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Saharanpur News: शादी अनुदान योजना में फर्जीवाड़ा, विवाहिता बनी कुंवारी
Wed, 28 Oct 2026 01:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 28 Oct 2026 01:03 AM IST
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सहारनपुर। शादी अनुदान योजना में विवाहिता बनकर लाभ लेने का बड़ा मामला सामने आया है। तहसील और जिला स्तरीय जांच के बाद 143 आवेदनों को निरस्त किया गया है। जिले में 627 आवेदकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जांच के बाद 437 पात्रों को योजना का लाभ दिया गया है।
दरअसल, आवेदक को योजना में लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद ब्लॉकवार सूची जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी की जाती है। ब्लॉक स्तर पर शुरुआती जांच होती है। इसके बाद खंड विकास अधिकारी और संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी आवेदनों में अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच करते हैं। यहीं से फर्जीवाड़े की कोशिश का खुलासा हुआ है।
जांच में सामने आया कि कई लोगों ने गलत दस्तावेज अपलोड कर दिए। 143 में करीब 30 आवेदन ऐसे रहे, जिन्होंने शादी की तिथि गलत दर्शायी थी। इसी तरह पीएफएमए(पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत खातों की जांच की गई। इनमें भी दस फीसदी खाते ऐसे रहे, जिनमें आधार कार्ड या फिर पैनकार्ड सही नहीं थे। योजना में सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के जरिये भेजी जाती है। विभाग ने 437 लाभार्थियों को 87,40,000 रुपये की राशि सीधे खाते में भेजी हैं।
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- यह है पात्रता की शर्ते
पिछड़े वर्ग के गरीब और जरूरतमंद लोगों को शादी के लिए शासन अनुदान के रूप में 20 हजार रुपये की सहायता राशि देता है। योजना का लाभ सिर्फ बेटियों को दिया जाता है। ऐसे अभिभावक जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक नहीं है। वह आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को शादी का लाभ मिल सकता है। योजना में पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को वरीयता मिलती है। शादी की तिथि से 90 दिन पहले या बाद में आवेदन किया जा सकता है। योजना में अपात्र पाए गए आवेदकों को आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं।
- वर्जन
शादी अनुदान योजना में पात्रों को 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। जिला स्तर पर हुई जांच में 143 आवेदन निरस्त किए गए हैं। ऐसे में विभाग ने करीब 28 लाख रुपये के सरकारी धन को गलत हस्तांतरित होने से बचाया है।
- अजय कुमार, प्रभारी पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी
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दरअसल, आवेदक को योजना में लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद ब्लॉकवार सूची जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी की जाती है। ब्लॉक स्तर पर शुरुआती जांच होती है। इसके बाद खंड विकास अधिकारी और संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी आवेदनों में अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच करते हैं। यहीं से फर्जीवाड़े की कोशिश का खुलासा हुआ है।
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जांच में सामने आया कि कई लोगों ने गलत दस्तावेज अपलोड कर दिए। 143 में करीब 30 आवेदन ऐसे रहे, जिन्होंने शादी की तिथि गलत दर्शायी थी। इसी तरह पीएफएमए(पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत खातों की जांच की गई। इनमें भी दस फीसदी खाते ऐसे रहे, जिनमें आधार कार्ड या फिर पैनकार्ड सही नहीं थे। योजना में सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के जरिये भेजी जाती है। विभाग ने 437 लाभार्थियों को 87,40,000 रुपये की राशि सीधे खाते में भेजी हैं।
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- यह है पात्रता की शर्ते
पिछड़े वर्ग के गरीब और जरूरतमंद लोगों को शादी के लिए शासन अनुदान के रूप में 20 हजार रुपये की सहायता राशि देता है। योजना का लाभ सिर्फ बेटियों को दिया जाता है। ऐसे अभिभावक जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक नहीं है। वह आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को शादी का लाभ मिल सकता है। योजना में पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को वरीयता मिलती है। शादी की तिथि से 90 दिन पहले या बाद में आवेदन किया जा सकता है। योजना में अपात्र पाए गए आवेदकों को आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं।
- वर्जन
शादी अनुदान योजना में पात्रों को 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। जिला स्तर पर हुई जांच में 143 आवेदन निरस्त किए गए हैं। ऐसे में विभाग ने करीब 28 लाख रुपये के सरकारी धन को गलत हस्तांतरित होने से बचाया है।
- अजय कुमार, प्रभारी पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी