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Saharanpur News: नोटों से सिक्काें तक...जाली मुद्रा के घेरे में सहारनपुर
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सहारनपुर। जिले में जाली मुद्रा के मामले लगातार अलग-अलग रूप में सामने आ रहे हैं। पहले पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिले, जिसकी जांच एनआईए कर रही है।
इसके बाद पीएनबी की नकुड़ शाखा में ग्राहक को 500 रुपये का जाली नोट दिए जाने का मामला सामने आया और अब 20 रुपये के नकली सिक्कों की खेप मिलने से सवाल और गहरा गया है। तीनों घटनाओं को एक साथ देखा जाए तो सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं सहारनपुर जाली मुद्रा के नेटवर्क के लिए आसान रास्ता तो नहीं बन रहा।
दरअसल, इसके पीछे सहारनपुर की भौगोलिक स्थिति भी एक अहम वजह हो सकती है। उत्तर प्रदेश के सबसे पश्चिमी और सीमावर्ती जिलों में शामिल सहारनपुर की सीमाएं हरियाणा और उत्तराखंड से लगती हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश भी जिले के बेहद नजदीक है। जिले से इन राज्यों तक सड़क संपर्क आसान है।
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ऐसे में अपराधियों के लिए एक राज्य में वारदात कर दूसरे राज्य में पहुंच जाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
जाली मुद्रा के मामले में भी जांच एजेंसियों के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है कि कहीं जिले का इस्तेमाल दूसरे राज्यों तक नकली नोट या सिक्के पहुंचाने अथवा खपाने के लिए तो नहीं किया जा रहा।
एक दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि यहां से दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल की ओर आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है। बड़ी संख्या में कारोबारी, यात्री और मालवाहक वाहन सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हैं। इस तरह की आवाजाही किसी भी अवैध नेटवर्क के लिए पहचान छिपाने और मुद्रा को दूसरे इलाके तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
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इसके बाद पीएनबी की नकुड़ शाखा में ग्राहक को 500 रुपये का जाली नोट दिए जाने का मामला सामने आया और अब 20 रुपये के नकली सिक्कों की खेप मिलने से सवाल और गहरा गया है। तीनों घटनाओं को एक साथ देखा जाए तो सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं सहारनपुर जाली मुद्रा के नेटवर्क के लिए आसान रास्ता तो नहीं बन रहा।
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दरअसल, इसके पीछे सहारनपुर की भौगोलिक स्थिति भी एक अहम वजह हो सकती है। उत्तर प्रदेश के सबसे पश्चिमी और सीमावर्ती जिलों में शामिल सहारनपुर की सीमाएं हरियाणा और उत्तराखंड से लगती हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश भी जिले के बेहद नजदीक है। जिले से इन राज्यों तक सड़क संपर्क आसान है।
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ऐसे में अपराधियों के लिए एक राज्य में वारदात कर दूसरे राज्य में पहुंच जाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
जाली मुद्रा के मामले में भी जांच एजेंसियों के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है कि कहीं जिले का इस्तेमाल दूसरे राज्यों तक नकली नोट या सिक्के पहुंचाने अथवा खपाने के लिए तो नहीं किया जा रहा।
एक दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि यहां से दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल की ओर आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है। बड़ी संख्या में कारोबारी, यात्री और मालवाहक वाहन सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हैं। इस तरह की आवाजाही किसी भी अवैध नेटवर्क के लिए पहचान छिपाने और मुद्रा को दूसरे इलाके तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।