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त्योहार तो मन गया, अब वापसी लौटने की राह मुश्किल
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सहारनपुर। त्योहारी सीजन में ट्रेनों में सीट मिल पाना बेहद मुश्किल बना हुआ है। अब दीपावली के बाद दूसरे शहरों में काम करने वाले लोगों के लौटने की राह मुश्किल हो गई है। दीपावली मनाने के बाद लौटने वालों की ट्रेनों में भीड़ चल रही। तत्काल टिकट और वीआईपी कोटे के लिए खासी मारामारी मची हुई है।
सहारनपुर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली जनसेवा एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, जननायक एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, सद्भावना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में लंबी वेटिंग है। यहीं हाल स्पेशल ट्रेनों का है। ऐसे में यात्रियों के पास अब तत्काल टिकट ही इकलौता सहारा बचा है। वहीं, हर ट्रेन में ड्यूटी पर जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी, सांसद और मंत्री का वीआईपी कोटा होता है।
जब ट्रेन में इस कोटे की कुछ सीट खाली होती है, तब रेलवे प्रशासन इस खाली सीटों को जरूरतमंद यात्रियों के लिए रिजर्व कर देता है। अगर रेलवे की ओर से कोटा आवंटित नहीं किया जाता है तो आरक्षण चार्ट बनाने पर वेटिंग वाले यात्री को यह सीट दे दी जाती है। स्थानीय ज्यादातर यात्री ऐसे हैं, जो सांसद, मंत्री या रेलवे अधिकारियों के परिचित है।
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सभी यात्री जुगाड़ कर ट्रेन में सीट रिजर्व कराने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, इस समय ट्रेनों में सीट पाना मुश्किल है। ट्रेनों से लौटने की वालों की भीड़ बढ़ गई है। जैसे-तैसे कर लोग अपने-अपने काम पर लौट रहे हैं। काफी लोग ऐसे भी हैं, जो अपने शहर से 100 से 150 किलोमीटर की दूूर दूसरे जनपद में काम कर रहे हैं, वह रोडवेज बस या निजी वाहन से पहुंच रहे हैं।
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सहारनपुर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली जनसेवा एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, जननायक एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, सद्भावना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में लंबी वेटिंग है। यहीं हाल स्पेशल ट्रेनों का है। ऐसे में यात्रियों के पास अब तत्काल टिकट ही इकलौता सहारा बचा है। वहीं, हर ट्रेन में ड्यूटी पर जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी, सांसद और मंत्री का वीआईपी कोटा होता है।
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जब ट्रेन में इस कोटे की कुछ सीट खाली होती है, तब रेलवे प्रशासन इस खाली सीटों को जरूरतमंद यात्रियों के लिए रिजर्व कर देता है। अगर रेलवे की ओर से कोटा आवंटित नहीं किया जाता है तो आरक्षण चार्ट बनाने पर वेटिंग वाले यात्री को यह सीट दे दी जाती है। स्थानीय ज्यादातर यात्री ऐसे हैं, जो सांसद, मंत्री या रेलवे अधिकारियों के परिचित है।
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सभी यात्री जुगाड़ कर ट्रेन में सीट रिजर्व कराने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, इस समय ट्रेनों में सीट पाना मुश्किल है। ट्रेनों से लौटने की वालों की भीड़ बढ़ गई है। जैसे-तैसे कर लोग अपने-अपने काम पर लौट रहे हैं। काफी लोग ऐसे भी हैं, जो अपने शहर से 100 से 150 किलोमीटर की दूूर दूसरे जनपद में काम कर रहे हैं, वह रोडवेज बस या निजी वाहन से पहुंच रहे हैं।