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पॉलिसी जमा कराने के नाम पर वकील से ठगी
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पॉलिसी जमा कराने के नाम पर वकील से ठगी
सहारनपुर। जीवन बीमा की किस्त जमा कराने के नाम पर अधिवक्ता से 45 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
कोतवाली सदर बाजार के कपिल विहार निवासी विकास कुमार वर्मा अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि उनकी लाइफ इंश्योरेंस की वार्षिक किस्त 29388 रुपये जाती है। वर्ष 2019 और 2020 की किस्तें जमा करा चुके हैं। पांच फरवरी को उनके मोबाइल फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि पॉलिसी में एजेंट होने की वजह से उनको पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए एजेंट को हटाना होगा। इस पर अधिवक्ता ने एजेंट को हटाने के लिए प्रार्थना पत्र लिखकर बताए गए फोन नंबर पर व्हाट्सएप कर दिया। आरोपी द्वारा दिए गए एक बैंक के खाते में 29388 रुपये किस्त जमा करा दी। इसके बाद 10 फरवरी को आरोपी का दोबारा फोन आया। उसने कहा कि पॉलिसी का लाभ लेने के लिए एक फार्म के साथ 15500 रुपये भेजने होंगे। अधिवक्ता ने आरोपी पर विश्वास कर दोबारा आरटीजीएस के माध्यम से पैसा जमा करा दिया। अधिवक्ता ने जब रिफंड के लिए कहा तो आरोपी ने पैसा नहीं भेजा। इस संबंध में जब वह कंपनी के कार्यालय में गए तो पता चला कि उनकी किस्त जमा नहीं हुई है और न ही फोन करने वाला व्यक्ति कंपनी का अधिकारी है। इसके पश्चात अधिवक्ता को उसके साथ हुई ठगी का पता लगा। अधिवक्ता ने बताया कि रोपी अब भी फोन करके 18 हजार रुपये ओर जमा कराने के लिए कह रहा है। पीड़ित ने एसएसपी से मामले की शिकायत कार्रवाई की मांग की।
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सहारनपुर। जीवन बीमा की किस्त जमा कराने के नाम पर अधिवक्ता से 45 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
कोतवाली सदर बाजार के कपिल विहार निवासी विकास कुमार वर्मा अधिवक्ता हैं। उन्होंने बताया कि उनकी लाइफ इंश्योरेंस की वार्षिक किस्त 29388 रुपये जाती है। वर्ष 2019 और 2020 की किस्तें जमा करा चुके हैं। पांच फरवरी को उनके मोबाइल फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताया। आरोपी ने कहा कि पॉलिसी में एजेंट होने की वजह से उनको पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए एजेंट को हटाना होगा। इस पर अधिवक्ता ने एजेंट को हटाने के लिए प्रार्थना पत्र लिखकर बताए गए फोन नंबर पर व्हाट्सएप कर दिया। आरोपी द्वारा दिए गए एक बैंक के खाते में 29388 रुपये किस्त जमा करा दी। इसके बाद 10 फरवरी को आरोपी का दोबारा फोन आया। उसने कहा कि पॉलिसी का लाभ लेने के लिए एक फार्म के साथ 15500 रुपये भेजने होंगे। अधिवक्ता ने आरोपी पर विश्वास कर दोबारा आरटीजीएस के माध्यम से पैसा जमा करा दिया। अधिवक्ता ने जब रिफंड के लिए कहा तो आरोपी ने पैसा नहीं भेजा। इस संबंध में जब वह कंपनी के कार्यालय में गए तो पता चला कि उनकी किस्त जमा नहीं हुई है और न ही फोन करने वाला व्यक्ति कंपनी का अधिकारी है। इसके पश्चात अधिवक्ता को उसके साथ हुई ठगी का पता लगा। अधिवक्ता ने बताया कि रोपी अब भी फोन करके 18 हजार रुपये ओर जमा कराने के लिए कह रहा है। पीड़ित ने एसएसपी से मामले की शिकायत कार्रवाई की मांग की।
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