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Saharanpur News: बजाज शुगर मिल पर किसानों का क्रमिक अनशन 15वें दिन भी जारी
Sat, 04 Feb 2023 11:33 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 04 Feb 2023 11:33 PM IST
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नागल में बजाज शुगर मिल गेट पर क्रमिक अनशन पर बैठे किसान
नागल। बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर बजाज शुगर मिल गांगनौली पर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले किसानों का क्रमिक अनशन 15वें दिन भी जारी रहा।
जिलाध्यक्ष चौधरी सुखबीर सिंह ने कहा कि गन्ना भुगतान को लेकर किसान परेशान हैं। बजाज शुगर मिल का गन्ना भुगतान प्रदेश में सबसे पीछे चल रहा है। उन्होंने कहा कि मिल ने किसानों का भुगतान लटकाने में सारी हदें पार कर दी हैं, इसलिए अब मजबूरी में यहां आकर क्रमिक अनशन करने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि किसानों के गन्ने का भुगतान होने तक यह अनशन जारी रहेगा। मंडल अध्यक्ष नवीन त्यागी ने कहा, कि महंगाई के इस दौर में गन्ना भुगतान न होने से किसान भुखमरी के कगार पर है। उन्होंने कहा कि छह वर्ष पूर्व एक रिपोर्ट में गन्ने की लागत 329.50 रुपये बताई गई है। यदि इन वर्षों में महंगाई को शामिल किया जाए तो गन्ने की लागत ही करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है, मगर सरकार गन्ने की एमएसपी लागत से कम घोषित करती है। उन्होंने बताया कि एक क्विंटल गन्ने से 4.50 किग्रा शीरा बनता है, जिससे बनने वाले अल्कोहल पर 740 रुपये टैक्स देना पड़ता है, जबकि अंग्रेजी शराब में यही टैक्स एक हजार रुपये से तीन हजार रुपये तक है। ऐसे में सरकार को गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल देने में क्या कठिनाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता ही किसान को बर्बादी के गर्त में धकेल रही है। अनशन पर अनार सिंह प्रधान, शिवकुमार प्रधान सुनेटी, पीतम सिंह साल्हापुर आदि किसान मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष चौधरी सुखबीर सिंह ने कहा कि गन्ना भुगतान को लेकर किसान परेशान हैं। बजाज शुगर मिल का गन्ना भुगतान प्रदेश में सबसे पीछे चल रहा है। उन्होंने कहा कि मिल ने किसानों का भुगतान लटकाने में सारी हदें पार कर दी हैं, इसलिए अब मजबूरी में यहां आकर क्रमिक अनशन करने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि किसानों के गन्ने का भुगतान होने तक यह अनशन जारी रहेगा। मंडल अध्यक्ष नवीन त्यागी ने कहा, कि महंगाई के इस दौर में गन्ना भुगतान न होने से किसान भुखमरी के कगार पर है। उन्होंने कहा कि छह वर्ष पूर्व एक रिपोर्ट में गन्ने की लागत 329.50 रुपये बताई गई है। यदि इन वर्षों में महंगाई को शामिल किया जाए तो गन्ने की लागत ही करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है, मगर सरकार गन्ने की एमएसपी लागत से कम घोषित करती है। उन्होंने बताया कि एक क्विंटल गन्ने से 4.50 किग्रा शीरा बनता है, जिससे बनने वाले अल्कोहल पर 740 रुपये टैक्स देना पड़ता है, जबकि अंग्रेजी शराब में यही टैक्स एक हजार रुपये से तीन हजार रुपये तक है। ऐसे में सरकार को गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल देने में क्या कठिनाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता ही किसान को बर्बादी के गर्त में धकेल रही है। अनशन पर अनार सिंह प्रधान, शिवकुमार प्रधान सुनेटी, पीतम सिंह साल्हापुर आदि किसान मौजूद रहे।
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