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कहने को ग्राम पंचायत..., दौड़-धूप विस चुनाव जैसी

Sun, 11 Apr 2021 11:43 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 11:43 PM IST
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Gram Panchayat to say, race and sunshine like Vidhan Sabha elections
इस्माईलपुर में एक मजरे से दूसरे तक प्रचार करते प्रत्याशी - फोटो : SAHARANPUR
कहने को ग्राम पंचायत..., दौड़-धूप विधान सभा चुनाव जैसी
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बिहारीगढ़/छुटमलपुर (सहारनपुर)। कहने को ग्राम पंचायत है थाप्पुल इस्माईलपुर, लेकिन यहां चुनाव विधानसभा और जिला पंचायत सदस्य की तरह होता है। क्योंकि इस ग्राम पंचायत का क्षेत्र ही इतना बड़ा है। इसमें 18 मजरे शामिल हैं, करीब 08 किलोमीटर तक इस ग्राम पंचायत का क्षेत्र फैला है। इस कारण प्रत्याशियों को मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए खूब दौड़ धूप करनी पड़ती है।
मुजफ्फराबाद ब्लाक क्षेत्र की यह ग्राम पंचायत सहारनपुर ही नहीं, आसपास के जनपदों में भी सबसे बड़ी है। किसी भी ग्राम पंचायत में इतने मजरे नहीं हैं। इस ग्राम पंचायत का राजस्व क्षेत्र इतना बड़ा है कि एक गांव तोता टांडा से पश्चिमी छोर पर बसे दूसरे गांव माहलोवाली की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। यही वजह है कि प्रधान पद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को आठ किमी की दूरी तक प्रचार करना पड़ता है। पैदल तो प्रचार करना मुश्किल है, इसलिए वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। दिन निकलने से लेकर देर रात तक प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एक गांव से दूसरे गांव तक दौड़ लगाते रहते हैं। इस ग्राम पंचायत में प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है। 23 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
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ये गांव हैं शामिल
उत्तराखंड की सीमा पर दिल्ली देहरादून हाईवे किनारे स्थित थाप्पुल इस्माईलपुर ग्राम पंचायत में छोटे बड़े 18 मजरे हैं। इनमें बिहारीगढ़, किशनगढ़, रामगढ़, सुंदरपुर, मनोहरपुर, टांडा मानसिंह, भगवतपुर, नरोत्तमगढ़, इस्माइलपुर, भगवतपुर, टांडा मिश्री, घेर कर्मा, दामोदराबाद, तोता टांडा, महलोवाली, किशनगढ़ कालोनी, थाप्पुल मुस्लिम, थाप्पुल अनुसूचित गांव शामिल हैं।
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बिहारीगढ़ से संचालित होती हैं गतिविधि
इस ग्राम पंचायत में गांव बिहारीगढ़ की स्थिति नगरीय जैसी है, क्योंकि यह देहरादून हाईवे पर बसा है। यहीं पर इसका पंचायतघर स्थित है तथा राजनीतिक गतिविधियां यहीं से संचालित होती हैं। सभी मजरों में सुंदरपुर की आबादी सबसे ज्यादा और महालोवाली की सबसे कम है।
धूल भरे रास्तों से निकलना पड़ रहा
भले ही प्रधान प्रत्याशी को प्रचार के लिए चुनाव आयोग ने वाहन के इस्तेमाल की अनुमति ना दे रखी हो, लेकिन इस ग्राम पंचायत में बिना वाहन के प्रचार करना असंभव बना हुआ है। प्रत्याशियों को धूल भरे कच्चे रास्तों से होकर चिलचिलाती गर्मी में प्रचार करना पड़ रहा है।
मतदान वाले दिन प्रत्याशियों की बनी रहती है चकरघिन्नी
मनोहपुर के प्रवेश कांबोज, बिहारीगढ़ के यशपाल प्रजापति, डा. रामप्रकाश, थाप्पुल का शहजाद भारती, हाजी मोबीन, सुंदरपुर के अविनाश मित्तल, इस्माईलपुर के धर्म सिंह, संजय रविदासी आदि ग्रामीणों ने बताया कि सभी गांवों में मतदान होता है। ऐसे में प्रत्याशियों को अलग-अलग पोलिंग एजेंट बनाने पड़ते हैं। चुनाव वाले दिन भी प्रत्याशियों की एक गांव से दूसरे गांव के मतदान केंद्र तक दौड़ लगाने में चकरघिन्नी बनी रहती है।

यह है अनुमानित जातिगत आंकड़ा
अनुसूचित जाति के तीन हजार, मुस्लिम ढाई हजार, बंजारा 1380, कांबोज 1370, सैनी 300, ब्राह्मण 170, राजपूत 600, जाट 180, कश्यप 1336, चौहान 280, वैश्य 335, पाल गडरिया 80, प्रजापति 70 मतदाता हैं। यह आंकड़ा अनुमानित है।
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