{"_id":"6a5e7c061cdc1d070d023cf8","slug":"government-should-not-jeopardize-the-future-of-thousands-of-students-madani-saharanpur-news-c-30-1-smrt1024-180005-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"हजारों छात्रों के भविष्य को दांव पर न लगाए सरकार : मदनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हजारों छात्रों के भविष्य को दांव पर न लगाए सरकार : मदनी
Tue, 21 Jul 2026 01:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 21 Jul 2026 01:20 AM IST
विज्ञापन
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त किए जाने संबंधी आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
मौलाना महमूद मदनी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि यह मामला कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और सांविधानिक दायित्व से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से ध्वस्तीकरण के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत संशोधित मानचित्र की स्वीकृति, नियमितीकरण, कंपाउंडिंग, विकास शुल्क अथवा अन्य वैधानिक उपायों के माध्यम से भी मामलों का समाधान किया जा सकता है। कहा कि प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरण लंबे समय से ऐसे प्रावधानों का उपयोग करते रहे हैं।
किसी शैक्षणिक संस्थान पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई से पहले इन सभी विकल्पों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि कानून का पालन भी सुनिश्चित हो और विद्यार्थियों के शैक्षिक हित भी प्रभावित न हों। मौलाना मदनी ने कहा कि कानपुर के रोमा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज तथा वाराणसी, झांसी और इलाहाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में भी न्यायालयों ने तत्काल ध्वस्तीकरण के बजाय नियमितीकरण और कंपाउंडिंग जैसे वैधानिक उपायों को प्राथमिकता देने पर बल दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर पुनर्विचार करते हुए वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की अपील की, ताकि कानून के अनुपालन के साथ हजारों विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य और महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौलाना महमूद मदनी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि यह मामला कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और सांविधानिक दायित्व से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से ध्वस्तीकरण के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत संशोधित मानचित्र की स्वीकृति, नियमितीकरण, कंपाउंडिंग, विकास शुल्क अथवा अन्य वैधानिक उपायों के माध्यम से भी मामलों का समाधान किया जा सकता है। कहा कि प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरण लंबे समय से ऐसे प्रावधानों का उपयोग करते रहे हैं।
विज्ञापन
किसी शैक्षणिक संस्थान पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई से पहले इन सभी विकल्पों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि कानून का पालन भी सुनिश्चित हो और विद्यार्थियों के शैक्षिक हित भी प्रभावित न हों। मौलाना मदनी ने कहा कि कानपुर के रोमा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज तथा वाराणसी, झांसी और इलाहाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में भी न्यायालयों ने तत्काल ध्वस्तीकरण के बजाय नियमितीकरण और कंपाउंडिंग जैसे वैधानिक उपायों को प्राथमिकता देने पर बल दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर पुनर्विचार करते हुए वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की अपील की, ताकि कानून के अनुपालन के साथ हजारों विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य और महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विज्ञापन