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Saharanpur News: मलिन बस्ती में तब्दील हो गई चार मंजिला कांशीराम कॉलोनी
Mon, 05 Feb 2024 12:10 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 05 Feb 2024 12:10 AM IST
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सहारनपुर। राकेश टाकिज के पीछे बनी चार मंजिला कांशीराम कॉलोनी 16 साल में ही मलिन बस्ती में तब्दील हो गई है। यहां रह रहे 80 परिवार बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम हैं। जर्जर हो चुकी इमारतें, टूटी नालियां, गंदगी के ढेर और जलभराव यहां की दास्तां को बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बसपा सरकार के बसाने के बाद इसकी किसी ने उनकी सुध नहीं ली है। इमारतों का निर्माण कार्य जहां रुका था, वहीं रुका पड़ा है।
वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने उक्त कॉलोनी का निर्माण कराया था। यहां अलग अलग इमारतों में 80 कमरे बने हैं। एक इमारत ऐसी है, जो प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान अधूरी रह गई थी। उक्त इमारत की बाहरी दीवारों पर पलस्तर नहीं हो सका था। तब से यह इमारत ऐसी ही पड़ी है। उक्त इमारत की चौथी मंजिल पर बने मकान की दो साइड की दस दस फीट ऊंची दीवारें गिर चुकी हैं। ऐसे में ऊपर रह रहे परिवार को तिरपाल लगानी पड़ी है। लेकिन तिरपाल के कारण उक्त परिवार के सदस्यों की जिंदगी 24 घंटे खतरे में रहती है, क्योंकि तिरपाल से बाहर कदम आते ही 35 फीट नीचे केवल जमीन है। इसके अलावा कॉलोनी की नालियां टूटी पड़ी हैं। इसकी वजह से जलभराव रहता है। सफाई व्यवस्था भी चौपट है। सफाईकर्मी तो आते हैं, लेकिन कचरा यहीं छोड़ जाते हैं। पेयजल आपूर्ति भी भगवान भरोसे है।
स्थानीय लोगों की पीड़ा
-कॉलोनी निवासी शंकर सिंह ने बताया कि वह शुरू से इस कॉलोनी में रह रहे हैं। कॉलोनी के बनने के बाद से प्रशासन ने कोई ध्यान इमारतों पर नहीं दिया है। इसकी वजह से इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, जिनके गिरने का डर रहता है।
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-80 वर्षीय सोढी सिंह की मांग है कि जिला प्रशासन या नगर निगम कॉलोनी की बदहाली की ओर नजर डाले। उनका कहना है कि कभी शानदार इमारतें थी, जो आज मलिन बस्ती के रूप में नजर आने लगी हैं।
-सिब्बु सिंह कहते हैं कि कहने को इमारतें सरकारी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। भीतर तो लोग अपने मकानों की मरम्मत आदि करा रहा है। लेकिन बाहर से हालत खराब है।
-नितिन कुमार का आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण कांशीराम कॉलोनी के लोग समाज की मुख्य धारा से कटे हुए हैं। साफ सफाई नहीं होने के कारण लोग कॉलोनी में आने तक से कतराते हैं।
कांशीराम कॉलोनी में सफाईकर्मी सफाई करते हैं। रही बात नालियों के टूटे होने और गंदगी नहीं उठने की तो अधिकारियों को भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा। जो भी नगर निगम वहां कर सकता है, वह काम कराए जाएंगे। जिससे जनता की समस्या को दूर किया जा सके।
राजेश कुमार यादव, अपर नगरायुक्त
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वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने उक्त कॉलोनी का निर्माण कराया था। यहां अलग अलग इमारतों में 80 कमरे बने हैं। एक इमारत ऐसी है, जो प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान अधूरी रह गई थी। उक्त इमारत की बाहरी दीवारों पर पलस्तर नहीं हो सका था। तब से यह इमारत ऐसी ही पड़ी है। उक्त इमारत की चौथी मंजिल पर बने मकान की दो साइड की दस दस फीट ऊंची दीवारें गिर चुकी हैं। ऐसे में ऊपर रह रहे परिवार को तिरपाल लगानी पड़ी है। लेकिन तिरपाल के कारण उक्त परिवार के सदस्यों की जिंदगी 24 घंटे खतरे में रहती है, क्योंकि तिरपाल से बाहर कदम आते ही 35 फीट नीचे केवल जमीन है। इसके अलावा कॉलोनी की नालियां टूटी पड़ी हैं। इसकी वजह से जलभराव रहता है। सफाई व्यवस्था भी चौपट है। सफाईकर्मी तो आते हैं, लेकिन कचरा यहीं छोड़ जाते हैं। पेयजल आपूर्ति भी भगवान भरोसे है।
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स्थानीय लोगों की पीड़ा
-कॉलोनी निवासी शंकर सिंह ने बताया कि वह शुरू से इस कॉलोनी में रह रहे हैं। कॉलोनी के बनने के बाद से प्रशासन ने कोई ध्यान इमारतों पर नहीं दिया है। इसकी वजह से इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, जिनके गिरने का डर रहता है।
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-80 वर्षीय सोढी सिंह की मांग है कि जिला प्रशासन या नगर निगम कॉलोनी की बदहाली की ओर नजर डाले। उनका कहना है कि कभी शानदार इमारतें थी, जो आज मलिन बस्ती के रूप में नजर आने लगी हैं।
-सिब्बु सिंह कहते हैं कि कहने को इमारतें सरकारी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। भीतर तो लोग अपने मकानों की मरम्मत आदि करा रहा है। लेकिन बाहर से हालत खराब है।
-नितिन कुमार का आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण कांशीराम कॉलोनी के लोग समाज की मुख्य धारा से कटे हुए हैं। साफ सफाई नहीं होने के कारण लोग कॉलोनी में आने तक से कतराते हैं।
कांशीराम कॉलोनी में सफाईकर्मी सफाई करते हैं। रही बात नालियों के टूटे होने और गंदगी नहीं उठने की तो अधिकारियों को भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा। जो भी नगर निगम वहां कर सकता है, वह काम कराए जाएंगे। जिससे जनता की समस्या को दूर किया जा सके।
राजेश कुमार यादव, अपर नगरायुक्त