर पुन: नए बागों की तरह ही फल लगने लगते हैं। जनपद को 100 हेक्टेयर आम के बागों का जीर्णोंद्धार कराने का लक्ष्य मिला है। -- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।