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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Former minister Rashid Masood preparing to blow up the SP-Congress

सपा-कांग्रेस को झटका देने की तैयारी कर रहे पूर्व मंत्री रशीद मसूद

Tue, 25 Apr 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 25 Apr 2017 12:28 AM IST
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Former minister Rashid Masood preparing to blow up the SP-Congress
पूर्व मंत्री रशीद मसूद। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में सियासत के माहिर खिलाड़ी पूर्व सांसद रशीद मसूद बसपा में शामिल होने औपचारिक घोषणा से पहले सपा और कांग्रेस को झटका देना चाहेंगे।
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यही कारण है कि बसपा सुप्रीमो से मुलाकात के बाद सहारनपुर पहुंचे काजी रशीद मसूद अपने खेमे को बढ़ाने के लिए सपा और कांग्रेस नेताओं की नब्ज टटोलने में जुटे हैं।

पार्टी में हाशिए पर चले गए नेताओं को साथ लेकर वे बसपा में शामिल होना चाहेंगे। यही कारण है कि काजी खेमा कई बड़े नेताओं से भी संपर्क साधे हुए है।विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब बसपा पूर्व सांसद काजी रशीद मसूद के जरिए अपनी जमीन मजबूत करना चाह रही है।
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लखनऊ में लंबी मुलाकात के बाद काजी यहां दूसरी पार्टियों से नेताओं को तोड़कर अपने साथ लाना चाहेंगे। ताकि बसपा में शामिल होने पर अपने कद के मुताबिक धाक जमा सके। यही कारण है कि लखनऊ से वापसी के बाद काजी खेमा लगातार विधानसभावार दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क साधे हुए है।
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समाजवादी पार्टी में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में देवबंद से टिकट कटने से नाराज मीना राणा, कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन अरुण राणा सहित ऐसे नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है जो पार्टी में ज्यादा तवज्जो नहीं पा रहे हैं।

इसके अलावा मुस्लिम नेताओं पर भी सेंधमारी की पूरी कवायद की जा रही है। आपको बता दें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे।

मगर, उन्हें यहां से शिकस्त खानी पड़ी थी। उस वक्त रशीद मसूद के भतीजे इमरान मसूद भी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे और बहुतायत में मुस्लिम वोट अपने पाले में कर लिया था।

ऐसे में मुस्लिम मतों को बसपा के पाले में लाने के लिए काजी घेमे के पास अपनी किलेबंदी करना भी चुनौती है। आपको बता दें कि सहारनपुर किसी जमाने में बसपा का बेहद मजबूत गढ़ माना जाता था। 

पूर्व मंत्री स्व. चौधरी यशपाल सिंह के बेटे इंद्रसेन को विधानसभा चुनाव में पहले सपा ने प्रत्याशी घोषित किया, मगर ऐन वक्त पर यह सीट कांग्रेस के कोटे में चली गई। हालांकि इंद्रसेन चुनाव में डटे रहे।


40 हजार से ज्यादा वोट लेकर अपनी मजबूती दिखाई। इससे पहले जनमंच सभागार में काजी खेमा और चौधरी यशपाल परिवार ने एकजुट होने का ऐलान किया था।  ऐसे में रुद्रसेन और इंद्रसेना पर भी निगाहें टिकी हैं।
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