{"_id":"68828457edeaa8e71702b24c","slug":"from-emergency-onwards-the-leadership-of-jaroda-panda-remained-in-the-hands-of-two-families-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-154738-2025-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: इमरजेंसी से लेकर दो परिवारों के हाथों रही जड़ौदा पांडा की चौधर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: इमरजेंसी से लेकर दो परिवारों के हाथों रही जड़ौदा पांडा की चौधर
Fri, 25 Jul 2025 12:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:37 AM IST
विज्ञापन
बड़गांव। त्यागी बहुल ग्राम पंचायत जड़ौदा पांडा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली बड़ी पंचायतों में शुमार होती है। इस पंचायत में चार मजरे किशनपुरा, जयपुर, शेरपुर, घिसरपड़ी हैं, जिनमें बीस हजार की आबादी निवास करती है। इमरजेंसी से लेकर गांव में दो ही परिवारों की चौधर कायम रही। इनमें भी सबसे ज्यादा ढाई दशक तक जनार्धन त्यागी परिवार का प्रभाव गांव की राजनीति पर रहा।
पुरूषोत्तम त्यागी 1972 में पहली बार जड़ौदा पांडा के प्रधान बने, जो वर्ष 1982 तक काबिज रहे। देश में इमरजेंसी लगी उसके बाद 1988 का चुनाव जनार्धन त्यागी जीते। वर्ष 1994 तक यही प्रधान रहे। अनारक्षित महिला सीट आने पर उन्होंने वर्ष 1994 में पत्नी कमलेश को चुनाव लड़वा प्रधानी जितवाई। हालांकि वर्ष 2000 में हुए पंचायत चुनाव में दोनों परिवार को दरकिनार कर मतदाताओं ने सुधा त्यागी को निर्वाचित किया। वर्ष 2005 में सुधा त्यागी के पति राजपाल त्यागी चुनाव जीते, लेकिन बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। वर्ष 2006 के उपचुनाव में जनार्धन त्यागी की पत्नी कमलेश फिर से उप चुनाव में जीत दर्ज की।
वर्ष 2010 में सीट एससी आरक्षित हुई, जिस पर राकेश त्यागी ने अपनी अनुसूचित जाति की पत्नी विनिता को चुनाव लड़वाकर जीत दिलाई। वर्ष 2015 के चुनाव में जनार्धन त्यागी ने छोटे भाई राकेश त्यागी की पत्नी सुषमा प्रधान बनी। गत पंचायत चुनाव में इन दोनो परिवारों से अलग सबसे कम उम्र के विशांत उर्फ शालू त्यागी ने प्रधानी का चुनाव जीता।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
गांव का है ऐतिहासिक महत्व
यहां महाभारत काल से जुड़े पांड़व तालाब, जूड़ मंदिर, प्रणामी संप्रदाय के सैकड़ों वर्ष पुराने भव्य मंदिर स्थापित हैं जिनकी महत्ता विदेशों तक के श्रद्धालुओं में है।
-- -- -- --
- पूर्व प्रधान सुषमा त्यागी का कहना है कि उनके व परिवार द्वारा ढाई दशक के प्रधानी कार्यकाल में गांव में पशु चिकित्सालय, उप डाकघर आदि समेत काफी विकास कार्य कराए गए।
- ग्राम प्रधान विशांत उर्फ शालू त्यागी का कहना है कि उन्होंने पंचायत के अंदर पाॅवर ग्रिड से 130 सोलर लाइटें लगवाने का प्रस्ताव, आयुर्वेद अस्पताल, गांव के लिए बाईपास, सीसी आदि कार्य कराया है। अब गांव को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए।
विज्ञापन
पुरूषोत्तम त्यागी 1972 में पहली बार जड़ौदा पांडा के प्रधान बने, जो वर्ष 1982 तक काबिज रहे। देश में इमरजेंसी लगी उसके बाद 1988 का चुनाव जनार्धन त्यागी जीते। वर्ष 1994 तक यही प्रधान रहे। अनारक्षित महिला सीट आने पर उन्होंने वर्ष 1994 में पत्नी कमलेश को चुनाव लड़वा प्रधानी जितवाई। हालांकि वर्ष 2000 में हुए पंचायत चुनाव में दोनों परिवार को दरकिनार कर मतदाताओं ने सुधा त्यागी को निर्वाचित किया। वर्ष 2005 में सुधा त्यागी के पति राजपाल त्यागी चुनाव जीते, लेकिन बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। वर्ष 2006 के उपचुनाव में जनार्धन त्यागी की पत्नी कमलेश फिर से उप चुनाव में जीत दर्ज की।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में सीट एससी आरक्षित हुई, जिस पर राकेश त्यागी ने अपनी अनुसूचित जाति की पत्नी विनिता को चुनाव लड़वाकर जीत दिलाई। वर्ष 2015 के चुनाव में जनार्धन त्यागी ने छोटे भाई राकेश त्यागी की पत्नी सुषमा प्रधान बनी। गत पंचायत चुनाव में इन दोनो परिवारों से अलग सबसे कम उम्र के विशांत उर्फ शालू त्यागी ने प्रधानी का चुनाव जीता।
विज्ञापन
गांव का है ऐतिहासिक महत्व
यहां महाभारत काल से जुड़े पांड़व तालाब, जूड़ मंदिर, प्रणामी संप्रदाय के सैकड़ों वर्ष पुराने भव्य मंदिर स्थापित हैं जिनकी महत्ता विदेशों तक के श्रद्धालुओं में है।
- पूर्व प्रधान सुषमा त्यागी का कहना है कि उनके व परिवार द्वारा ढाई दशक के प्रधानी कार्यकाल में गांव में पशु चिकित्सालय, उप डाकघर आदि समेत काफी विकास कार्य कराए गए।
- ग्राम प्रधान विशांत उर्फ शालू त्यागी का कहना है कि उन्होंने पंचायत के अंदर पाॅवर ग्रिड से 130 सोलर लाइटें लगवाने का प्रस्ताव, आयुर्वेद अस्पताल, गांव के लिए बाईपास, सीसी आदि कार्य कराया है। अब गांव को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए।