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शोक: गजल सम्राट दुष्यंत कुमार की पत्नी का निधन, भोपाल में आज किया जाएगा अंतिम संस्कार

Tue, 31 Aug 2021 08:15 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 31 Aug 2021 08:15 AM IST
सार

साहित्यकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी वे काफी लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं।रविवार देर रात उनका निधन हो गया। आदित्य एवेन्यू, एयरपोर्ट रोड, भोपाल में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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Ghazal samrat Dushyant Kumar wife dies, funeral will be done in Bhopal today
साहित्यकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी - फोटो : Amar Ujala Meerut

विस्तार

साहित्यकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी का रविवार देर रात निधन हो गया। वे अपने बेटे के साथ भोपाल में रह रहीं थीं। सहारनपुर जनपद के गांव डंगहेड़ा की रहने वाली राजेश्वरी देवी की शादी साहित्यकार दुष्यंत कुमार से 30 नवंबर, 1949 को हुई थी। बताया गया कि वे काफी लंबे समय से बीमार चल रहीं थीं। आदित्य एवेन्यू, एयरपोर्ट रोड, भोपाल में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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खास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए/यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है...साहित्यकार दुष्यंत कुमार की वह पंक्तियां हैं सामाजिक व्यवस्थाओं पर आज भी सटीक चोट हैं। दुष्यंत कुमार का जन्म राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 में हुआ था। 
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आकाशवाणी में कार्यरत रहे दुष्यंत कुमार के बाल सखा नजीबाबाद के गांव रघुनाथपुर निवासी 87 वर्षीय वयोवृद्ध सत्य कुमार त्यागी कहते हैं कि दुष्यंत न केवल महान साहित्यकार थे बल्कि सादगी पसंद, सबको साथ लेकर चलने वाले ऐसे इंसान थे जो समाज के दर्द को अपना दर्द समझते थे और सबसे अपनत्व बटोरते थे।

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दुष्यंत कुमार के बचपन के साथी सत्य कुमार बताते हैं कि भोपाल से जब लंबा सफर तय कर गांव राजपुर नवादा आया करते थे तो अपनी पुरानी फिएट कार लेकर आते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि मैं अपनी पुरानी फिएट कार का शुक्रगुजार हूं, जिसने रास्ते के सारे मिस्त्री मेरे मित्र बना दिए हैं। बेचारे मेरी फिएट कार दुरुस्त करते हैं और चाय भी पिलाते हैं। इतना ही नहीं उनके बीच रुक कर मैं जो कुछ भी महसूस करता हूं घर आने के बाद उसे गजलों में ढाल देता हूं। यकीनन इसी सोच ने दुष्यंत कुमार को देशवासियों के दिलों में स्थान दिलाया।

भावुकता भरे शब्दों में वयोवृद्ध सत्य कुमार त्यागी फरमाते हैं दुष्यंत कुमार अक्सर गंगा स्नान को जाया करते थे हालांकि उनके पास ट्रैक्टर, कार सब कुछ थे। लेकिन बैलगाड़ी उन्हें प्रिय थी। एक दिन पूर्व गंगा स्नान के लिए गंगा तट पहुंचते तब्बू लगाते और संगी-साथियों के साथ गंगा स्नान का लुत्फ उठाते।

सत्य कुमार कहते हैं कि पिता की जब मृत्यु हुई उस वर्ष भी उन्होंने गंगा स्नान के अपने दायित्वों को पूरा किया। दुष्यंत कुमार की पंक्तियां हौले-हौले पांव हिलाओ, जल सोया है छेड़ो मत/हम सब अपने-अपने दीपक यहां सिराने आएंगे...आज भी दुष्यंत के बाल सखा सत्य कुमार त्यागी याद कर भावुक हो जाते हैं।

कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता /एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों.., मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही/हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए.., सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं/मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.. यह वह पंक्तियां हैं जो गजलकार दुष्यंत कुमार की गंभीर सोच की कसौटी पर खरा उतरती हैं।

मेरा सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा/मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा..,हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए/इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए.. महान साहित्यकार दुष्यंत कुमार की वह सदाबहार पंक्तियां जो आमजन की जुबान से गुनगुनाए जाते हैं। 

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